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Himachal: हिमाचल के किसान नेकराम शर्मा को पद्मश्री अवार्ड, ऐसे हासिल किया मुकाम

Thu, 26 Jan 2023 01:17 AM IST
Krishan Singh न्यूज डेस्क, अमर उजाला,मंडी/करसोग
न्यूज डेस्क, अमर उजाला,मंडी/करसोग Published by: Krishan Singh Updated Thu, 26 Jan 2023 01:17 AM IST
सार

 हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले के नेकराम शर्मा को भी पद्मश्री से नवाजा जाएगा।  नेकराम शर्मा जैविक खेती से जुड़े हैं। 'नौ-अनाज' की पारंपरिक फसल प्रणाली को पुनर्जीवित कर रहे हैं।  

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Padma Shri Award to Himachal farmer Nekram Sharma for Revive the traditional cropping system of 'nau anaj
किसान नेकराम अपने परिवार के साथ। - फोटो : संवाद

विस्तार

केंद्र सरकार की तरफ से गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर पद्म पुरस्कारों की घोषणा की । कृषि क्षेत्र में विशिष्ट सेवा के लिए हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले के नेकराम शर्मा पद्मश्री पुरस्कार के लिए चुने गए हैं।  नेकराम शर्मा जैविक खेती से जुड़े हैं। वह नौ अनाज की पारंपरिक फसल प्रणाली को पुनर्जीवित कर रहे हैं।  नौ अनाज एक प्राकृतिक अंतरफसल विधि है जिसमें नौ खाद्यान्न बिना किसी रासायनिक उपयोग के जमीन के एक ही टुकड़े पर उगाए जाते हैं। इससे पानी के उपयोग में 50 फीसदी की कटौती और भूमि की उर्वरता बढ़ती है। उन्होंने अन्य किसानों को भी इस प्रणाली को अपनाने के लिए प्रेरित किया। साथ ही स्थानीय स्वदेशी बीजों का उत्पादन कर छह राज्यों में 10,000 से अधिक किसानों को बिना किसी शुल्क के वितरित कर रहे हैं। 

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 करसोग के नांज गांव के साधारण परिवार में जन्मे 59 वर्षीय किसान नेक राम ने पारंपरिक अनाज के सरंक्षण और संवर्धन के लिए असाधारण कार्य किया है। यह इनकी लगन का ही नतीजा है कि आज करसोग क्षेत्र में आधुनिकता के दौर में भी पारंपरिक खेती को तवज्जो दी जाती है। पिछले 28 सालों से 10वीं कक्षा तक पढ़े नेकराम ने न केवल पारंपरिक अनाज के बीज को संरक्षित कर इसका दायरा बढ़ाया है, बल्कि एक हजार किसानों का जोड़कर लुप्त हो रहे मोटे अनाज को लेकर जागरूकता की अलख भी जगाई। एक-एक किसान परिवार को जोड़ते हुए नौ अनाज की पारंपरिक फसल प्रणाली को बढ़ाया है। नेकराम इन किसानों के माध्यम से पारंपरिक बीज देते और जागरूक करते हैं।
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इनका मानना है कि मोटा अनाज पोषण से भरपूर हैं। इनका सरंक्षण भी होना चाहिए और खेती भी। नेक राम ने कहा कि यहां के किसान पारंपरिक तरीके से कई तरह की फसलों की खेती करते थे। इनमें मोटे अनाज (रागी, झंगोरा, कौणी, चीणा आदि), धान, गेहूं, जौ, दालें (गहत, भट्ट, मसूर, लोबिया, राजमा,माश आदि), तिलहन, कम उपयोग वाली फसलें (चैलाई, कुट्टू, ओगला, बथुआ, कद्दू, भंगीरा, जखिया आदि)। लेकिन समय के साथ पारंपरिक बीज भी खत्म होता गया और इन्हें उगाने का तरीका भी बदल गया। नेकराम ने बताया कि उनकी पत्नी, बहू और बेटा काफी मदद करते हैं।   
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बीज बैंक में 40 तरह का अनाज
नेक राम ने 40 तरह के अनाज का एक अनूठा बीज बैंक बनाया है। इस बीज बैंक में कई ऐसे अनाज हैं, जो विलुप्त होने की कगार पर हैं। कई ऐसे भी हैं, जिनके बारे में आपने शायद ही सुना हो।

1984 तक नौकरी नहीं मिली तो खेती की शुरू

Padma Shri Award to Himachal farmer Nekram Sharma for Revive the traditional cropping system of 'nau anaj
परिवार के साथ खेतों में नेकराम। - फोटो : सोशल मीडिया
पदमश्री नेक राम ने बताया कि दसवीं पास करने के बाद 1984 तक उन्होंने नौकरी के प्रयास किए। लेकिन सफलता नहीं मिलने पर उन्होंने खेतीबाड़ी शुरू की। कीटनाशकों का इस्तेमाल करते उनके जहन में आया कि प्राकृतिक खेती क्यों नहीं हो सकती? इस तरह की खेती पर्यावरण और लोगों की सेहत से खिलवाड़ है। इस ओर सोचना शुरू किया तो उनकी सोच और खोज बेंगलुरु तक ले गई। जहां उन्होंने कृषि की पारंपरिक खेती के बारे में जानकारी हासिल की और नौ अनाज प्रणाली के बारे में जाना। उसके बाद नौणी और पालमपुर विश्वविद्यालय में सीखने का मौका मिला और 1995 के आसपास प्राकृतिक खेती को पूरी तरी अपना लिया। 

क्या कहते हैं नेकराम
आज से हजारों वर्ष पूर्व जब मानव ने कृषि का अविष्कार किया था, तब उसके पास केवल सीमित संसाधन उपलब्ध थे। अपने आसपास मौजूद वस्तुओं से, चाहे वे कृषि उपकरण हों (पाषाण) या फिर स्थानीय बीज, उनका उपयोग कर उसने खेती को जन्म दिया व खाने लायक अन्न को पहचान कर उसके बीजों को बोते हुए उसने विभिन्न प्रकार के अनाज उगाना प्रारंभ किया। इसे भूलना नहीं चाहिए। नौ अनाज की पारंपरिक फसल प्रणाली को बढ़ावा मिलना चाहिए। इसके लिए हमें मिलकर प्रयास करने होंगे।- नेक राम, पदमश्री  विजेता
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