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Sirmour News: विश्व के दो फीसदी टॉप साइंटिस्टों में पच्छाद के डॉ. पंकज अत्री शामिल

Wed, 18 Oct 2023 08:50 PM IST
Krishan Singh संवाद न्यूज एजेंसी, नाहन (सिरमौर)
संवाद न्यूज एजेंसी, नाहन (सिरमौर) Published by: Krishan Singh Updated Wed, 18 Oct 2023 08:50 PM IST
सार

 प्रदेश के जिला सिरमौर के पच्छाद उपमंडल के डॉ. पंकज अत्री दुनिया के दो फीसदी टॉप वैज्ञानिकों की सूची में शुमार हो गए हैं। विज्ञान के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए उन्हें 13 नवंबर को जापान में यंग रिसर्चर अवार्ड से नवाजा जाएगा। 

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Pachhad's Dr. Pankaj Attri included among two percent top scientists of the world
डॉ. पंकज अत्री - फोटो : संवाद

विस्तार

हिमाचल प्रदेश के जिला सिरमौर के पच्छाद उपमंडल के डॉ. पंकज अत्री दुनिया के दो फीसदी टॉप वैज्ञानिकों की सूची में शुमार हो गए हैं। विज्ञान के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए उन्हें 13 नवंबर को जापान में यंग रिसर्चर अवार्ड से नवाजा जाएगा। डॉ. पंकज की इस उपलब्धि से न केवल पच्छाद का गौरव बढ़ा है, बल्कि देश और दुनिया में हिमाचल का भी कद भी बढ़ गया है। डॉ. पंकज को डिविजन ऑफ एप्लाइड प्लाजमा फिजिक्स में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए पुरस्कार मिलेगा। एशिया पेसिफिक फिजिकल सोसायटी (एएपीपीएस)-डिवीजन ऑफ एप्लाइड प्लाजमा फिजिक्स (डीपीपी) यंग रिसर्चर अवार्ड (अंडर-40) की हाल ही में घोषणा हुई है। उनके पिता जगदीश शर्मा, छोटे भाई अंकित अत्री और बहन निताशा अत्री ने खुशी जताई है। पच्छाद के नैनाटिक्कर के मछाड़ी गांव के रहने वाले डॉ. पकंज के नाम अब तक 130 पब्लिकेशन, 10 बुक चैप्टर और 7 पेटेंट हैं।

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जापान में हैं सहायक प्रोफेसर
9 मार्च 1983 को मां संतोष शर्मा और पिता जगदीश शर्मा के घर जन्मे डॉ. पंकज ने नाहन कॉलेज से बीएससी की। इसके बाद दिल्ली यूनिवर्सिटी से एसएससी की पढ़ाई पूरी की। यहां से पीएचडी करने के बाद उनका चयन साउथ कोरिया की कांगून यूनिवर्सिटी में सहायक प्राध्यापक के तौर पर हुआ। यहां सेवाकाल के दौरान उनका चयन जापान की सम्मानजनक फैलोशिप जेएसपीएस के लिए 2016 में हुआ। एक साल बाद ही वर्ष 2017 में उन्हें बेल्जियम की प्रतिष्ठित मैरी क्यूरी फैलोशिप फॉर यूरोपियन यूनिवर्सिटी मिली। लिहाजा, दो साल के लिए बेल्जियम चले गए। उनकी शोध एप्लाइड प्लाजमा का उपयोग कैंसर की लाइलाज बीमारी में भी होता है। दो साल की फैलोशिप पूरी के बाद दोबारा जापान की क्यूशू यूनिवर्सिटी में सहायक प्रोफेसर बन गए। वर्तमान में इसी यूनिवर्सिटी में सेवाएं दे रहे हैं। डाॅ. पंकज अत्री ने बताया कि उनके कई पेटेंट हैं। बिना केमिकल का फर्टिलाइजर (उर्वरक) तैयार किया है।

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