आठ कानूनों को तीन साल नजरअंदाज करने को विपक्ष की ‘ना’, सत्ता पक्ष की ‘हां’
हिमाचल प्रदेश विधानसभा के शीत सत्र के पांचवें दिन सदन में विपक्ष के हाथ फिर ग्लोबल इन्वेस्टर्स मीट का हथियार लग गया। ठीक महीने भर पहले ही धर्मशाला में हुई इस बहुचर्चित ग्लोबल इन्वेस्टर्स मीट को अपने उद्देश्य पर खरा उतारने की बात कर सत्तारूढ़ दल ने आठ कानूनों को तीन साल तक नजरअंदाज करने का बिल पारित करने का प्रस्ताव रखा तो विपक्ष ने साफ ‘ना’ कर दी।
यही नहीं, विपक्षी कांग्रेस ने माकपा के एकमात्र विधायक को साथ लेकर हिमाचल के हितों की दुहाई देते हुए इस पर हंगामा खड़ा कर दिया और वॉकआउट कर दिया। विपक्ष की गैर हाजिरी में ही सत्ता पक्ष ने ‘हां’ में ‘हां’ मिलाकर यह बिल ध्वनिमत से पारित कर दिया। इसी मुद्दे पर विपक्ष का पांच दिन में यह तीसरा वॉकआउट था। छठे दिन भी विपक्ष ने इसी मुद्दे पर भाजपा सरकार को घेरने की रणनीति बना दी है।
सात और आठ नवंबर को धर्मशाला के नेताजी सुभाष चंद्र मैदान में हुई इस ग्लोबल इन्वेस्टर्स की आंच यहां से महज आठ किलोमीटर दूर तपोवन में शीत सत्र को खूब तपा रही है। पहले दिन सोमवार को ही ग्लोबल इन्वेस्टर्स मीट में एक बड़े घोटाले का आरोप लगाते हुए विपक्ष ने सब काम रोककर इस पर स्थगन प्रस्ताव दिया। यह नामंजूर हुआ तो वाकआउट कर दिया। दूसरे दिन मंगलवार को भी महंगाई के साथ इसी मुद्दे पर चर्चा करने के लिए नियम-67 के तहत काम रोको प्रस्ताव दिया, यह भी मंजूर नहीं हुआ तो विपक्ष ने फिर दूसरे दिन भी वेल में जाकर विरोध-प्रदर्शन करते हुए वाकआउट किया।
सदन में इस मुद्दे पर वार-पलटवार और तंज तो हर दिन ही कसे जाते रहे। पांचवें दिन इन्वेस्टर्स मीट के वादे के मुताबिक उद्योगपतियों को हिमाचल में तीन साल तक एनओसी लेने की शर्त समाप्त करने का बिल पारित किया गया। इस विधेयक को पारित करने से एक महीने पहले ही सरकार ने अध्यादेश लाकर संबंधित कानून लागू कर दिया है। यानी उन्हें तीन साल तक आठ-आठ विभागों से सरकार को कोई एनओसी नहीं लेने होंगे।
इन आठ कानूनों में नहीं लेना होगा उद्योगपतियों को तीन साल तक एनओसी
आठ एनओसी की जगह उद्योग विभाग एकमात्र स्वीकार्यता प्रमाणपत्र देगा और उसको लेकर ही उद्योग स्थापित होंगे। उद्योगों के कार्यरूप में आने पर ही तमाम अनापत्तियां लेनी होगी। विपक्ष का यही सवाल था कि जब छह मंजिल का भवन बन जाएगा तो उसे गिराने का क्या औचित्य होगा।
यही इस कानून की खामी है, जबकि सत्तापक्ष दोहराता रहा कि विपक्ष हिमाचल की आमदनी का जरिया बनाने, देश-दुनिया के उद्योगपतियों को हिमाचल लाने और बेरोजगारों को रोजगार देने का सरकार का रास्ता रोक रहा है।
इसी धींगामुश्ती से जाहिर है कि शनिवार को तपोवन सरकार के धर्मशाला से शिमला विदा होने से पहले भी खूब तपेगा। उद्योगपतियों को तीन साल तक या उद्योगों के कार्यरूप में आने तक जिन आठ कानूनों के तहत एनओसी नहीं लेने होंगे वे यह हैं -
-हिमाचल प्रदेश पंचायती राज एक्ट 1994
-हिमाचल प्रदेश म्यूनिसिपल कारपोरेशन एक्ट 1994
-हिमाचल प्रदेश म्यूनिसिपल एक्ट 1994
-हिमाचल प्रदेश फायर फाइटिंग सर्विसेज एक्ट 1984
-हिमाचल प्रदेश रोड साइड लैंड कंट्रोल एक्ट 1968
-हिमाचल प्रदेश शॉप्स एंड कॉमर्शियल एस्टेबलिशमेंट एक्ट 1969
-हिमाचल प्रदेश सोसाइटीज रजिस्ट्रेशन एक्ट 2006
-हिमाचल प्रदेश टाउन एंड कंट्री प्लानिंग एक्ट 1977