फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Shimla News ›   Nobody climbs Manimahesh mountain.

रहस्य से उठने लगा पर्दा, इसलिए आज तक मणिमहेश नहीं चढ़ पाए पर्वतारोही

Fri, 10 Jun 2016 11:53 AM IST
अनिल शर्मा/अमर उजाला, चंबा
अनिल शर्मा/अमर उजाला, चंबा Updated Fri, 10 Jun 2016 11:53 AM IST
विज्ञापन
 Nobody climbs Manimahesh mountain.
पर्वत से जुड़ी किवदंतियों और इसके अविजित होने के रहस्य से अब पर्दा उठने लगा है। - फोटो : Demo pic

मणिमहेश कैलाश पर्वत उन बिरले पहाड़ों में से है, जो आज भी अजेय है। इस पर चढ़ने की तमाम कोशिशें नाकाम तो हुईं ही, कई लोगों ने अपनी जान गंवाई। इस पर्वत से जुड़ी किवदंतियों और इसके अविजित होने के रहस्य से अब पर्दा उठने लगा है।

विज्ञापन


वैज्ञानिकों और पर्वतारोहियों की राय में इस पर्वत की जटिल संरचना और यहां का भौगोलिक वातावरण ही इसे अजेय बनाता है। सन् 1968 में भारत-जापानी महिलाओं के एक दल ने नंदिनी पटेल की अगुवाई में मणिमहेश पर्वत पर चढ़ने करने की कोशिश की थी।
विज्ञापन


लेकिन अचानक भूस्खलन शुरू हो गया, जिसकी वजह से कुछ लोगों की मौत हो गई, बाकी के लोग मुश्किल से जान बचा पाए। इटली के दल ने भी सन् 1965 में चढ़ाई की कोशिश की, लेकिन खराब मौसम की वजह से यह अभियान भी कामयाब नहीं हो पाया।

विज्ञापन
विज्ञापन

आज तक जो भी चढ़ा, जिंदा नहीं बच पाया

 Nobody climbs Manimahesh mountain.
वैज्ञानिकों और पर्वतारोहियों के मुताबिक मणिमहेश की विशेष संरचना पर्वतारोहण के प्रतिकूल है। - फोटो : अमर उजाला

मणिमहेश के पुजारी विजय ने बताया कि सन् 2000 में संचूई के तीन युवकों ने भी मणिमहेश पर्वत पर चढ़ने की कोशिश की थी, लेकिन वे जिंदा नहीं बच पाए। इसके बाद फिर किसी ने यहां चढ़ने की कोशिश नहीं की।

वैज्ञानिकों और पर्वतारोहियों के मुताबिक मणिमहेश की विशेष संरचना पर्वतारोहण के प्रतिकूल है। हिमालयन ट्रैवलिंग एजेंसी संचालक व अनुभवी पर्वतारोही सरवण पड़धनिया ने बताया कि बर्फ के नीचे दबी चट्टानें बहुत नाजुक हैं।

दिन में कई बार यहां भूस्खलन होना आम बात है। आज तक यहां पर किसी के चढ़ने की पुष्टि नहीं हुई है। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय में जियोग्रॉफी विभाग के प्रोफेसर भूपिंद्र सिंह ने बताया कि मणिमहेश हिमालय पर्वत का ही भाग है।

इसका निर्माण सेडीमेंटरी रॉक्स यानि अवसादी शैल से हुआ है जो टेक्टोनिकप्लेट के टकराने से पृथ्वी की सतह से बाहर निकली है। बाहरी बलों के प्रभाव में आने से ये चट्टानें बेहद कमजोर हो चुकी हैं। इसी वजह से इन पर चढ़ पाना संभव नहीं है।

 Nobody climbs Manimahesh mountain.
‘मणिमहेश पर्वत की चटटानों पर बिना किसी विशेष सहायता के पकड़ नहीं बनाई जा सकती है, इसी वजह से चढ़ाई काफी मुश्किल है

‘धार्मिक मान्यताओं और मौजूदा भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए पर्वतारोहण की दिशा में कोई निर्णय लिया जा सकता है। फिलहाल, किसी भी पर्वतारोही दल की ओर से मणिमहेश कैलाश पर्वत पर चढ़ने का आवेदन नहीं प्राप्त हुआ है।’
- विनय धीमान (एडीएम भरमौर और मणिमहेश न्यास के ट्रस्टी)

‘मणिमहेश पर्वत की चटटानों पर बिना किसी विशेष सहायता के पकड़ नहीं बनाई जा सकती है, इसी वजह से चढ़ाई काफी मुश्किल है। मणिमहेश पर्वत का सधा आकार भी पर्वतारोहण में दिक्कतें पैदा करता है।’
- डॉ. सुशील (वरिष्ठ वैज्ञानिक, वाड़िया हिमालय भू-विज्ञान संस्थान)
 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed