डॉक्टर की बड़ी लापरवाही, देना होगा 13 लाख हर्जाना
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राष्ट्रीय उपभोक्ता आयोग नई दिल्ली ने निजी चिकित्सक के मेडिकल नेगलिजेंस (लापरवाही) पर उपभोक्ता के पक्ष में 13,26,286 रुपये हर्जाना राशि नौ प्रतिशत ब्याज सहित देने का फैसला सुनाया है। चिकित्सक और बीमा कंपनी को 3,30,572 रुपये संयुक्त और अलग-अलग रूप से भी देने होंगे।
उन्हें उपभोक्ता को 20,000 रुपये शिकायत व्यय भी देना होगा। राष्ट्रीय उपभोक्ता आयोग नई दिल्ली के अध्यक्ष वीके जैन और सदस्य डा. बीसी गुप्ता ने कुल्लू जिला के रामशिला (अखाड़ा) निवासी यादविंद्र के पक्ष में राज्य उपभोक्ता आयोग शिमला के फैसले को बरकरार रखा। कुल्लू के कलेहली (बजौरा) स्थित एसआर हॉस्पिटल के मालिक डा. आरएम गौतम की अपील को निरस्त कर दिया।
बिना टेस्ट किए कर दी सर्जरी
इस मामले के तथ्यों के अनुसार कुल्लू में बतौर एडवोकेट कार्य कर रहीं ज्योति डोगरा ने वर्ष 2006 में अधिवक्ता अरविंद शर्मा के माध्यम से राज्य उपभोक्ता आयोग में शिकायत दायर की थी। उन्होंने पेट में दर्द होने के कारण कुल्लू अस्पताल में महिला रोग विशेषज्ञ सुमेध कौल के पास परीक्षण करवाया।
उन्होंने राय दी कि यह कैंसर से संबंधित लक्षण हो सकते हैं। इसके बाद अंजना नारू के क्लीनिक में चेक करवाया। उन्होंने भी यह संदेह जताया। ऐसे में शिकायतकर्ता ने डा. आरएम गौतम अस्पताल में राय जाननी चाही। कहा गया कि छोटी सी सर्जरी होगी। डा. गौतम ने उसी दिन 25 मार्च, 2004 को ज्योति डोगरा की सर्जरी कोई टेस्ट करवाए बगैर कर दी।
पीजीआई में भी इलाज हुआ लेकिन नहीं बच पाई ज्योति
सर्जरी उन्होंने बिना एनस्थीसिया से कर दी। सर्जरी के दौरान चिकित्सक ने उनकी यूट्रेस, ओवरिस, फालोपाइन ट्यूब्स और यूरेटियरस को काटकर निकाल दिया। ऑपरेशन के बाद पेशाब के लिए कोई जगह न होने से पेट में दो जगह छेद किए। सर्जरी से उनकी हालत खराब हो गई। उन्हें पीजीआई चंडीगढ़ ले जाना पड़ा। यहां यूरोलॉजी विभाग अध्यक्ष डा. एके मंडल ने उनका इलाज किया। उन्होंने कहा कि कैंसर का चरण देखे बगैर रोगी की सर्जरी नहीं की जानी चाहिए थी।
ज्योति को उपचार के लिए कई बार पीजीआई में दाखिल होना पड़ा। उन्होंने राज्य उपभोक्ता आयोग में डा. गौतम के खिलाफ मेडिकल नेगलिजेंस की शिकायत की। सुनवाई के दौरान सात फरवरी, 2008 को ज्योति का देहांत हो गया। इसके बाद उनके पुत्र नवक्षितिज की ओर से उनके पिता यादविंद्र ने शिकायत की पैरवी जारी रखी। आयोग ने कहा कि मामले में शिकायतकर्ता की ओर से पीजीआई के डा. मंडल और डा. फिरोजा पटेल के बयान दर्ज किए गए हैं। मामले के रिकार्ड से डा. गौतम पर मेडिकल नेगलिजेंस और रोगी के केस को ठीक ढंग से नहीं संभालने के आरोप साबित हुए हैं।