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इस वैज्ञानिक ने न्यूटन के नियम को ठहराया गलत, बदलेगा 311 वर्ष पुराना विज्ञान

Fri, 09 Dec 2016 08:59 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला Updated Fri, 09 Dec 2016 08:59 AM IST
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National Academy Of Sciences Research On Newton's Laws Challenged By Scientist Ajay Sharma

हिमाचल के भौतिक विज्ञानी अजय शर्मा के दावे की परख अब केंद्रीय विज्ञान एवं पर्यावरण मंत्रालय की एजेंसी नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज (एनएएसआई) करेगी। भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के साइंटिस्ट डी गौरव ने अजय शर्मा के पत्र को एनएएसआई को भेज दिया है।

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अजय शर्मा ने केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय को एक पत्र लिखा था, जिसके मुताबिक नासा की इगलवर्क्स लैबोरेटरी हाउसटन अमेरिका के प्रयोगों में अजय शर्मा की 34 वर्ष पुराने रिसर्च की एक तरह से पुष्टि हुई है। अजय शर्मा ने बताया कि अभी तक ये माना जाता था कि जब आतिशबाजी को आग लगाई जाती है, तो गैसें और धुआं पीछे निकलता है।
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आतिशबाजी आगे जाती है। इसे क्रिया मानते हैं तो प्रतिक्रिया के रूप में धुआं पीछे जाता है। इस तरह क्रिया और प्रतिक्रिया बराबर होती है। इसलिए न्यूटन का 311 वर्ष पुराना नियम सही है।
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अंतरिक्ष में जाने वाले स्पेसक्राफ्ट का भी यही सिद्धांत है। अजय शर्मा के अनुसार प्रतिक्रिया क्रिया से कम या ज्यादा भी हो सकती है। न्यूटन ने गति का तीसरा नियम अपनी पुस्तक प्रिंसीपिया (1687) के पृष्ठ संख्या 19-20 पर दिया है।

न्यूटन के तीसरे नियम पर वैज्ञानिक अजय का तर्क

National Academy Of Sciences Research On Newton's Laws Challenged By Scientist Ajay Sharma

तीसरे नियम के अनुसार वस्तु की प्रकृति और संरचना पूरी तरह महत्वहीन और निरर्थक है। यह वस्तु की प्रकृति और संरचना की अनदेखी करता है। इसलिए इसे संशोधित किया गया है। 2000 में ब्रिटिश वैज्ञानिक रोजर शायर ने मत दिया कि स्पेसक्राफ्ट को को बिना ठोस या तरल ईंधन के भी अंतरिक्ष में छोड़ा जा सकता है।

यहां हम ईंधन की जगह इलेक्ट्रॉनिक मैगनेटिक वेवज का प्रयोग इंजन में कर सकते हैं। इन्हीं वेवज की वजह से स्पेसक्रफ्ट आगे बढ़ेगा। इस अवस्था में धुआं और गैसें पीछे नहीं निकलेंगी। इस तरह कोई प्रतिक्रिया नहीं होगी। परिणामस्वरूप न्यूटन की गति का तीसरा नियम गलत होगा। इसीलिए वैज्ञानिकों ने रोजर शायर की शोध की ओर ध्यान नहीं दिया, क्योंकि न्यूटन को वैज्ञानिक किसी भी सूरत में गलत नहीं मान सकते थे।

नासा की एडवांसड प्रोपलसन  फिजिक्स रिसर्च लैबोरेटरी हाऊसटन अमेरिका ने रोजर शायर के दावे को परखने का बीड़ा उठाया। वैज्ञानिक ने नया इंजन टारसन पैंडुलम पर लगाया। प्रयोग में सुस्पष्ट बल (थरस्ट) 1.2 मिली न्यूटन एवं किलोवाट पाया गया। ये बल महत्वपूर्ण है। रोजर शायर का दावा सही पाया गया। इस तरह प्रयोग में क्रिया तो है पर प्रतिक्रिया नहीं है।

1998 में न्यूटन के तीसरे नियम को ठहराया गलत

National Academy Of Sciences Research On Newton's Laws Challenged By Scientist Ajay Sharma

यही न्यूटन का तीसरा नियम गलत साबित होता है। न्यूटन के नियम के अनुसार क्रिया और प्रतिक्रिया बराबर होनी चाहिए थी। अजय शर्मा ने 1998 में ‘एक्टा सिनेसिया इडिका’ नामक जरनल में न्यूटन के तीसरे नियम को गलत ठहरा कर उसे संशोधित किया। संशोधित नियम के अनुसार प्रतिक्रिया क्रिया से कम या ज्यादा भी हो सकती है। 

नासा की लैबोरेटरी के प्रयोग में प्रतिक्रिया कम या शून्य पाई गई। इसी तरह अजय शर्मा के संशोधित नियम की पुष्टि होती है। इतना ही नहीं अजय शर्मा ने कैंब्रिज इंग्लैंड से प्रकाशित पुस्तक ‘बियोड न्यूटन एंड आर्किमिडीज’  के दो अध्यायों में न्यूटन के तीसरे नियम के

संशोधित रूप की विस्तृत व्याख्या की है। पुस्तक के पृष्ठ 315 पर स्पष्ट लिखा है कि न्यूटन का तीसरा नियम राकेट या स्पेसक्राफ्ट  में बिना गणित के तर्कों के ही सही माना जा रहा है। अजय शर्मा ने कहा कि जिस तरह से उनके इस दावे की जांच हो रही है, उसके उनके प्रयासों को एक दिशा मिलेगी।

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