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नारकंडा नेचर कैंप बंद, जांच की आंच से अफसर कांपे
ब्यूरो/अमर उजाला, रामपुर बुशहर
Updated Sat, 11 Jun 2016 10:54 AM IST
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शिमला के नारकंडा में वर्ष 2006 से चल रहे नेचर कैंप को बंद कर दिया गया है।
- फोटो : अमर उजाला
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शिमला के नारकंडा में वर्ष 2006 से चल रहे नेचर कैंप को बंद कर दिया गया है। वीरवार को कैंप पर पेड़ गिरने से जालंधर से आए दो पर्यटकों की मौत के बाद यह फैसला लिया गया है। हादसे की छानबीन के लिए जांच कमेटी बनाई गई है। जांच की आंच से कई अफसरों के हाथ पांव फूल गए हैं।
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राज्य वन निगम के प्रबंध निदेशक ललित मोहन ने नेचर कैंप को आगामी आदेशों तक बंद करने के लिखित आदेश दिए हैं। नेचर कैंप के प्रभारी और सहायक प्रबंधक एचआर कश्यप ने कैंप को आगामी आदेशों तक बंद रखने की पुष्टि की है। रामपुर से 65 किलोमीटर दूर नारकंडा में नौ साल से नेचर कैंप को वन निगम चला रहा है।
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पेड़ गिरने के मामले में वन विभाग और निगम के अधिकारी जवाबदेही से बचने की जुगत में हैं। पेड़ गिरने के बाद खोखला और उम्र दराज पाए जाने की सूचना है। नेचर कैंप में देखरेख कर रहे लोगों को पेड़ खोखला होने की कोई जानकारी नहीं थी या फिर कोई अन्य बात है। हादसे के कारणों की परतें जांच में ही खुलेंगी।
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बशर्ते विभाग के अफसर निष्पक्षता से जांच करें। कोई भी अधिकारी विभाग की कोताही मानने को तैयार नहीं है। जबकि नेचर कैंप की व्यवस्था में कई खोट रहे हैं। यहां तक की कैंप में अधिकारियों का आना-जाना भी कभी कभार ही रहा है। मात्र औपचारिकता पूरी की जा रही थी।
सूत्रों के अनुसार कैंप में अन्य सुरक्षा नियमों की अनदेखी की गई है। नेचर कैंप में जंगली जानवरों के कैंप में आने का भय भी बराबर बना रहता है। कैंप के चारों और कांटेदार तारों की फेंसिंग तक नहीं है। जो तारें हैं उनको अच्छी तरह से लकड़ी के खंभों पर नहीं रखा गया है।
वन निगम शिमला के डीएम सतीश नेगी ने बताया कि कैंप में सुरक्षा इंतजाम में कोई कसर नहीं छोड़ी गई है। सभी प्रकार की जांच के लिए एक कमेटी का गठन कर दिया गया है। कैंप को आगामी आदेशों तक बंद रखने के निर्देश दे दिए गए हैं। हादसे की मुख्य वजह तूफान माना जा रहा है। कमेटी के अधिकारी सारी जांच करेंगे और भविष्य के लिए अन्य कमियों को पूरा करने का प्रयास किया जाएगा। फेंसिंग को ठीक किया जाएगा।
प्रशासन ने दी फौरी राहत
कुमारसैन के तहसीलदार डीएस कौशल ने नेचर कैंप हादसे के मृतकों के परिजनों को 20-20 हजार रुपये की फौरी राहत दी। परिजनों को किसी तरह की परेशानी न हो इसके लिए प्रशासन ने हर संभव प्रयास किए।