वाद-विवाद प्रतियोगिताः मंडी में संघवाद के पक्ष और विपक्ष में खुलकर बोले वक्ता
हिमाचल के मंडी आईटीआई में अमर उजाला के सह संस्थापक मुरारी लाल माहेश्वरी राष्ट्रीय स्मृति वाद-विवाद प्रतियोगिता विचार प्रवाह का आयोजन किया गया। इसमें शिमला मंडल से कोटशेरा कॉलेज के प्रांशु आदित्य और विवेक ने बाजी मारी। प्रतियोगिता का विषय था ‘संघवाद सशक्त राष्ट्र के लिए अनिवार्य है’। सभी प्रतिभागियों ने विषय के पक्ष और विपक्ष में तार्किक तरीके से अपनी बात रखी। प्रदेश के कृषि मंत्री डॉ. रामलाल मारकंडा ने बतौर मुख्य अतिथि हिस्सा लेकर विजेताओं को सम्मानित किया।
प्रथम, द्वितीय और तृतीय स्थान पाने वालों को क्रमश: 11000, 7500 और 5000 रुपये और सांत्वना पुरस्कार में 3-3 हजार रुपये के चेक प्रदान किए गए। प्रतियोगिता विचार प्रवाह में दिल्ली के केजरीवाल से लेकर बंगाल की ममता सरकार पर तर्क और वितर्क का दौर चला। वक्ताओं ने संघवाद विषय पर केजरीवाल की दिल्ली, पश्चिमी बंगाल की ममता बनर्जी पर निशाना साधा। पक्ष में तर्क दिया गया कि विपक्ष की राज्य सरकारें केंद्र की कल्याणकारी योजनाओं को जनता तक नहीं पहुंचा रही हैं। वितर्क दिया गया कि केंद्र सरकार विपक्ष की सरकारों के साथ भेदभाव पूर्ण रवैया अपनाती है।
महाराष्ट्र से लेकर असम के बोडोलैंड तक संघवाद के समर्थन में उतरे पक्षधरों पर चोट की। इस दौरान अमेरिका, साउथ अफ्रीका जैसे एकात्मक शासन प्रणाली के उदाहरण को शिक्षा, स्वास्थ्य और प्रति व्यक्ति आय के साथ जोड़ विपक्ष ने तर्क मजबूत किया। वहीं संघवाद में कानूनी मूल्यों का ह्रास करार देते हुए कुछ वक्ताओं ने यह तक कह डाला संघवाद में सीबीआई को भी बंधक बना लिया जाता है। इस दौरान शायरी में पक्ष और विपक्ष ने एक दूसरे पर जमकर कटाक्ष किया और तंज कसे।
मिलिए निर्णायक मंडल से
डॉ. विजय विशाल सेवानिवृत्त प्रवक्ता हैं। हिंदी में एमफिल और पीएचडी की है। इसके अलावा इतिहास विषयों में एमए की डिग्री प्राप्त की है। मंडी के चैलचौक से संबंध रखने वाले डॉ. विजय विशाल जाने माने साहित्यकार और समीक्षक भी हैं।
कृष्ण चंद महादेविया सुंदरनगर निवासी हैं। हिंदी, पहाड़ी में करीब सात पुस्तकें लिख चुके हैं। इनकी कविताएं, लघु कथाएं राष्ट्रीय स्तर पर चर्चित हैं। ग्रामीण रंगमंच से जुड़कर निर्देशन, अभिनय में सक्रिय हैं। लघुु कथाओं का विभिन्न भाषाओं में भी अनुवाद कर चुके हैं।
डॉ. हेत राम ठाकुर वल्लभ कॉलेज मंडी में राजनीतिक शास्त्र के सहायक प्रोफेसर हैं। 17 साल से अध्यापन में कार्यरत हैं। मानव अधिकारों में विशेष रुचि है। मंडी के सराज से किसान परिवार से संबंध रखते हैं। वे प्रदेश विवि में भी सेवाएं दे चुके हैं।
जानिए संघवाद पर किसने क्या कहा
पक्ष
संघवाद सशक्त देश के लिए अनिवार्य इसलिए है कि शक्तियों का विकेंद्रीयकरण हर राज्य के लिए किया जाता है। राज्य सरकारों को स्वतंत्र निर्णय लेने का अधिकार दिया गया है। उन्होंने कहा कि संघवाद राज्यों का संठनात्मक रूप है। जिसमें राष्ट्रीय मुद्दे केंद्रीयकृत और राज्य के मुद्दे विकेंद्रीयकृत किए जाते हैं।
प्रांशु आदित्य, प्रथम विजेता, शिमला मंडल, कोटशेरा कॉलेज
विपक्ष
संघवाद के कारण शासकीय ढांचा गड़बड़ाता है। लोग जातिवाद, क्षेत्रवाद और भाषा वाद में बंट जाते हैैं। एकीय शासन प्रणाली में सबको एक समान मौका मिलता है। सभी को एक समान सुविधाएं और अधिकार प्राप्त होते हैं। असम में बोडो लैंड की मांग उसी देश की एकता पर दंगों से चोट करती है।
विवेक, प्रथम विजेता, शिमला मंडल, कोटशेरा कॉलेज।
पक्ष
संघीय शासन प्रणाली आवश्यक है। यह वह प्रणाली है, जिससे कोई भी देश विकासशील बनता है। बिना संघीय शासन प्रणाली से तानाशाही को बढ़ावा मिलता है। संघीय प्रणाली भारत को एक टुकड़ों में नहीं बल्कि राष्ट में परिवर्तित करती है।
खुशबू , उपविजेता, कांगड़ा मंडल के विक्रम बतरा कॉलेज।
विपक्ष
संघीय ढांचा देश की एकता और अखंडता को छिन्न- भिन्न करता है। गांव और शहर के मुद्दे गौण हो जाते हैं। दिल्ली का चुनाव इसका उदाहरण है। एकात्मक आर्थिक अर्थव्यवस्था वाला देश विकास के नए आयाम स्थापित करता है।
मुस्कान, उपविजेता, कांगड़ा मंडल के विक्रम बतरा कॉलेज ।
पक्ष
सशक्त देश के निर्माण के लिए संघवाद जरूरी है। इस व्यवस्था से अलग-अलग धर्मों सामाजिक और सांस्कृतिक विविधता होने पर भी पूरा देश एक माला में पिरोया हुआ है। संविधान निर्माताओं ने भारत की वृहद स्थिति को देखते हुए इसे संघीय देश बनाने का फैसला लिया। ताकि आम आदमी तक जहां विकास पहुंच सके। वहीं, देश में एकता भी बनी रह सके।
रश्मी, कांगड़ा मंडल से तृतीय विजेता बनीखेत कॉलेज।
विपक्ष
संघवाद देश की एकता, अखंडता और राष्ट्रवाद को छिन्न भिन्न करता है। राज्यों के राज्यपाल पद भी संघीय ढांचे के विपरीत हैं। संघवाद होने के कारण पिछले तीन सालों में देश में विभिन्न राज्यों में दंगे बढ़े हैं। पश्चिम बंगाल में दंगों में साल दर साल बढ़ोतरी होती जा रही है। देश में एकात्मक शासन प्रणाली होने से कानून को प्रभावी ढंग से लागू कर इन्हें रोका जा सकता है।
भावना शर्मा, कांगड़ा मंडल से शाहपुर कॉलेज की तृतीय विजेता।
पक्ष
केंद्र और राज्यों में आपसी तालमेल और शक्तियों का वितरण होना संघवाद का नतीजा है। इससे गांव से लेकर शहर तक समग्र विकास होता है। जब तक गांव के हर व्यक्ति तक शक्तियां नहीं पहुंचेंगी। देश सशक्त नहीं हो सकता। यह केवल संघवाद के कारण ही संभव हो सकता है।
गौरव, मंडी मंडल, घुमारवीं कॉलेज
विपक्ष
संघवाद के कारण शासकीय ढांचा गड़बड़ाता है। संघवाद में तो सीबीआई को भी बंधक बना लिया जाता है और भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने के लिए प्रदेश के डीजीपी के साथ सीएम भी भूख हड़ताल पर बैठ जाते हैं। अगर एकात्मक शासन प्रणाली हो तो ऐसे मामले सामने नहीं आते।
रजनीश, मंडी मंडल, बिलासपुर कॉलेज
पक्ष
लोकतंत्र की नींव का पत्थर संघवाद है। छोटी- छोटी इकाइयां राष्ट्र का निर्माण करती हैं। लिखित संविधान ही संघवाद है। स्वतंत्रता हर व्यक्ति के लिए जरूरी है। अन्यथा सोवियत संघ की तरह हश्र होता है। अधिकारों से कानूनी कर्त्तव्यों तक संविधान लिखा गया है। तभी संघवाद है।
सरोज, मंडी मंडल, बासा कॉलेज।
विपक्ष
दोहरी नागरिकता का फैलाया गया जाल संघीय राष्ट्रों का है। हाल बेहाल भारत अल्प संघात्मक है। केंद्र और राज्यों में शक्तियों का वितरण और आपसी तालमेल न होना संघवाद का ही नतीजा है। अगर देश में एकात्मक शासन प्रणाली होती तो इन शक्तियों का विकेंद्रीयकरण नहीं होता।
दमयंती, मंडी मंडल, वल्लभ कॉलेज मंडी।
पक्ष
संघवाद है तो लोकतंत्र है। लोकतंत्र है, तो अच्छे व्यक्तित्व वाले राजनेता को चुनना आवश्यक है। संघवाद लागू होने से देश में आजादी के बाद राजा और रंक सबको एक समान अधिकार मिला। इससे लोकतंत्र को मजबूती मिलती है। देश का विकास सुनिश्चित होता है।
रितांशु, शिमला मंडल, सोलन डिग्री कॉलेज
विपक्ष
एकात्मक शासन प्रणाली अपनाना आवश्यक है। ताकि, एक कानून और एकात्मक शासन प्रणाली से सबको एक समान अधिमान मिल सके। संघवाद में जनता की ओर से चुने हुए नेता ही जनता का शोषण करते हैं। जो संघवाद देश के संविधान की धज्जियां उड़ाता हो, उससे देश हित में कार्य करने की अपेक्षा नहीं की जाती है।
शैवी, शिमला मंडल, नालागढ़ कॉलेज।
स्वस्थ लोकतंत्र के लिए वाद-विवाद जरूरी: मारकंडा
मुख्य अतिथि कृषि मंत्री डॉ. रामलाल मारकंडा ने कहा कि लोकतंत्र में वाद-विवाद का होना जरूरी है। इससे जहां एक दूसरों की कमियों का पता चलता है, वहीं उन्हें सुधारने का भी मौका मिलता है। उन्होंने कहा कि अमर उजाला इस तरह के मंच से युवाओं को भावनाओं को व्यक्त करने का मौका मिल रहा है। कोई भी विद्वान हो सकता है, लेकिन जब तक वह अपनी भावनाओं को सही तरीके से व्यक्त न कर पाए, उसकी प्रतिभा उजागर नही हो सकती।
एक अच्छा वक्ता अपनी बात को प्रभावी ढंग से सामने रख दूसरों को प्रभावित करता है। वर्तमान समय में वाद-विवाद जैसी प्रतियोगिताएं युवाओं में अपनी बात रखने का साहस प्रदान करनी है। अमर उजाला को इस मुहिम को जारी रखना चाहिए। इसके लिए सरकार भी पूरा सहयोग करेगी।