Himachal News: नगर निगम महापौर-उपमहापौर चुनाव में विधायक डाल सकेंगे वोट, सरकार ने जारी किए आदेश
हिमाचल प्रदेश में पांच नगर निगम हैं। ये नगर निगम शिमला, धर्मशाला, पालमपुर, मंडी और सोलन हैं। नगर निगम शिमला में पहले ही चुनाव हो चुके हैं।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
हिमाचल प्रदेश में अब नगर निगम की परिधि में आने वाले विधायक महापौर और उपमहापौर के चुनाव में वोट डाल सकेंगे। प्रदेश सरकार ने नगर निगम एक्ट 1994 की धारा 4 में संशोधन करने के बाद यह व्यवस्था की है। आवश्यक वैधानिक कार्यवाही के बाद विधि विभाग ने इस व्यवस्था को मंजूरी दे दी है। प्रदेश सरकार ने संबंधित उपायुक्तों को इस बारे में आदेश भेज दिए हैं। हिमाचल प्रदेश में पांच नगर निगम हैं। ये नगर निगम शिमला, धर्मशाला, पालमपुर, मंडी और सोलन हैं।
नगर निगम शिमला में पहले ही चुनाव हो चुके हैं। अब अन्य चारों नगर निगमों में महापौर और उपमहापौर के चुनाव होने हैं। पालमपुर और मंडी नगर निगम के महापौर और उपमहापौर के चुनाव की तिथि पहले घोषित हो चुकी है। मंडी नगर निगम में 25, पालमपुर नगर निगम में महापौर और उपमहापौर का चुनाव 24 नवंबर को चुनाव होना हैं। वहीं, सोलन और धर्मशाला में चुनाव की तारीख अभी तय नहीं हुई है।
विधायक कर रहे थे वोट के अधिकार की मांगनगर निगम की परिधि में आने वाले विधायकों ने वोटिंग के अधिकार की मांग की थी। इनका तर्क था कि नगर परिषद और नगर निकाय में उन्हें मताधिकार हैं। ऐसे में उन्हें नगर निगम में यह अधिकार मिलने चाहिए। इसके बाद शहरी विकास विभाग ने मामला सरकार को भेजा था। सरकार ने इसमें विधि विभाग की राय मांगी। विधि विभाग ने अधिनियम में मताधिकार न होने का हवाला दिया। अब सरकार ने एक्ट में संशोधन कर विधायकों को मतदान का अधिकार दे दिया है।
नगर निगम में विधायकों को वोटिंग अधिकार लोकतंत्र की हत्या : भाजपा
भाजपा प्रवक्ता राकेश जम्वाल ने कहा है कि प्रदेश की वर्तमान कांग्रेस सरकार लोकतंत्र की हत्या करने पर आ गई है। नगर निगम के मेयर और डिप्टी मेयर के चुनाव को प्रभावित करने के लिए कांग्रेस की सरकार ने जीते हुए विधायकों को नगर निगम की चुनाव प्रक्रिया में मताधिकार दे दिए हैं। ऐसा हिमाचल प्रदेश में आज से पहले कभी नहीं हुआ। जम्वाल ने कहा कि लोकतंत्र की हत्या करना कांग्रेस की पुरानी आदत है। उन्होंने कहा कि जब नगर निगम के महापौर और उप महापौर के चुनाव की घोषणा हो चुकी है तो चुनाव प्रक्रिया के बीच में ऐसी अधिसूचना कैसे जारी हो सकती है।
आज से पहले तो कभी ऐसा हुआ नहीं। उन्होंने कहा कि इस अधिसूचना को जारी करने के पीछे कांग्रेस सरकार का डर भी साफ प्रतीत होता है और मंशा भी है। डर इसलिए क्योंकि नगर निगम में उनको लगता है कि आपसी अंतर्कलह के कारण वह हार का सामना कर सकते हैं और मंशा यह कि चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित करते हुए गलत रूप से अपने मेयर और डिप्टी मेयर का चयन करना चाहते हैं।