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लोकसभा में गूंजा रोहतांग का मामला, सरकार पर उठे सवाल

Wed, 11 May 2016 12:01 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला Updated Wed, 11 May 2016 12:01 AM IST
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MP Ramswroop Sharma statement on rohtang at loksabha.
हिमाचल सरकार ने एनजीटी के समक्ष मजबूती से अपना पक्ष नहीं रखा है, जिसका खामियाजा मनाली व रोहतांग की जनता को झेलना पड़ रहा है। - फोटो : अमर उजाला

भाजपा सांसद राम स्वरूप ने मंगलवार को शून्य प्रश्नकाल के दौरान लोकसभा में कहा कि जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों की रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि रोहतांग ग्लेशियर नहीं, स्नो लाइन है। यह ईको सेंसटिव जोन नहीं है। गुलाबा के ऊपर इकोलॉजी नहीं रही है।

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रोहतांग के नजदीक अगर कोई ग्लेशियर है तो उस ग्लेशियर को हामता कहा गया है। इस बात को एनजीटी ने भी स्वीकार कर लिया है। उन्होंने कहा कि हिमाचल सरकार ने एनजीटी के समक्ष मजबूती से अपना पक्ष नहीं रखा है, जिसका खामियाजा मनाली व रोहतांग की जनता को झेलना पड़ रहा है।
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उन्होंने भारत सरकार से इस मामले को सुप्रीम कोर्ट में उठाने की मांग की ताकि रोहतांग में पर्यटकों और स्थानीय व्यवसायियों को परेशानियों का सामना न करना पड़े। उन्होंने कहा कि हिमाचल सरकार ने बहुत विलंब के उपरांत एनजीटी में जनता का अधूरा पक्ष रखा, जिसका असर कारोबारियों और पर्यटकों पर पड़ा है।

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एनजीटी ने लगा दिया था प्रतिबंध

MP Ramswroop Sharma statement on rohtang at loksabha.
रोहतांग दर्रा

एनजीटी ने 6 जुलाई 2015 के आदेश अनुसार रोहतांग दर्रा व उसके आसपास पर्यटक कार्यकलापों पर प्रतिबंध लगा दिया। इसमें स्नो स्कूटर, टैक्सी, घुड़सवारी, पैराग्लाइडिंग, ढाबा, खोखा, रेहड़ी और खानपान की दुकानों पर प्रतिबंध लगा दिया गया था लेकिन पिछले कल 9 मई 2016 के एनजीटी फैसले ने इन लोगों को 12 मई तक कुछ राहत प्रदान की है।

ऐसा आदेश आज तक हिमाचल के अलावा अन्य किसी भी राज्य में लागू नहीं किया गया है। उन्होंने भारत सरकार की विभिन्न मंत्रालयों से आग्रह किया कि मनाली के विधायक व अन्य जनप्रतिनिधि ने सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी दायर की है। भारत सरकार मनाली रोहतांग का पक्ष वैज्ञानिक आधार पर सर्वोच्च न्यायालय में रखे ताकि मनाली व रोहतांग वासियों व देश-विदेश से आए पर्यटक रोहतांग दर्रा में पहले की तरह लुप्त उठा सकें।

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