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शिमला: कोरोना के कारण नाबार्ड में फंसीं 30 से ज्यादा योजनाएं
Thu, 01 Jul 2021 10:08 AM IST
Krishan Singh
अमर उजाला नेटवर्क, शिमला
अमर उजाला नेटवर्क, शिमला
Published by: Krishan Singh
Updated Thu, 01 Jul 2021 10:08 AM IST
सार
नाबार्ड से इन योजनाओं के लिए वित्तपोषण के लिए सरकार को सस्ते ब्याज पर कर्ज मिलता है। ये विधायक प्राथमिकता के तहत मंजूर की जाती हैं।
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सड़क(सांकेतिक)
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
कोविड-19 के कारण 30 से ज्यादा योजनाएं नाबार्ड में फंस गई हैं। इस वित्तीय वर्ष में सड़कों, पीने के पानी और सिंचाई की एक भी योजना मंजूर नहीं हुई है। मई या जून महीने तक मंजूर योजनाओं की पहली सूची आ जाती थी, इस बार नहीं आई है। ये स्कीमें कोरोना वायरस के संक्रमण के कारण हालात सामान्य नहीं होने के कारण फंसी पड़ी हैं। नाबार्ड से इन योजनाओं के लिए वित्तपोषण के लिए सरकार को सस्ते ब्याज पर कर्ज मिलता है। ये विधायक प्राथमिकता के तहत मंजूर की जाती हैं।
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ये ग्रामीण आधारभूत ढांचा विकास फंड (आरआईडीएफ) में वित्तपोषित की जाती हैं। विधायकों की ओर इन योजनाओं के प्रस्ताव बजट बुक में शामिल किए जाते हैं। इनके लिए शुरू में टोकन बजट का प्रावधान किया जाता है। बाद में इनकी विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार कर नाबार्ड को वित्तपोषण के लिए भेजी जाती हैं। समय पर मंजूरी आने के बाद इनका धरातल पर भी काम शुरू हो जाता है। राज्य सरकार के वित्त विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि कोविड की वजह से न तो पिछले वर्ष और न ही इस साल ये योजनाएं समय पर वित्तपोषण के लिए राज्य सरकार को समय पर आ पाई हैं। आम तौर पर मंजूर योजनाओं की पहली सूची मई और जून महीने तक आ जाती थी।
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