जनरल जोरावर सिंह की प्रतिमा पर लिख दिया गलत इतिहास
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स्मार्ट सिटी धर्मशाला में लगी महान सपूत एवं वीर योद्धा जनरल जोरावर सिंह की प्रतिमा पर गलत जानकारी अंकित की गई है। इस प्रतिमा पर जोरावर सिंह का गांव और जिला गलत बताए गए हैं, जिसे शहीद स्मारक और युद्ध संग्रहालय के मुख्य गेट पर लगी प्रतिमा में सभी पर्यटक पढ़ रहे हैं।
प्रतिमा पर जोरावर सिंह का गांव कहलूर और जिला बिलासपुर बताया गया है, जबकि वह हमीरपुर जिला की नादौन तहसील के अन्सरा गांव के रहने वाले थे। वीर योद्धा के बारे में गलत जानकारी देने के मामले में जिला प्रशासन और प्रदेश सरकार का रवैया भी उदासीन बना हुआ है।
ऐसे में गलती सुधारने में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई जा रही। प्रतिमा पर जो जानकारी लिखी गई है, वह विकीपीडिया से ली गई है। विकीपीडिया में भी जोरावर सिंह के गांव व जिला के बारे में दी गई जानकारी पूरी तरह से गलत है।
इसलिए जोरावर सिंह के साथ जुड़ता है कहलूरी
जनरल जोरावर सिंह के पिता हरजे सिंह ठाकुर कहलूर रियासत के दरबारी थे। कहलूर रियासत से जम्मू-कश्मीर के राजा गुलाब सिंह के परिवार की एक राजकुमारी का विवाह हुआ था। इसे कहलूरी रानी कहा जाता था। जोरावर सिंह उस कहलूरी रानी को बहन कहते थे। इस कारण उनके नाम के साथ भी कहलूरी जुड़ता है।
सैनिक कल्याण विभाग के निदेशक ब्रिगेडियर सुरेश कुमार ने कहा कि युद्ध संग्रहालय के बाहर स्थापित जोरावर सिंह की प्रतिमा पर लिखी जानकारी जिला प्रशासन कांगड़ा की समिति के माध्यम से लगाई गई है। इसके बारे में वही बता सकते हैं।
जरनल जोरावर सिंह के इतिहास पर पीएचडी करने वाले डॉ. राकेश कुमार ने कहा कि राजस्व रिकार्ड में जोरावर सिंह का गांव अन्सरा है, जो तत्कालीन हमीरपुर तहसील और जिला कांगड़ा में आता था। जोरावर सिंह को मूल रूप से बिलासपुर जिला के कहलूर गांव का निवासी बताना पूरी तरह गलत है।