15 हजार सरकारी स्कूलों में इस दिन नहीं पकेगा दोपहर का भोजन
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प्रदेश के 15 हजार से अधिक सरकारी स्कूलों में इस दिन दोपहर का खाना नहीं पकेगा। मानदेय बढ़ोतरी की मांग को लेकर मिड डे मील वर्कर एक दिन की हड़ताल पर जा रहे हैं। इस दौरान प्रदेश के सभी जिला मुख्यालयों में केंद्र सरकार के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन किया जाएगा।
जिला उपायुक्तों के माध्यम से प्रधानमंत्री को ज्ञापन भी भेजे जाएंगे।प्रदेश के 15466 सरकारी स्कूलों में मिड डे मील योजना चलाई जा रही है। इस योजना के माध्यम से 1.34 लाख विद्यार्थियों को दोपहर का भोजन दिया जाता है।
मानदेय बढ़ोतरी नहीं होने पर राज्य मिड डे मील वर्कर यूनियन ने 24 सितंबर को प्रदेश के सभी जिला मुख्यालयों में धरना देने का एलान किया है। सीटू से संबद्ध यूनियन की अध्यक्ष कांता महंत ने बताया कि बीते नौ साल से मानदेय में एक रुपये की भी बढ़ोतरी नहीं हुई है।
ऐसे में 24 सितंबर को धरना देकर उपायुक्तों के माध्यम से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को मानदेय में पांच हजार रुपये की बढ़ोतरी करने के लिए ज्ञापन भेजे जाएंगे।
वैकल्पिक व्यवस्था का दिया आदेश
उन्होंने कहा कि साल 2013 में तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने मानदेय में एक हजार रुपये की बढ़ोतरी करने का लिखित आश्वासन दिया था। लेकिन अभी तक यह बढ़ोतरी नहीं हुई है। इस मांग को लेकर यूनियन दिल्ली में कई बार प्रदर्शन कर चुकी है लेकिन केंद्र सरकार सुध नहीं ले रही।
महंगाई के इस दौर में एक हजार रुपये के मानदेय में गुजारा करना मुश्किल हो गया है। हाल ही में केंद्र सरकार ने आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, सहायिकाओं और आशा वर्करों के मानदेय में बढ़ोतरी की लेकिन मिड डे मील वर्करों के साथ सौतेला व्यवहार किया है।
महंत ने केंद्र सरकार से मिड डे मील वर्करों के मानदेय में पांच हजार रुपये की बढ़ोतरी करने, 45वें श्रम सम्मेलन की सिफारिशों के मुताबिक उन्हें पक्का करने, ग्रेच्युटी व पेंशन सुविधा देने और नौकरी से संबंधित 25 बच्चों की शर्त को हटाने की मांग की है।
प्रारंभिक शिक्षा निदेशक रोहित जमवाल ने बताया है कि हड़ताल को देखते हुए सभी स्कूलों के मिड डे मील प्रभारियों को एक दिन के लिए बच्चों के लिए भोजन बनाने को वैकल्पिक व्यवस्था करने के आदेश दिए हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश के सभी स्कूलों में बच्चों को भोजन उपलब्ध करवाना निदेशालय की प्राथमिकता में रहेगा।