कुल्लू: बर्फबारी से माता बूढ़ी नागिन के कपाट बंद, अब अप्रैल में दर्शन कर सकेंगे श्रद्धालु
हिमाचल के जिला कुल्लू के धार्मिक पर्यटन स्थल सरयोलसर में सीजन की पहली बर्फबारी हुई। इससे माता बूढ़ी नागिन के कपाट बंद हो गए हैं। माता की वास स्थली सरयोलसर में बर्फ की सफेद चांदी बिछने से यहां पारा भी शून्य तक पहुंच गया है। ऐसे में अब पांच माह के लिए मंदिर के कपाट बंद हो गए हैं। गर्मियों के दिनों में यहां सालाना हजारों की संख्या में पर्यटक व श्रद्धालु सरयोलसर पहुंचते हैं। माता के भक्त अब अप्रैल महीने में बैसाख संक्रांति को ही दर्शन कर पाएंगे। समुद्रतल से करीब 10500 फीट ऊंचे सरयोलसर में सर्दियों के दिनों में भारी बर्फबारी होने व शीत लहर चलने से यहां माता की पूजा नहीं की जा सकती है। ऐसे में अब माता के दर्शन व धार्मिक मान्यता रखने वाली एक किलोमीटर की परिधि की झील के दर्शन नहीं हा सकेंगे।
जलोड़ी दर्रा व सरयोलसर में इस सर्दी का पहला हिमपात हुआ है। आधा फीट बर्फबारी होने से यहां शीत लहर के साथ कड़ाके की ठंड पड़ गई है। पांच माह तक बंद रहने के बाद 15 अप्रैल को खुलने के बाद यहां माता के भक्तों का नवंबर महीने तक आना जाना लगा रहता है। गर्मी आते ही स्कूल-कॉलेज के विद्यार्थियों के साथ हजारों की संख्या में देशी-विदेशी पर्यटक माता का आशीर्वाद लेने के लिए आते हैं। यहां सालाना करीब 50 हजार लोग पहुंचते हैं। माता बूढ़ी नागिन के कारदार भागे राम राणा ने कहा कि ताजा बर्फबारी होने से माता के कपाट को बैसाख महीने तक के लिए बंद कर दिया है। उन्होंने कहा कि अब माता की पूजा ठंड के दौरान करना आसान नहीं है। अब माता के श्रद्धालु बैसाख संक्रांति को ही कर सकेंगे।