शहीद कैप्टन विक्रम बत्रा के जुड़वा भाई ने कारगिल जाकर दी भाई को श्रद्धांजलि
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7 जुलाई 1999 को कारगिल युद्ध में देश के लिए शहीद हुए पालमपुर के परमवीर चक्र विजेता कैप्टन विक्रम बत्रा को उनके छोटे भाई विशाल बत्रा ने प्वाइंट 4875 चोटी पर पहुंचकर श्रद्धांजलि दी। विक्रम की शहादत के बाद प्वाइंट 4875 चोटी को बत्रा टॉप का नाम दिया गया है। रविवार को विशाल बत्रा और सेना के अफसर हेलीकॉप्टर से बत्रा टॉप पर पहुंचे और श्रद्धांजलि दी। विक्रम बत्रा के पिता जीएल बत्रा ने यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि देश के लिए बेटे की शहादत पर उन्हें गर्व है।
आईसीआईसीआई बैंक में उत्तर भारत जोन के महाप्रबंधक पद पर तैनात विशाल बत्रा ने इसके लिए रक्षा मंत्रालय से पत्राचार कर वहां जाने की अनुमति ली थी। लिहाजा, बत्रा टॉप तक पहुंचने के लिए सेना की ओर से विशाल बत्रा को बाकायदा हेलीकॉप्टर मुहैया करवाया गया। कारगिल युद्ध के बीस साल पूरे होने पर विशाल अपने भाई को कारगिल की उस चोटी पर श्रद्धांजलि देना चाहते थे, जहां उनके भाई देश पर कुर्बान हो गए थे।
जीतने के बाद कहा था, ये दिल मांगे मोर
शहीद विक्रम बत्रा ने 1996 में इंडियन मिलिटरी अकादमी में दाखिला लिया था। 6 दिसंबर 1997 को कैप्टन बत्रा जम्मू और कश्मीर राइफल्स की 13वीं बटालियन में बतौर लेफ्टिनेंट शामिल हुए। कारगिल युद्ध में उन्होंने जम्मू और कश्मीर राइफल्स की 13वीं बटालियन का नेतृत्व किया।
20 जून 1999 को कैप्टन बत्रा ने कारगिल की प्वाइंट 5140 चोटी से दुश्मनों को खदेड़ने के लिए अभियान छेड़ा और कई घंटों की गोलीबारी के बाद मिशन में कामयाब हो गए। इसके बाद उन्होंने जीत का कोड बोला - ये दिल मांगे मोर।
पुण्यतिथि पर सीएम ने दी श्रद्धांजलि
मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने कारगिल युद्ध में देश के लिए अपनी जान न्योछावर करने वाले परमवीर चक्र विजेता शहीद कैप्टन विक्रम बत्रा की पुण्यतिथि पर उन्हें श्रद्धांजलि दी है। उन्होेंने कहा कि वीरभूमि हिमाचल के इस शहीद जवान की शहादत को वह शत-शत नमन करते हैं।