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सीएम जयराम की प्रतिष्ठा, सुखराम परिवार का राजनीतिक भविष्य दांव पर

Thu, 16 May 2019 12:47 PM IST
अरविन्द ठाकुर अखिलेश महाजन, अमर उजाला, मंडी
अखिलेश महाजन, अमर उजाला, मंडी Published by: अरविन्द ठाकुर Updated Thu, 16 May 2019 12:47 PM IST
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lok sabha election 2019 Mandi MP Seat Ramswaroop Sharma versus Aashray Sharma
- फोटो : अमर उजाला

लोकसभा चुनाव के आखिरी चरण में हिमाचल की हॉट सीट मंडी में भाजपा और कांग्रेस ने चुनाव प्रचार में पूरी ताकत झोंक दी है। गांव हो या शहर की गलियां-चौराहे, चाय की दुकानें-ढाबे, हर जगह चुनावी चर्चा है। कांग्रेस के गढ़ रहे मंडी संसदीय क्षेत्र में जिले से पहली बार मुख्यमंत्री बने जयराम ठाकुर की प्रतिष्ठा दांव पर है। भाजपा प्रत्याशी राम स्वरूप की जीत के लिए सीएम ने दिन-रात एक कर दिया है।

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दूसरी ओर छह दशक के राजनीतिक सफर में चौथी बार दल बदल कर फिर कांग्रेस का हाथ थामने वाले सुखराम परिवार का राजनीतिक भविष्य दांव पर है। कांग्रेस प्रत्याशी एवं पोते आश्रय शर्मा के लिए पं. सुखराम ने पूरी ताकत झोंक दी है। दिग्गजों की इस सियासी कुश्ती को देख रहे मतदाता खामोश हैं।

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...वोट केस जो देना, हली सोचने जो बथेरा टाइम आ

मंडी से करीब छह किमी दूर शिल्हकिपड़ क्षेत्र चुनावी रंग से रंगा हैं। यहां निजी कंपनी में नौकरी कर रहे ग्रेजुएट भीमसेन कहते हैं कि वह मतदान करते वक्त रोजगार, स्वास्थ्य सुविधाओं और प्रत्याशी की शैक्षणिक योग्यता जैसे मुद्दों को ध्यान में रखेंगे। दोपहर करीब साढ़े 11 बजे मंडी बस स्टैंड के समीप मामू टी-स्टाल में चाय की चुस्कियां ले रहे जयराम ठाकुर के गृह क्षेत्र सराज के तांदी के गोपाल सिंह कह रहे हैं कि साठ साल बाद मंडी को सीएम मिला है। ये चुनाव मंडी की प्रतिष्ठा का भी सवाल है।

दूसरे टेबल पर मझवाड़ के योगराज मंडयाली में कह रहे हैं कि... वोट केस जो देना, हली सोचने जो बथेरा टाइम आ, जिने जे काम कितेरा और काम करया करां, तेस जो ई वोट देने दे बारे सोचगे। भियूली के विजय कह रहे हैं विकास और बेरोजगारी दोनों अहम मुद्दे हैं। नाचन के विकास गुप्ता वर्तमान परिदृश्य में मिडल मैन और किसानों की परिस्थितियों और किसानों का आकलन करने के बाद वोट डालेंगे।

आश्रय को सुखराम और वीरभद्र का सहारा

lok sabha election 2019 Mandi MP Seat Ramswaroop Sharma versus Aashray Sharma
फाइल फोटो

संसदीय क्षेत्र मंडी में इस बार जंग कांग्रेस और भाजपा से ज्यादा जयराम और सुखराम के बीच मानी जा रही है। सियासी समीकरण उलझे हुए हैं। पहली बार मंडी से सीएम की कुर्सी तक पहुंचे जयराम ठाकुर की प्रतिष्ठा यहां दाव पर है और सीएम खुद भाजपा प्रत्याशी रामस्वरूप के प्रचार की कमान संभाले हुए हैं। यही नहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद चुनावी रैली कर वोटरों की नब्ज टटोलते हुए मंडी संसदीय क्षेत्र के साथ दिल से जुड़े होने का इमोशनल कार्ड खेल रहे हैं।

मंडी में कभी राजनीति की धुरी रहे पंडित सुखराम और उनके पोते आश्रय को अब तक के कैंपेन में वीरभद्र का पूरा साथ नहीं मिला है। वीरभद्र सिंह के रुख पर भी सबकी निगाहें हैं, क्योंकि वह मौका मिलने पर सुखराम परिवार पर निशाना साधने का मौका भी नहीं चूक रहे हैं।

अपने पुराने कार्यों को लेकर सुखराम परिवार ने चुनावी फील्ड सजाई है। कांग्रेस प्रत्याशी के पिता अनिल शर्मा को छोड़ सत्तारूढ़ भाजपा को 17 विधानसभा क्षेत्रों में 13 विधायकों का साथ है। कांग्रेस सुखराम परिवार के सहारे वापसी का प्रयास कर रही है। लेकिन इस सब के बीच तीसरे दलों और बागियों का रोल भी अहम रहेगा।

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यह हैं मुद्दे

lok sabha election 2019 Mandi MP Seat Ramswaroop Sharma versus Aashray Sharma
रामस्वरूप शर्मा

सड़कों की हालत, बेरोजगारी, बेहतर शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाएं, मंडी में अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, कीरतपुर-मंडी-मनाली फोरलेन, जिला मंडी को पर्यटन की दृष्टि से विकास कर स्वरोजगार के साधन, द्रंग में नमक की खान में उत्पादन, पठानकोट-जोगिंद्रनगर रेललाइन का विस्तार, भूभू जोत टनल का निर्माण, फोरलेन प्रभावितों की मुआवजे संबंधित मांगे के साथ साथ महंगाई, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार, नोटबंदी, जीएसटी जैसे मुद्दे भी जीवंत हैं।

इस बार लड़ाई सबसे अधिक मार्जिन की है : रामस्वरूप
रामस्वरूप शर्मा का कहना है कि सुखराम ने सिर्फ परिवार का सोचा है। मंडी को मंडी बनाकर रख दिया था, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सहयोग से मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने मंडी को छोटी काशी का रूप दिया है। स्वास्थ्य सेवाएं, शिक्षा, सड़क, पर्यटन हर क्षेत्र में मंडी का विकास हुआ है। विकास कार्यों के दम पर वह चुनाव तो जीत चुके हैं, लेकिन इस बार लड़ाई सबसे अधिक मार्जिन की है। बड़ी काशी के सांसद यानी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद छोटी काशी के सांसद को मंडी पहुुंचकर आशीर्वाद दे चुके हैं। एक सुदामा के मंडी संसदीय क्षेत्र के लिए इससे बड़ी बात क्या होगी। इन चुनावों के बाद सुखराम परिवार की पॉलिटिकल कॅरिअर की डेथ तय है। 

युवा सोच और बड़ों के आशीर्वाद से जीतूंगा : आश्रय
आश्रय शर्मा का कहना है कि वह चुनाव जीतेंगे। कांग्रेस आलाकमान ने टिकट देकर जो विश्वास उन पर जताया है, वह उसे पूरा करेंगे। पांच सालों में सांसद रामस्वरूप अपने संसदीय क्षेत्र से ही गायब रहे। लोग उन्हें ढूंढ रहे हैं। लोगों में भाजपा प्रत्याशी के खिलाफ काफी रोष है। उनकी जीत तय है। क्योंकि उन्हें वीरभद्र सिंह और पंडित सुखराम का साथ है। दोनों हिमाचल के लिए विकास के मसीहा हैं। पंडित सुखराम ने कई परिवारों के घरों को रोजगार दिया है। जबकि देश भर में दूर संचार क्रांति लाने में अहम भूमिका निभाई है। अपनी युवा सोच और दादा एवं कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व के दम पर वह जीतेंगे।

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