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विदेशी सेब की मार से निजात के दावे हवा, बागवान बेबस

Tue, 23 Apr 2019 04:57 PM IST
Krishan Singh न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला Published by: Krishan Singh Updated Tue, 23 Apr 2019 04:57 PM IST
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lok sabha election 2019: import duty on Foreign apple issue in himachal
सांकेतिक तस्वीर

विदेशी सेब पर आयात शुल्क बढ़ाने और हिमाचल के सेब को विशेष श्रेणी का दर्जा दिलाने के नाम पर हर राजनीतिक पार्टी ने हिमाचल के बागवानों को झुनझुना ही थमाया है। सेब बागवानों पर पड़ रही विदेशी सेब की मार से निजात दिलाने के राजनेताओं के दावे हवा-हवाई ही साबित हो रहे हैं।

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लोकसभा चुनाव से पहले प्रदेश के सेब बागवानों से इससे संबंधित वायदे किए जाते हैं, लेकिन धरातल पर ये लागू नहीं होते। दूसरी ओर हिमाचल सेब की गुणवत्ता सुधार के लिए भी सरकारी स्तर पर बागवानों को निराशा ही हाथ लगती आई है। 
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हिमाचल के सेब बागवानों का सबसे बड़ा मुद्दा विदेशी सेब का भारत में अंधाधुंध आयात रोकना है। विदेशों से सेब भारत की मंडियों में आता है और इसके सामने हिमाचली सेब पिट जाता है। इसकी वजह यह है कि आकार, रंग और अन्य बाहरी दिखावे के दृष्टिगत हिमाचल का सेब विदेशी सेब का मुकाबला नहीं कर पाता। 

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विदेशी सेब से अधिक पौष्टिक

lok sabha election 2019: import duty on Foreign apple issue in himachal
फाइल फोटो

बेशक यह विदेशी सेब से अधिक पौष्टिक हो। ऐसे में हिमाचल के सेब बागवानों की उपज को विदेशी उत्पाद की तर्ज पर दाम नहीं मिल पाते। यूपीए-दो के समय में भी हिमाचल के बागवानों की ओर से यह मांग उठाई गई, उस समय केंद्रीय वाणिज्य मंत्री आनंद शर्मा भी हिमाचल से थे।

उनके प्रयास भी इसके लिए असफल रहे। अमेरिका की ओर से अपनी कई वस्तुओं पर भारत के लिए निर्यात शुल्क बढ़ा देने के बाद मोदी सरकार ने सेब सहित कई वस्तुओं पर आयात शुल्क बढ़ाने की चेतावनी जरूर दी। इस बारे में प्रक्रिया भी शुरू हुई, मगर इस पर अंतिम फैसला नहीं हो पाया।

इसका नतीजा यह है कि आज भी देश भर के बाजारों में विदेशी सेब अटा पड़ा है। नया सेब सीजन दो-तीन महीने बाद शुरू होने वाला है, मगर सेब बागवानों को विदेशी सेब की मार पड़ने की चिंता सता रही है। 

अभी 50 फीसदी आयात शुल्क, आगे पूरी तरह से खत्म करने की तैयारी 

lok sabha election 2019: import duty on Foreign apple issue in himachal
फाइल फोटो

आयात शुल्क की लड़ाई लड़ रहे बागवानों का कहना है कि अभी विदेशी सेब पर 50 फीसदी आयात शुल्क है। आगे से इसे पूरी तरह से जीरो पर लाने की तैयारी है। अगर ऐसा होता है तो फ्री ट्रेड शुरू हो जाएगा।

विदेशों में सेब उत्पादन की लागत कम होने के कारण विदेशी 50 फीसदी आयात शुल्क पर भी खूब सेब भारत भेज रहे हैं। जब यह आयात शुल्क खत्म ही हो जाएगा तो बड़ी समस्या खड़ी हो जाएगी।

वर्तमान में सार्क देशों से ही बगैर आयात शुल्क के सेब भारत आता है। ऐसे में अफगानिस्तान, नेपाल और श्रीलंका से होता हुआ ईरान का सेब भारत पहुंचकर हिमाचली सेब को नुकसान पहुंचा रहा है।

शिमला के बखोल गांव के मशहूर बागवान संजीव चौहान और डिंपल पांजटा का कहना है कि हम लोग गुणवत्ता में विदेशी सेब से बहुत पीछे हैं। अगर आयात शुल्क घट गया तो हिमाचल के बागवान बर्बाद हो जाएंगे। हिमाचल में आधारभूत ढांचा वैसा नहीं, जो बागवानों के लिए उपयोगी हो।

मोदी सरकार ने सेब पर आयात शुल्क नहीं बढ़ाया

हिमाचल प्रदेश कांग्रेस कमेटी महासचिव नरेश चौहान ने कहा कि मोदी सरकार ने पांच साल तक सेब पर आयात शुल्क नहीं बढ़ाया। यह आज भी पचास फीसदी है और इसे सौ फीसदी से अधिक करने की मांग की जा रही थी। बागवानों का सेब शीतल पेय कंपनियों को बेचने की व्यवस्था करने की मांग की थी और यह मामला भी ठंडे बस्ते में डालकर रखा गया।  

आयात शुल्क के मामले में डब्ल्यूटीओ की कुछ सीमाएं हैं। उन्हें पार करके ही कुछ किया जा सकता है। कांग्रेस ने कभी कुछ नहीं किया। भारतीय जनता पार्टी ने ही सेब पर काम किया है। हमने बागवानी पर काफी काम किया है। किसानों और बागवानों को उचित दाम मिले, इसके लिए खूब काम होता रहा है। आयात शुल्क का मामले पर भी भाजपा प्रयासरत है।- चंद्रमोहन ठाकुर, महामंत्री, प्रदेश भाजपा।   

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