बीबीएन में कोरोना हॉटस्पॉट घोषित क्षेत्र के 50 फार्मा उद्योगों पर लटके ताले
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देश में लॉकडाउन-2 और प्रदेश में कर्फ्यू के साथ बीबीएन के हॉटस्पॉट क्षेत्रों में करीब 50 दवा उद्योग बंद हैं। हॉटस्पॉट क्षेत्रों में किसी भी प्रकार की गतिविधि पर रोक है। सिर्फ होम डिलीवरी से लोगों को आवश्यक सामान पहुंचाया जा रहा है। नालागढ़ तथा झाड़माजरी दो क्षेत्र हॉटस्पॉट क्षेत्र घोषित किए गए हैं। झाड़माजरी क्षेत्र में करीब चार दर्जन फार्मा उद्योग भी काम नहीं कर रहे हैं। नालागढ़ और बद्दी शहरों सहित 41 पंचायतें सील हैं। हिमाचल में 51 फार्मा उद्योगों के पास मलेरिया के उपचार में प्रयोग में लाई जाने वाली हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन दवा के उत्पादन का लाइसेंस है।
इन उद्योगों की क्षमता एक दिन में एक करोड़ गोलियां तैयार करने की है, लेकिन उद्योग ऑर्डर के हिसाब से ही इसका निर्माण कर रहे हैं। उतना ही उत्पादन हो रहा है, जितना केंद्र या दूसरे राज्यों से दवा कंपनियों को ऑर्डर मिल रहा है। बीबीएन में करीब डेढ़ दर्जन उद्योग यह दवाई तैयार कर रहे हैं। इनमें एक-दो उद्योगों की दवाओं का निर्यात विदेशों में किया जाता है। सहायक राज्य दवा नियंत्रक मनीष कपूर ने कहा कि कई उद्योगों के पास कच्चे माल की कमी है। उद्योगों ने मलेरिया की दवा तैयार की जा रही है। इसका निर्यात भी किया जाता है।
उद्योगों को पेश आ रही है कच्चे माल की परेशानी
राज्य दवा नियंत्रक नवनीत मारवाहा ने कहा कि हिमाचल के पास मलेरिया की दवा की कमी नहीं है। सरकार ने इसका स्टॉक किया है। उद्योगों के पास भी यह दवा बनी हुई है। ऑर्डर की कमी है। प्रदेश के उद्योग इतने सक्षम हैं कि जितना भी ऑर्डर मिलेगा, उसे पूरा किया जाएगा।
दवा नियंत्रक प्राधिकरण को फार्मा उद्योगों के लिए कच्चे माल की आपूर्ति की परेशानी भी आ रही है। कच्चे माल की कमी से दवा उद्योग उत्पादन नहीं कर पा रहे हैं। उद्योग पहले भी करीब 20 से 30 फीसदी ही उत्पादन कर रहे थे, लेकिन अब कच्चे माल की कमी खल रही है।