{"_id":"620a0a896eaee245874e6c6b","slug":"lobbying-by-bjp-leaders-for-rajya-seat-in-himachal-pradesh","type":"story","status":"publish","title_hn":"हिमाचल: राज्यसभा की सीट मार्च में होगी खाली, लॉबिंग में जुटे भाजपा नेता","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
हिमाचल: राज्यसभा की सीट मार्च में होगी खाली, लॉबिंग में जुटे भाजपा नेता
Mon, 14 Feb 2022 01:24 PM IST
अरविन्द ठाकुर
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
Published by: अरविन्द ठाकुर
Updated Mon, 14 Feb 2022 01:24 PM IST
सार
आनंद शर्मा की कांग्रेस के कार्यकाल में पिछली वीरभद्र सरकार में नियुक्ति हुई थी। छह साल का कार्यकाल मार्च 2022 में पूरा होने के चलते इस सीट पर अब स्वाभाविक रूप से भाजपा के किसी नेता की नियुक्ति की जानी है।
विज्ञापन
आनंद शर्मा
- फोटो : सोशल मीडिया
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
हिमाचल प्रदेश से राज्यसभा की एक सीट मार्च में खाली हो रही है। प्रदेश भाजपा के कई नेता इसके लिए लॉबिंग में जुट गए हैं। क्षेत्रीय संतुलन के हिसाब से मंडी या शिमला को तरजीह मिल सकती है। यह सीट कांग्रेस नेता आनंद शर्मा का कार्यकाल पूरा होने के बाद खाली हो रही है। प्रदेश से राज्यसभा सदस्य के लिए तीन सीटें तय हैं। इनमें से एक सीट पर भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा और एक अन्य पर इंदु गोस्वामी नियुक्त हैं।
विज्ञापन
तीसरी सीट पर आनंद शर्मा की कांग्रेस के कार्यकाल में पिछली वीरभद्र सरकार में नियुक्ति हुई थी। छह साल का कार्यकाल मार्च 2022 में पूरा होने के चलते इस सीट पर अब स्वाभाविक रूप से भाजपा के किसी नेता की नियुक्ति की जानी है। अगर क्षेत्रीय संतुलन देखा जाए तो यह नियुक्ति मंडी संसदीय क्षेत्र से की जा सकती है। संसद में केवल एक मंडी संसदीय क्षेत्र से ही भाजपा का सांसद नहीं है। यहां से लोकसभा में कांग्रेस की सांसद प्रतिभा सिंह हैं।
विज्ञापन
बाकी तीन संसदीय क्षेत्रों कांगड़ा से किशन कपूर, हमीरपुर से केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर के अलावा राज्यसभा में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा और शिमला से सांसद भाजपा प्रदेशाध्यक्ष सुरेश कश्यप हैं। सूत्रों के अनुसार हालांकि पद के तलबगारों में अजय राणा, अजय जम्वाल जैसे नाम भी हैं। पूर्व राज्यसभा सांसद कांगड़ा के कृपाल परमार भी स्वाभाविक रूप से यह पद चाहेंगे, मगर कांगड़ा से लोकसभा और राज्यसभा दोनों ही जगहों पर नेतृत्व से यह बात संभवतया बन न पाए।
विज्ञापन
बाहर से किसी बड़े नेता की नियुक्ति किए जाने की भी संभावना
किसी नेता पर बात नहीं बनी तो राज्य के बाहर से भी किसी केंद्रीय नेता को तरजीह दी जा सकती है। हालांकि, प्रदेश के कई भाजपा नेता इसके लिए भरसक प्रयास करते रहेंगे।