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वीडियो चंद्रखणी हादसा: छात्रों ने सुनाई आपबीती, कैसे दी मौत को मात

Mon, 14 Mar 2016 11:47 AM IST
मोहर सिंह पुजारी/अमर उजाला, कुल्लू
मोहर सिंह पुजारी/अमर उजाला, कुल्लू Updated Mon, 14 Mar 2016 11:47 AM IST
सार

  • कुल्लू अस्पताल में इलाज करवा रहे चंद्रखणी में मौत को मात देने वाले इंजीनियरिंग छात्र
  • बोले, खाने के नाम पर बर्फ थी तो पीने के लिए पानी की तीन बोतलें
  • रेस्क्यू दल नहीं देख पाया तो पेड़ों पर चढ़कर टांगे लाल रंग के कपड़े

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live story of engineering students who was rescued from chandrakhani pass
कुल्‍लू के रूमसू गांव में अपबीती सुनाते चंद्रखणी जोत से रेस्‍क्यू किए गए छात्र। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

समुद्र तल से करीब 12 हजार फुट ऊंचे चंद्रखणी जोत पर फंसे इंजीनियरिंग छात्र और एक गाइड 72 घंटे तक भूखे पेट माइनस तापमान में मौत को मात देकर सुरक्षित निकल आए हैं। कुल्लू अस्पताल में इलाज करवा रहे चंबा के अक्षय कुमार और अंबाला के चेतन ने बताया कि  चंद्रखणी के आसपास पहुंचते ही बर्फबारी शुरू हो गई थी।

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चारों तरफ अंधेरा छा गया। बिजली महादेव से उन्होंने ट्रैकिंग शुरू की थी। उन्हें यह पता नहीं था कि वे किस लोकेशन पर हैं। मोबाइल बैटरियां जवाब दे चुकी थीं। पर खुशकिस्मती यह रही है कि अनिल के मोबाइल की बैटरी काम कर रही थी। अनिल ने पुलिस हेल्प लाइन के 100 नंबर पर डायल किया। बताया कि वे चंद्रखणी में फंसे हैं। महज आधा मिनट बातचीत के बाद यह बैटरी भी बंद हो गई।
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माइनस तापमान और बर्फबारी से बचने के लिए गुफा में टैंट लगाकर शरण ली। वहां खाने के नाम पर बर्फ थी तो पीने के लिए पानी की तीन बोतलें। एक वक्त ऐसा भी आया जब जिंदा बचने की आस छोड़ दी। लेकिन वे जिंदगी की जंग लड़ते रहे। छात्र अंकुश ने बताया कि 12 मार्च को चंद्रखणी के ऊपर से हेलीकाप्टर गुजरते देखा तो जान में जान आ गई।
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लेकिन धुंध के कारण रेस्क्यू दल उन्हें देख नहीं पाया। वे पेड़ों पर चढ़ गए और लाल रंग के कपड़े बांध दिए। छात्रों ने बताया कि शनिवार को अनिल और हितेंद्र उनसे बिछड़ गए। ये दोनों अभी भी फंसे हुए हैं। उपायुक्त हंस राज चौहान के अनुसार सोमवार को इन छात्रों को भी हेलीकाप्टर से निकाला जाएगा।

दोस्तों के लिए रास्ता खोजना अनिल और हितेंद्र को पड़ा भारी

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कुल्‍लू अस्पताल में उपचाराधीन चंद्रखणी जोत से रेस्‍क्यू किए गए छात्र। - फोटो : अमर उजाला

दोस्तों के लिए रास्ता खोजना अनिल और हितेंद्र के लिए भारी पड़ गया। चंद्रखणी टॉप में फंसे 7 इंजीनियरिंग छात्रों में से दो अभी भी एक गुफा में हैं। यह दो छात्र 12 मार्च को चंद्रखणी में ही अपने अन्य 5 छात्रों से बिछड़ गए थे। लिहाजा अनिल और हितेंद्र को शनिवार और रविवार की रात उनसे अलग गुजारनी पड़ी।

रेस्क्यू हो कर निकले छात्र अक्षय ने बताया कि जब वह लोग बर्फबारी के बीच टॉप में फंस गए तो अनिल और हितेंद्र रास्ता खोजने के लिए जंगल की तरफ निकल पड़े, लेकिन वह वापस लौट कर नहीं आए। अनिल वही छात्र है जिसके मोबाइल से 100 नंबर पर पुलिस को गुम होने की सूचना दी गई। हालांकि रविवार को उनका लोकेशन ट्रेस आउट कर चौपर से दोनों के लिए खाना और अन्य जरूरी सामान फेंका गया। प्रशासन का दावा है कि दोनों फंसे छात्र बिल्कुल सुरक्षित है।

माना जा रहा है कि अगर रविवार की रात फिर से बर्फ गिरती है तो दोनों फंसे छात्रों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। उपायुक्त कुल्लू हंसराज चौहान ने कहा कि सोमवार को मौसम साफ रहा तो दोनों फंसे छात्रों को सोमवार सुबह ही रेस्क्यू करने के लिए चौपर उड़ान भरेगा। फंसे हुए छात्र एक शिमला और दूसरा हमीरपुर जिले का है।

क्लिक कर देखें वीडियो

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