अच्छी खबर! यहां की पहाड़ियों से निकलेगा चूना पत्थर
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सोलन जिले के अर्की में 1000 करोड़ की लागत वाली चूना पत्थर परियोजना को केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय ने मंजूरी दे दी है। परियोजना के लिए 173 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण होगा। इसमें 84 हेक्टेयर भूमि वन क्षेत्र में है जबकि अन्य निजी भूमि अधिग्रहीत होगी। इसके लिए करीब 900 पेड़ काटे जाएंगे। करीब तीन दशकों से इस परियोजना पर काम चल रहा था, लेकिन केंद्रीय इस्पात मंत्री रहते वीरभद्र सिंह ने इसकी कवायद तेज की थी।
अर्की उपमंडल के घनागुघाट में चूना पत्थर प्रोजेक्ट के लिए प्रदेश सरकार की ओर से लैटर ऑफ इंटेंट जारी करने के बाद केंद्रीय इस्पात मंत्रालय के उपक्रम नेशनल मिनरल डेवलपमेंट कारपोरेशन (एनएमडीसी) ने परियोजना का खाका तैयार कर केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय को भेजा था। औपचारिकताएं पूरी करने के बाद परियोजना को मंजूरी मिल गई है। एनएमडीसी के अर्की कार्यालय प्रभारी डा. रमेश वर्मा ने 10 अप्रैल को मंजूरी मिलने की पुष्टि की है।
5 मिलियन टन होगी क्षमता
ये गांव होंगे विस्थापित- ग्राम पंचायत चम्यावल का सुझाइला गांव व घनागुघाट पंचायत का बपड़ोण, शेरपुर, बैहली और ताल आदि गांव प्रोजेक्ट की जद्द में आते हैं। इन गांवों की करीब 88 हेक्टेयर निजी भूमि अधिग्रहीत की जाएगी। इस प्रोजेक्ट से सैकड़ों लोगों को प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिलेगा।
परियोजना के तहत करीब पांच मिलियन टन उच्च क्षमता वाले चूना पत्थर का दोहन होगा। एनएमडीसी अर्की कार्यालय के अनुसार वनीकरण, सुरक्षा जोन एवं पेड़ पौधों की एवज में करीब 9.47 करोड़ रुपये जमा किए गए हैं। इसके अलावा भूस्खलन रोकने को 85 लाख की लागत वाली योजना राज्य सरकार ने अनुमोदित की है। अधिग्रहण के बाद कार्य शुरू हो जाएगा। चूना पत्थर स्टील और सीमेंट इंडस्ट्री प्रयोग में लाती हैं। इसकी खपत पूरी न होने के चलते इसे विदेशों से भी मंगाया जाता है।