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Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Like corona there is a possibility of change in the variant of whooping cough, research will be done in CRI Kasauli

CRI Kasauli: कोरोना की तरह काली खांसी के वैरिएंट में बदलाव की आंशका, सीआरआई कसौली में होगा शोध

Tue, 07 Jun 2022 10:41 AM IST
Krishan Singh आदित्य सोफत, संवाद न्यूज एजेंसी, सोलन
आदित्य सोफत, संवाद न्यूज एजेंसी, सोलन Published by: Krishan Singh Updated Tue, 07 Jun 2022 10:41 AM IST
सार

डिप्थीरिया और पर्टुसिस (गलघोंटू और काली खांसी) में होने वाले बदलावों का पता लगाया जाएगा। भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) ने केंद्रीय अनुसंधान संस्थान (सीआरआई) और क्रिश्चियन मेडिकल कॉलेज वेल्लोर को संयुक्त रूप से यह प्रोजेक्ट दिया है। 

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Like corona there is a possibility of change in the variant of whooping cough, research will be done in CRI Kasauli
सीआरआई कसौली। - फोटो : संवाद

विस्तार

गलघोंटू और काली खांसी के वैरिएंट में बदलाव की आंशका है। डिप्थीरिया और पर्टुसिस (गलघोंटू और काली खांसी) में होने वाले बदलावों का पता लगाया जाएगा। भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) ने केंद्रीय अनुसंधान संस्थान (सीआरआई) और क्रिश्चियन मेडिकल कॉलेज वेल्लोर को संयुक्त रूप से यह प्रोजेक्ट दिया है। इन बीमारियों में कोविड की तरह बैक्टीरिया का वैरिएंट बदलने की आशंका है। दावा किया जा रहा है कि आगामी कुछ समय में इस शोध के परिणाम आने शुरू हो जाएंगे। अगर इन बीमारियों में कोई बदलाव आए हैं तो उसी के हिसाब से वैक्सीन तैयार की जाएगी।

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सीआरआई कसौली में आधुनिक मशीनों की सहायता से इस शोध कार्य में मदद मिलेगी। डिप्थीरिया और पर्टुसिस से पीड़ित व्यक्ति के खून का सैंपल संस्थान में लाया जाएगा। कल्चर जांच के माध्यम से इसका परीक्षण किया जाएगा, जिसके माध्यम से बीमारी में हो रहे बदलाव का पता लगाया जाएगा। उल्लेखनीय है कि केंद्रीय अनुसंधान संस्थान कसौली शोध कार्य के साथ कई प्रकार की वैक्सीन और एंटी सीरम का उत्पादन करता है। सीआरआई में पर्टुसिस, गलघोंटू और डिप्थीरिया बीमारी के लिए एक ही टीपीडी वैैक्सीन, टिटनेस कम अडल्ट डिप्थीरिया के लिए टीडी वैक्सीन उत्पादन हो हो रहा है। संवाद
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डिप्थीरिया और पर्टुसिस बीमारी में परिवर्तन का पता लगाया जाएगा। सीआरआई को यह एक नया प्रोजेक्ट मिला है। इस प्रोजेक्ट के कार्य को लेकर औपचारिकताएं पूरी की जा रही हैं। - डॉ. यशवंत कुमार, सीआरआई के सहायक निदेशक व जन संपर्क अधिकारी  
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क्या है डिप्थीरिया और पर्टुसिस
डिप्थीरिया रोग के लिए डिप्थीरिया वैक्सीन का टीका लगता है। डिप्थीरिया संक्रामक रोग है, जो दो से 10 वर्ष तक की आयु के बच्चों को अधिक होता है। हालांकि, सभी आयु वालों को यह रोग हो सकता है। यह रोग गले में होता है और टांसिल भी होते हैं। इसके बैक्टीरिया टांसिल व श्वास नली को सबसे ज्यादा संक्रमित करते हैं। सांस लेने में दिक्कत, गर्दन में सूजन, बुखार आदि डिप्थीरिया के लक्षण हैं। बोर्डेटेला पर्टुसिस काली खांसी का कारण बनता है। 

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