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स्वर्गीय रामस्वरूप शर्मा: बेटे ने कहा- रात 11 बजे हुई थी मां से बात, नहीं थी कोई टेंशन

Thu, 18 Mar 2021 03:40 PM IST
Krishan Singh अमर उजाला नेटवर्क, मंडी/जोगिंद्रनगर
अमर उजाला नेटवर्क, मंडी/जोगिंद्रनगर Published by: Krishan Singh Updated Thu, 18 Mar 2021 03:40 PM IST
सार

  • स्वर्गीय सांसद रामस्वरूप शर्मा के गांव में मातम
  • बेटे ने कहा- रात 11 बजे हुई थी मां से बात
  • रामस्वरूप के आत्महत्या करने की बात किसी के गले नहीं उतर रही

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Late mp Ramswaroop Sharma son statement regarding his father in mandi himachal
स्वर्गीय रामस्वरूप शर्मा के बेटे आनंद स्वरूप - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

स्वर्गीय सांसद रामस्वरूप शर्मा के हिमाचल प्रदेश के मंडी स्थित पैतृक गांव जलपहेर में मातम पसरा है। जुझारू और मृदृभाषी रामस्वरूप के आत्महत्या करने की बात किसी के गले नहीं उतर रही।  मंडी में नौकरी कर रहे रामस्वरूप के मंझले बेटे आनंद स्वरूप ने बताया कि बुधवार सुबह करीब आठ बजे उनके बड़े भाई शांति स्वरूप ने फोन कर घटना की जानकारी दी। वह मंडी में थे।

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सूचना देने के बाद बड़े भाई छोटे भाई क्रांति स्वरूप के साथ करीब नौ बजे दिल्ली रवाना हुए। बताया कि उनके पिता की आखिरी बार उनकी मां से मंगलवार रात करीब साढ़े 11 बजे बात हुई थी। पिता को कोई टेंशन नहीं थी। बता दें कि स्वर्गीय रामस्वरूप शर्मा के तीन बेटे हैं। सभी शादीशुदा हैं। सबसे बड़े बेटे शांति स्वरूप जोगिंद्रनगर में प्रिंटिंग प्रेस संभालते हैं। आनंद स्वरूप मंडी में नौकरी करते हैं। सबसे छोटे बेटे क्रांति स्वरूप एनएचपीसी में कार्यरत हैं। 
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गुजरात में थीं सांसद की पत्नी
मंझले बेटे आनंद स्वरूप ने बताया कि उनकी मां चंपा शर्मा को उनकी मौत का समाचार द्वारका गुजरात में मिला। वह द्वारकाधीश के दर्शनों के लिए गई थीं। इसके बाद वह दिल्ली लौटीं। मां ने बताया कि रात करीब 11 बजे उनसे बात हुई थी। 
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अस्वस्थ थे, जब पूछा दिल्ली आ जाता हूं तो मना कर दिया
मंझले बेटे ने बताया कि उनके पिता हृदयरोगी थे। उन्हें स्टेंट पड़े थे। वह सेहत का काफी ख्याल रखते थे। पिता रामस्वरूप थोड़े दिन से अस्वस्थ थे। दो दिन पहले उनसे बात हुई और हमने दिल्ली आकर इलाज करवाने की बात कही तो पिता ने मना कर दिया। उन्होंने कोई कोई समस्या नहीं है। पूरा परिवार शांति से आरामदायक जिंदगी जी रहा था।

वर्ष 2016 में पहली बार सांसद बनने के बाद दिवंगत रामस्वरूप शर्मा शिवरात्रि समारोह के बाद दिल्ली लौटे थे ,उस समय उन्हें पहला हार्ट अटैक पड़ा था। तब राम मनोहर लोहिया अस्पताल में उन्हें दो स्टेंट भी पड़े थे। इस सदमे से उबरने के बाद 2018 में शिवरात्रि के दो दिन बाद उनके परम मित्र सदर भाजपा के मंडलाध्यक्ष रहे चेतन शर्मा को भी हार्ट अटैक पड़ा था और उनकी अचानक मौत हुई। जिसके बाद रामस्वरूप काफी दुखी थे। उन्होंने ये बात कई मंचों से साझा भी की थी कि उनके बगैर मन नहीं लगता। वहीं कुछ अरसे से सांसद चुपचाप रहते थे। सिर्फ भाषणों में ही उनका जोशिला पन दिखाई देता था। बताया जा रहा है कि घटना से पहले वह बेहद कम बातचीत करते थे।

14 मार्च को अंतिम बार पीएम मोदी की पोस्ट की रीट्वीट

राम स्वरूप शर्मा ट्विटर पर काफी सक्रिय रहते थे। अंतिम बार उन्होंने पीएम मोदी के पोस्ट को रीट्वीट किया है। जिसमें भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया के बीच हुई बैठक में ‘क्वाड’ समूह के नेताओं ने चीन को स्पष्ट संदेश दिया था। क्वाड समूह का यह पहला शिखर सम्मेलन था। इसमें भारत की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन, ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरिसन और जापान के प्रधानमंत्री योशिहिदे सुगा ने हिस्सा लिया।



सर्वे भवंतु सुखिन: सर्वे संतु निरामया का दिया था संदेश 
सांसद रामस्वरूप शर्मा फेसबुक पर भी काफी सक्रिय थे। 13 मार्च को उन्होंने कोविड वैक्सीन लगवाई। फेसबुक पर उन्होंने संदेश लिखा- मैंने अपने संसदीय क्षेत्र मंडी के अंतर्गत नागरिक अस्पताल जोगिंदर नगर में कैंप में कोविड-19 वैक्सीन का पहला डोज लगवाया और वैक्सीन लगाने आए लोगों का कुशलक्षेम जाना। मैं जनता से आग्रह करता हूं कि बिना डरे ज्यादा से ज्यादा लोग अपने आप को वैक्सीनेशन करवाएं। आओ हम मिलकर इस कोरोना महामारी को हराएं- सर्वे भवंतु सुखिन: सर्वे संतु निरामया।

ओ आरा लोकां रे मुंह कोस बुजणे, जितने मुंह तितनी ही गल्लां 

सांसद रामस्वरूप शर्मा की दिल्ली में संदिग्ध मौत की पहेली में गृह जिला मंडी की जनता उलझी रही। शहर के गली-चौराहों पर चाय की दुकानों, ढाबों और बाजार में दिन भर सांसद की मौत का मामला छाया रहा। सूचना मिलते ही छोटी काशी मंडी में लोग मोबाइल पर एक-दूसरे से जानकारी लेते दिखे। शहर की चंद्रलोक गली स्थित एक चाय की दुकान पर बैठे कुछ लोग चाय की चुस्कियां लेते हुए मंडीयाली में बोल रहे थे कि मौत बी केथी जाईके आई, दूसरा व्यक्ति ओ भाई जेथी लिखी री तेथी औंणी। कुछ लोग कह रहे थे कि हो न हो मौत की वजह कुछ तो रही होगी। ऐसे इतना बढ़ा कदम कोई उठा नहीं सकता।

दूसरे व्यक्ति का जवाब था ओ आरा लोकां रे मुंह कोस बुजणे, जितने मुंह तितनी ही गल्लां। क्या हुआ हुंग्गा ए तां मरने वाले जो ही पता हुंग्गा। एक ढाबे में बैठे लोगों का कहा था कि पंडित जी के साथ वही हुआ, जो फिल्म अभिनेता सुशांत राजपूत के साथ हुआ। जिसकी गुत्थी आज तक नहीं सुलझ पाई है। तभी एक व्यक्ति कहते हुए वहां पहुंचता है कि सरकार को अब 6 माह के अंदर चुनाव करवाने पड़ेंगे, पई गया सरकारा जो खर्चा। चर्चा के दौरान बात सुखराम परिवार तक भी पहुंचती कि इस बार पंडित सुखराम अपने पोते के लिए फिक्रमंद हो गए हैं। कुछ कह रहे थे कि 12 मार्च को सांसद रामस्वरूप महाशिवरात्रि मेले के शुभारंभ पर बीमार दिख रहे थे।

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