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हिमाचल: क्यों दरक रहे पहाड़, डीजीआरई और सीडब्ल्यूसी के वैज्ञानिक करेंगे अध्ययन

Sat, 14 Aug 2021 03:27 PM IST
Krishan Singh अशोक राणा, अमर उजाला, केलांग (लाहौल-स्पीति)
अशोक राणा, अमर उजाला, केलांग (लाहौल-स्पीति) Published by: Krishan Singh Updated Sat, 14 Aug 2021 03:27 PM IST
सार

इस तरह की प्राकृतिक आपदाओं के पीछे के कारणों की तह तक जाने के लिए केंद्रीय जल आयोग के वैज्ञानिक लाहौल पहुंच रहे हैं। जबकि, डीआरडीओ के डिफेंस जियोइंफॉर्मेटिक्स रिसर्च इस्टैब्लिशमेंट (डीजीआरई) के वैज्ञानिकों की टीम पहाड़ दरकने के कारणों को जानने के लिए शुक्रवार को ही लाहौल पहुंच गई है। 

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landslide Himachal: Why the mountains are cracking, scientists of DGRE and CWC will study
लाहौल स्पीति में टूटा पहाड़(फाइल) - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

 हिमाचल में लगातार पहाड़ों के दरकने की घटनाओं के बाद राज्य सरकार भी अलर्ट हो गई है। किन्नौर, चंबा और सिरमौर में पहाड़ दरकने के बाद शुक्रवार को अचानक पीर पंजाल की पहाड़ी से एक हिस्सा ढह कर चंद्रभागा नदी में जा गिरा। इस तरह की प्राकृतिक आपदाओं के पीछे के कारणों की तह तक जाने के लिए केंद्रीय जल आयोग के वैज्ञानिक लाहौल पहुंच रहे हैं। जबकि, डीआरडीओ के डिफेंस जियोइंफॉर्मेटिक्स रिसर्च इस्टैब्लिशमेंट (डीजीआरई) के वैज्ञानिकों की टीम पहाड़ दरकने के कारणों को जानने के लिए शुक्रवार को ही लाहौल पहुंच गई है। ये वैज्ञानिक जियोइंफोर्मेटिक्स उपकरणों की मदद से इलाके की टोपोग्राफी और अन्य भू-गर्वीय पहलुओं पर रिसर्च करेंगे।

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इस अध्ययन की मदद से भविष्य में आने वाली प्राकृतिक विपदा को पहले की जान सकेंगे। विशेषज्ञ वैज्ञानिकों की टीम लाहौल के अलावा किन्नौर, मंडी और चंबा में भी इस तरह के अध्ययन करेगी। प्रदेश के मुख्य सचिव राम सुभग सिंह ने कहा कि वैज्ञानिक चंद्रभागा नदी के तट से लगते कई किलोमीटर तक फैली पीरपंजाल रेंज के साथ ग्रेटर हिमालय के पहाड़ों पर भी अध्ययन करेंगे। वैज्ञानिक भू-गर्वीय हलचल की जानकारी हासिल करेंगे। वहीं, केंद्रीय जल आयोग के वैज्ञानिक चंद्रभागा नदी के बहाव से पहाड़ों की तलहटी पर पड़ने वाले प्रभाव के साथ नदी में पिछले कई सालों के पानी के स्तर का तुलनात्मक अध्ययन करेंगे।  

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