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प्राइवेट स्कूलों पर नेता, मंत्री सब मेहरबान

Thu, 27 Nov 2014 12:05 PM IST
Updated Thu, 27 Nov 2014 12:05 PM IST
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lack of infrastructure in private schools.

जी हां प्राइवेट स्कूलों पर नेता, मंत्री सब मेहरबान हैं। सरकार की नाक के नीचे शिक्षा के नाम पर कब तक दुकानदारी चलती रहेगी। शिक्षा विभाग की ओर से तय मानक स्कूल पूरा क्यों नहीं कर रहे हैं। हर घटना के बाद अभिभावकों के जेहन में यही सवाल उठते रहे हैं। अधिकारी प्राइवेट स्कूलों में शिक्षा विभाग के आधे मापदंड भी पूरा नहीं होने की बात स्वीकार करते हैं।

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नियमों की अनदेखी करने वाले सभी प्राइवेट स्कूलों के कार्यक्रमों में हर साल नेता दरयादिली से शिरकत करते रहे हैं। छोटे से रोहड़ू उपमंडल में करीब चार दर्जन प्राइवेट स्कूल चल रहे हैं। रोहड़ू कस्बे में ही ढेड़ दर्जन के करीब प्राइवेट स्कूल हैं। कई स्कूलों में बच्चों के लिए खेल के मैदान नहीं है। अधिकांश स्कूलों में स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा के कोई पुख्ता प्रबंध नहीं है।
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फीस के नाम पर हो रही खूब वसूली

lack of infrastructure in private schools.

यहां पर चारदीवारी, डंगे ही नहीं हैं। सुरक्षा की एनओसी दमकल विभाग देता है। भू गर्भ वैज्ञानिक शिमला जिले को पहले ही भूकंप संभावित जोन मानते हैं। स्कूल प्रबंधन ने आबादी क्षेत्र में मानकों को किनारे करके कई मंजिला भवन खड़े किए है। इन स्कूलों में बच्चों की संख्या सैकड़ों है। गुणकारी व आधुनिक शिक्षा के नाम पर अभिभावकों से फीस के नाम पर खूब वसूली होती है।

अन्य गतिविधियों के लिए अलग से चंदा लिया जाता है। आबादी क्षेत्र में स्कूल के कई मंजिला भवन बनाने की सरकार से कैसे अनुमति मिली। इसके चलत शिक्षा विभाग के मानकों को पूरा न करने वाले स्कूलों के कार्यक्रम में विधायक, सांसद व मुख्यमंत्री तक की उपस्थिती रहती है।

दस दिनों में रिपोर्ट सौंपेगी कमेटी

lack of infrastructure in private schools.

प्रशासन के साथ बैठक के दौरान मंगलवार को ऐसे सवाल अभिभावकों की ओर से उठाए गए। इस पर गहन चर्चा हुई। सक्रिय समाजसेवी गोवर्धन चौहान ने कार्रवाई न होने पर न्यायालय में जाने की चेतावनी दी है। करास उकली महेंदली पंचायत के लोगों ने भी यह मामला प्रमुखता से प्रशासन को सौंपे ज्ञापन में उठाया है।

खंड प्राथमिक शिक्षा अधिकारी जेके मांटा मान चुके है कि कोई प्राइवेट स्कूल शिक्षा विभाग के मानदंडों को पूरा नहीं कर रहे हैं, लेकिन वह कार्रवाई के लिए अधिकृत नहीं है। एसडीएम वाईपीएस वर्मा का कहना है कि स्कूलों की जांच के लिए तहसीलदार की अध्यक्षता में एक कमेटी का गठन किया गया है। दस दिनों में कमेटी को रिपोर्ट सौंपने के लिए कहा गया है। रिपोर्ट मिलने के बाद इस पर जरूरी कार्रवाई होगी।

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