Shimla News: मजदूर और किसान 25 से 27 नवंबर तक शिमला में बोलेंगे हल्ला
राजधानी शिमला में हल्ला बोलेंगे। मजदूर संगठन सीटू और किसान सभा के बैनर तले तीन दिन तक राज्य सचिवालय के बाहर प्रदर्शन किया जाएगा।
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केंद्र और प्रदेश सरकार की नीतियों के खिलाफ 25 से 27 नवंबर तक मजदूर और किसान राजधानी शिमला में हल्ला बोलेंगे। मजदूर संगठन सीटू और किसान सभा के बैनर तले तीन दिन तक राज्य सचिवालय के बाहर प्रदर्शन किया जाएगा। सीटू के अध्यक्ष विजेंद्र मेहरा ने बताया कि 44 श्रम कानूनों को खत्म कर बनाई गई मजदूर विरोधी चार श्रम संहिताओं को रद्द करने की मांग उठाई जाएगी। किसानों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य की सुविधा मांगी जाएगी। किसानों के कर्ज माफ करने और स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को लागू करने के लिए आवाज बुलंद की जाएगी। न्यूनतम वेतन को 26 हजार रुपये तय करने, केंद्र और राज्य में एक समान वेतन लागू करने, बिजली विधेयक 2022 को वापस लेने की मांग की जाएगी। आंगनबाड़ी, मिड डे मील, आशा और अन्य योजना कर्मियों को सरकारी कर्मी घोषित करने, नई शिक्षा नीति को वापस लेने, नौकरी से निकाले गए कोविड कर्मियों को वापस लेने और महंगाई पर रोक लगाने की मांग भी उठाई जाएगी।
इस दौरान कार्यकर्ताओं को नियमित करने और हरियाणा की तर्ज पर वेतन देने की मांग उठाई जाएगी। प्री प्राइमरी शिक्षकों की भर्ती में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को प्राथमिकता देने की मांग को भी जोरशोर से उठाया जाएगा। सूबे के 18 हजार आंगनबाड़ी केंद्रों में 36 हजार आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और मिनी कार्यकर्ता कार्यरत हैं। मेहरा ने कहा कि प्रदेश के उद्योगों में युवाओं को 80 फीसदी रोजगार सुनिश्चित होना चाहिए। सभी मजदूरों को ईपीएफ, ईएसआई, ग्रेच्युटी, नियमित रोजगार देने, पेंशन व दुर्घटना लाभ देने सहित सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाने की मांग उठाई जाएगी। विजेंद्र मेहरा ने बताया कि 25 से 27 नवंबर तक शिमला में किसानों और मजदूरों का महापड़ाव होगा।