'बेटी बचाओ' अभियान में सबके लिए मिसाल बना कुल्लू जिला
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भले ही 2011 की जनगणना के आधार पर कुल्लू जिला का लिंग अनुपात संतोषजनक न होकर प्रति एक हजार पुरुष के पीछे 962 महिलाएं हैं। लेकिन स्वास्थ्य विभाग के ताजा सर्वे में इन आंकड़ों में और बेहतर सुधार होने के संकेत हैं।
देश के कई राज्यों का लिंग अनुपात अभी भी काफी निराशाजनक है और इसको बेहतर करने के लिए केंद्र व प्रदेश की सरकारों द्वारा ...बेटी है अनमोल एवं बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ जैसे कार्यक्रमों का आयोजन कर लोगों को कन्या भ्रूण हत्या न करने तथा बेटी को अपनाने को लेकर जागरूक किया जा रहा है।
इस दौरान कुल्लू जिला में स्वास्थ्य विभाग द्वारा शून्य से छह साल की आयु वर्ग के लड़कों व लड़कियों के किए गए सर्वेे में जिला का लिंग अनुपात सराहनीय रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक जिला कुल्लू ने मिसाल कायम करते एक हजार लड़कों के पीछे 1001 हजार लड़कियां का आंकड़ा पहुंच गया है।
निरमंड बना सबसे अव्वल
स्वास्थ्य विभाग की आशा वर्करों द्वारा किए गए इस सर्वे में जिला के बाह्य सराज निरमंड का लिंग अनुपात सबसे अव्वल आंका गया है। यहां एक हजार लड़कों के मुकाबले बच्चियों की संख्या 1020 आंकी गई है।
इसी प्रकार कुल्लू का नग्गर खंड में यहां आंकड़ा प्रति एक हजार लड़कों की एवज में 1017 रहा है। इसी प्रकार आनी खंड में 974, जरी खंड में 1002 तथा बंजार खंड में 983 प्रति एक हजार लड़कों के पीछे आंका है।
दिसंबर 2015 को हुए सर्वे रिपोर्ट की पुष्टि कुल्लू अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. वाईडी शर्मा ने की है। शून्य से छह साल के बच्चों के इस शानदार लिंग अनुपात को जिला के ओवर ऑल लिंग अनुपात के लिए एक अच्छा संकेत माना जा रहा है।
संस्कृति, शिक्षा व जागरूकता की भूमिका भी अहम
सीएमओ कुल्लू डॉ. वाईडी शर्मा ने जिला कुल्लू में शून्य से छह साल आयु के बच्चों के शानदार लिंग अनुपात को जिला कुल्लू की संस्कृति, शिक्षित समाज व लोगों की सकारात्मक सोच और जागरूकता का कारण बताया है।
उन्होंने कहा कि जिला के निजी क्षेत्र में चल रही अल्ट्रासाउंड मशीनों तथा उनके रिकार्ड की चेकिंग करना भी एक अहम कदम है। स्वास्थ्य विभाग इस पर कड़ी नजर रखे हुए है।