किशाऊ बांध क्षेत्र में कौड़ियों के भाव खरीद ली जमीन
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हिमाचल-उत्तराखंड सीमा पर प्रस्तावित 650 मेगावाट के किशाऊ बांध प्रोजेक्ट का काम शुरू होने से पहले ही क्षेत्र में जमीनों की खरीद फरोख्त शुरू हो गई है। भू- माफिया इलाके में सक्रिय हो गया है। परियोजना क्षेत्र में आने वाली शिलाई तहसील की बाली कोटी पंचायत में पिछले एक महीने में ही 33 भू-सौदे हो चुके हैं। कई बीघा जमीन के सौदे अंतिम स्टेज पर हैं। किसानों से कौड़ियों के भाव जमीन खरीदी जा रही है, ताकि प्रोजेक्ट का काम आरंभ होने पर इस जमीन की मोटी रकम ली जा सके।
भूमि सौदों में बिचौलिए भी जेबें भरने में लग गए हैं। सूत्रों की मानें तो बाहरी राज्यों के लोग भी बेनामी सौदे कर रहे हैं। बाली कोटी पंचायत के मौजा चामरा मोहराड़ के गांव खैराड़ी, चम्याह, कुशराड़ा आदि क्षेत्र में माफिया सबसे अधिक सक्रिय है। गौर हो कि रेणुका बांध परियोजना के निर्माण से पहले भी इसी तरह के भूमि सौदों बात सामने आई थी, जिसकी विजिलेंस ब्यूरो जांच कर रहा है।
नहीं खरीद पाएंगे भूमिहीनों के पट्टे
परियोजना क्षेत्र में पूर्व में प्रदेश सरकार ने भूमिहीनों को 5-5 बीघा के पट्टे दिए थे। सरकार ने इसमें शर्त लगा रखी है कि इन पट्टों को आगे किसी को नहीं बेचा जा सकता है। ऐसे में भू माफिया चाहकर भी इन पट्टों को नहीं हथिया पा रहा है। लेकिन इससे सटी जमीन को धड़ाधड़ खरीदा जा रहा है।
चार गुना अधिक दाम मिलेंगे- प्रदेश सरकार ने भूमि अधिग्रहण पर मार्केट रेट से चार गुना अधिक मुआवजा देने की तैयारी कर ली है। ऐसे में जिन किसानों को इसकी जानकारी नहीं है उन्हें भू माफिया अपने जाल में फंसा रहा है। बताया जाता है कि भू माफिया ने गरीब परिवारों की पूरी लिस्ट तैयार की हुई है।
नाहन के ग्राम राजस्व अधिकारी दिनेश शर्माने बताया कि सरकारी नियम एवं शर्तों के अनुसार भूमिहीनों के पट्टे बेचे नहीं जा सकते हैं। फिलहाल उसका कोई मामला सामने नहीं आया है। परियोजना क्षेत्र की अन्य जमीन की खरीद फरोख्त की जा रही है। अभी तक 33 रजिस्ट्रियां हो चुकी हैं। विभाग अपने स्तर पर ऐसे मामलों पर नजर रख रहा है।