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Kiratpur Manali Fourlane: तरक्की के लिए फोरलेन तो बन रहे पर पहाड़ हुए खोखले, मच रही तबाही

Sun, 16 Jul 2023 10:32 AM IST
Krishan Singh संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर Published by: Krishan Singh Updated Sun, 16 Jul 2023 10:32 AM IST
सार

प्रदेश को विकास की दौड़ में शामिल करने के लिए किरतपुर-मनाली हाईवे तो मिला लेकिन निर्माण के लिए प्रकृति से हुई छेड़छाड़ का मुआवजा लोगों को अपना सब कुछ गंवाकर भरना पड़ रहा है। 

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Kiratpur Manali fourlane modern development is hollowing the mountains
फोरलेन के लिए की गई कटिंग व अवैध डंपिंग। - फोटो : संवाद

विस्तार

हिमाचल प्रदेश को विकास की दौड़ में शामिल करने के लिए किरतपुर-मनाली हाईवे तो मिला लेकिन निर्माण के लिए प्रकृति से हुई छेड़छाड़ का मुआवजा लोगों को अपना सब कुछ गंवाकर भरना पड़ रहा है। हाल ही में प्रदेश में पहली ही बरसात में हुई तबाही इसका पुख्ता सबूत है। इस फोरलेन के निर्माण के लिए पहाड़ों का 90 डिग्री पर बेतरतीब कटान, खुली ब्लास्टिंग, अवैध डंपिंग, बेइंतहा माइनिंग ने पहाड़ों को तो खोखला किया ही, साथ ही नदी-नालों के रास्ते भी बंद कर दिए हैं। इस परियोजना के निर्माण के लिए लाखों टन मिट्टी पहाड़ों से निकाली गई, लेकिन उसे प्रदेश के बिलासपुर, मंडी, कुल्लू जिले के नदी-नालों और झील के किनारे डंप कर दिया।

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फोरलेन तो बनकर तैयार हो गया, लेकिन इन नदी-नालों को मक डंपिंग ने हमेशा के लिए बंद कर दिया। हालांकि, कोर्ट के आदेशों के बाद अवैध डंपिंग को हटाने की कागजी कार्रवाई तो हुई, लेकिन जमीनी हकीकत इससे बहुत अलग है। किरतपुर से मनाली तक इस फोरलेन के लिए फोरलेन और टूलेन को मिलाकर कुल 21 टनल, 30 मेजर पुलों का निर्माण किया गया है। इनके निर्माण के लिए ब्लास्टिंग हुई, पहाड़ कटे और कहीं न कहीं कच्चे पहाड़ इनके निर्माण के बाद और कमजोर हो गए हैं।
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केंद्र सरकार की अनुमति के बिना किया रोड अलाइनमेंट में बदलाव
परियोजना में बिलासपुर में ही 28.36 हेक्टेयर में बदलाव होने की पुष्टि हो चुकी है। इसे केंद्र सरकार की अनुमति के बिना ही बदल दिया गया था। वहीं, अन्य जिलों का आंकड़ा और भूमि अधिग्रहण के मूल दस्तावेज भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने आरटीआई में सूचना मांगने के बाद भी मुहैया नहीं कराए। इस वजह से यह पुष्टि नहीं हुई कि मंडी और कुल्लू में कितना बदलाव हुआ है।
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निकासी नालियां निकालीं लेकिन सभी बंद, कल्वर्ट बनाए पर मिट्टी से भरे हैं सभी
फोरलेन निर्माण के लिए जितने भी पुल बने, उनके लिए जो कॉफर डैम (दलदल को सुखाना) तैयार किए गए, वे सारे झील और नदी में बह गए। पहाड़ों को 90 डिग्री पर काटा गया, जबकि इन्हें ढलान में काटना चाहिए था। मिट्टी को खड्डों, नदियों और झीलों में डंप किया गया। निकासी नालियां निकालीं लेकिन सभी बंद हैं। कल्वर्ट बनाए लेकिन वे भी मिट्टी से भरे हैं। पानी को निकलने के लिए कहीं से जगह नहीं है। पहाड़ भारी ब्लास्टिंग से कच्चे हो गए हैं। लेकिन इस सबके लिए किसी की जवाबदेही तय नहीं है जबकि आरटीआई में इन सबकी पुष्टि हुई है। - मदन लाल शर्मा, फोरलेन विस्थापित एवं प्रभावित समिति
 

मंडी से कुल्लू तक फोरलेन के करीब 16 किलोमीटर भाग को भारी क्षति
मंडी से कुल्लू तक बने फोरलेन को बाढ़ के चलते भारी क्षति पहुंची है। यहां पर छह स्थानों पर कई किलोमीटर भाग क्षतिग्रस्त हुआ है। इसमें द्वाड़ा, टकोली, औट और इससे आगे शनिमंदिर, झलोगी, पंडोह और बाढ़ के चलते फोरलेन  बहुत अधिक क्षतिग्रस्त हुआ है। इस क्षति को पूरा करने के लिए बहुत अधिक पैसा और समय लगेगा। इस बात की जानकारी एनएचआई के परियोजना निदेशक वरूण चारी ने दी है। उन्होंने कहा कि हालांकि मार्ग को वाहनों के लिए बहाल कर दिया है, लेकिन मार्ग की क्षति को पूरा करने के लिए पहले इसके नुकसान का आकलन किया जाएगा। बाद में इसकी बहाली के लिए बैठकों में कई निर्णय लिए जाएंगे।

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