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Shimla News: कड़ाके की ठंड में गरमाहट भर रही किन्नौर की शॉल
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गेयटी
में चल रही प्रदर्शनी में दरबार वर्क के शॉल भी बनीं महिलाओं के आकर्षण का केंद्र
एक हजार से 15 हजार रुपये तक हैं शॉल की कीमत
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। राजधानी के ऐतिहासिक गेयटी थियेटर के टेवरन हॉल में चल रही ऊनी (वूलन) उत्पादों की प्रदर्शनी में दरबार वर्क वाली शॉल महिलाओं को आकर्षित कर रही हैं। शिमला की कड़ाके की ठंड में किन्नौर की विशेष पट्टीदार शॉल और सेमी वूल शॉल की नरमी भी सैलानियों तथा स्थानीय लोगों को खूब पसंद आ रही है।
प्रदर्शनी में इन शॉल का मूल्य एक हजार से 15 हजार रुपये तक रखा गया है। दरबार वर्क के शॉल मुगल काल से प्रेरित है। इनमें शाही अंदाज की कढ़ाई वाली कश्मीरी पश्मीना और ऊन से बनाए शॉल शामिल हैं। इस शॉल में बारीक जरी, पश्मीना धागों से पत्ती, फूल और बेल-बूटेदार डिजाइन बने हैं जो अपनी भव्यता और गर्माहट के लिए मशहूर हैं। यह शॉल प्राचीनकाल में दरबारों में पहने जाते थे।
प्रदर्शनी के प्रबंधक भागचंद ने बताया कि कुल्लू में यह शॉल कटलूम (बुनाई की मशीन) में बनाए जाते हैं। यह शॉल पश्मीना, जरी और लैम वूल से चार से पांच दिन में बनाकर तैयार होती हैं। उन्होंने बताया कि कुल्लू में इसकी वर्कशॉप है जहां 21 महिलाएं और 19 पुरुष काम करते हैं। प्रदर्शनी में प्रदर्शित दरबार वर्क के शॉल 15000 रुपये, स्टाल 2500, सेमीवूल शॉल 1000 से 1500 रुपये और किन्नौरी शॉल 12,500 रुपये तक बिक रही है।
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में चल रही प्रदर्शनी में दरबार वर्क के शॉल भी बनीं महिलाओं के आकर्षण का केंद्र
एक हजार से 15 हजार रुपये तक हैं शॉल की कीमत
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। राजधानी के ऐतिहासिक गेयटी थियेटर के टेवरन हॉल में चल रही ऊनी (वूलन) उत्पादों की प्रदर्शनी में दरबार वर्क वाली शॉल महिलाओं को आकर्षित कर रही हैं। शिमला की कड़ाके की ठंड में किन्नौर की विशेष पट्टीदार शॉल और सेमी वूल शॉल की नरमी भी सैलानियों तथा स्थानीय लोगों को खूब पसंद आ रही है।
प्रदर्शनी में इन शॉल का मूल्य एक हजार से 15 हजार रुपये तक रखा गया है। दरबार वर्क के शॉल मुगल काल से प्रेरित है। इनमें शाही अंदाज की कढ़ाई वाली कश्मीरी पश्मीना और ऊन से बनाए शॉल शामिल हैं। इस शॉल में बारीक जरी, पश्मीना धागों से पत्ती, फूल और बेल-बूटेदार डिजाइन बने हैं जो अपनी भव्यता और गर्माहट के लिए मशहूर हैं। यह शॉल प्राचीनकाल में दरबारों में पहने जाते थे।
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प्रदर्शनी के प्रबंधक भागचंद ने बताया कि कुल्लू में यह शॉल कटलूम (बुनाई की मशीन) में बनाए जाते हैं। यह शॉल पश्मीना, जरी और लैम वूल से चार से पांच दिन में बनाकर तैयार होती हैं। उन्होंने बताया कि कुल्लू में इसकी वर्कशॉप है जहां 21 महिलाएं और 19 पुरुष काम करते हैं। प्रदर्शनी में प्रदर्शित दरबार वर्क के शॉल 15000 रुपये, स्टाल 2500, सेमीवूल शॉल 1000 से 1500 रुपये और किन्नौरी शॉल 12,500 रुपये तक बिक रही है।
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