Himachal News: 4,300 की बोली रद्द कर 5,800 में खरीदी प्रूनिंग कैंची, जांच के आदेश; गड़बड़झाले की आशंका
किन्नौर के कल्पा ब्लॉक में वाटरशेड योजना के तहत प्रूनिंग कैंची खरीद विवादों में घिर गई है। आरोप है कि 4,300 रुपये की सबसे कम बोली रद्द कर 5,800 रुपये प्रति कैंची की खरीद को मंजूरी दी गई। शिकायत मिलने के बाद पंचायतीराज विभाग ने जांच शुरू कर दी है। वहीं, चिड़गांव ब्लॉक में इसी मॉडल की कैंची लगभग 5,000 रुपये में खरीदे जाने से खरीद प्रक्रिया पर सवाल और गहरे हो गए हैं।
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केंद्र सरकार की वाटरशेड स्कीम में किसानों और बागवानों के लिए हिमाचल में प्रूनिंग कैंचियों की खरीद प्रक्रिया विवादों में घिर गई है। किन्नौर के कल्पा विकास खंड में कैंची खरीद में गड़बड़झाले की आशंका है। यहां पहले 4,300 रुपये प्रति कैंची की न्यूनतम बोली लगी तो उस टेंडर को रद्द कर दिया गया और बाद में नई टेंडर प्रक्रिया अपनाकर करीब 5,800 रुपये प्रति कैंची की दर को खरीद को मंजूरी दे दी गई। यह मंजूरी करीब 480 कैंचियों की है। इस संबंध में विभाग के पास शिकायत पहुंची है। पंचायतीराज विभाग ने इस पर जांच के निर्देश जारी किए हैं। वहीं, कुछ साल पहले भी कैंची खरीद घोटाला सामने आया था।
स्विट्जरलैंड में निर्मित इस प्रूनिंग कैंची का नाम फेल्को-7 है। यह खरीद किन्नौर की कोठी और शिमला के चिड़गांव ब्लॉक की कई पंचायतों में हुई है। कोठी की एक शिकायत तो विभाग को भी पहुंची है। यहां दिसंबर 2025 में टेंडर आमंत्रित किया गया। टेंडर खुलने पर सबसे कम 4,300 रुपये प्रति कैंची की बोली प्राप्त हुई लेकिन इस प्रक्रिया को अचानक रद्द किया गया। इसके बाद बीडीओ कार्यालय ने टेंडर फ्लोट कर निविदाएं मांगी। इसमें सबसे कम दर 5,800 रुपये को मंजूरी दी गई।
पंचायत सचिव एवं खरीद समिति के सदस्य परविंद्र ने कहा कि आशंका थी कि कम कीमत पर घटिया गुणवत्ता की कैंची आपूर्ति की जा सकती है। इसलिए टेंडर रद्द किया गया। बाद में बाजार भाव बढ़ने के कारण करीब 5,800 रुपये की दर को मंजूरी दी गई। उपप्रधान दयाल सिंह नेगी ने बीडीओ कार्यालय को शिकायत देकर खरीद प्रक्रिया में अनियमितताओं के आरोप लगाए हैं।