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साहित्यकारों ने संवेदनशील मुद्दों के तार छेड़ लिटफेस्ट में बटोरीं सुर्खियां

Mon, 14 Oct 2019 10:25 AM IST
अरविन्द ठाकुर राकेश शर्मा, अमर उजाला, सोलन
राकेश शर्मा, अमर उजाला, सोलन Published by: अरविन्द ठाकुर Updated Mon, 14 Oct 2019 10:25 AM IST
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khushwant singh literature festival kasauli discussion over article 370
- फोटो : अमर उजाला

देशभर के नामी साहित्यकारों ने कसौली में खुशवंत सिंह लिटफेस्ट में संवेदनशील मुद्दों के तार छेड़कर खूब सुर्खियां बटोरीं। विवादित बयानबाजी को लेकर चर्चा में रहा लिटफेस्ट का आठवां अध्याय रविवार को पूरा हो गया।

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तीन दिन तक कई मसलों पर मंथन के बीच सबसे ज्यादा सुर्खियां अनुच्छेद-370 के नाम रहीं। साहित्यकारों के तर्कों का व्यापक असर दिखा तो हिंदूवादी संगठनों ने चर्चा का खूब विरोध किया।
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लिटफेस्ट में पाकिस्तान के कलाकारों के न आने का दर्द झलका, तो कारगिल विजय जैसे अहम युद्ध में महावीर चक्र विजेता कर्नल सोनम वांगचुक ने देश प्रेम का जज्बा भी जगाए रखा।
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लिटफेस्ट शुरू होने से पूर्व बजट की कमी को लेकर चर्चा हुई थी। इसमें हिमाचल सरकार से पांच लाख न मिलने से आयोजक नाराज थे, लेकिन लिटफेस्ट शुरू होने के बाद पहुंचे वार्ताकारों के तीखे हमलों के बाद हिमाचल सरकार और लिटफेस्ट आयोजकों के बीच पांच लाख पर सहमति की बात खटाई में पड़ गई है।

khushwant singh literature festival kasauli discussion over article 370

लिटफेस्ट के दौरान साहित्यकारों ने कई संवेदनशील मसलों पर अपनी राय दी। साहित्यकार सादिया देलवी के विवादित बयान जिसमें उन्होंने खुशवंत सिंह को बाबरी मस्जिद के लिए चेक देने की पेशकश का खुलासा किया था, को लेकर लिटफेस्ट के आयोजन स्थल के बाहर खूब हंगामा भी हुआ।

इस बार गुलशन ग्रोवर और जावेद अख्तर के आने की चर्चा थी, लेकिन ऐन मौके पर वे नहीं आए। लिटफेस्ट से आयोजकों के उत्साह में कोई कमी नहीं आई है। खुशवंत सिंह के बेटे राहुल सिंह का कहना है कि लिटफेस्ट का नौवां अध्याय भी कसौली में जरूर पूरा होगा।

कसौली में नौवां लिटफेस्ट नहीं होने देंगे : रश्मिधर

khushwant singh literature festival kasauli discussion over article 370

खुशवंत सिंह लिटफेस्ट में अनुच्छेद-370 जैसे संवेदनशील मसले पर चर्चा से भाजपा नाराज हो गई है। पूर्व सांसद वीरेंद्र कश्यप ने कहा कि अनुच्छेद-370 का विरोध करने वाले उसी गैंग का हिस्सा हैं, जो पूर्व में देश के टुकड़े करने की बात करते आए हैं।

पत्रकारों से बातचीत में पूर्व सांसद ने कहा कि लिटफेस्ट में साहित्यकारों ने केंद्र सरकार को कश्मीरियों से माफी मांगने की बात कही है। देश विरोधी ताकतों को मजबूत करने और अशांति फैलाने का काम किया है।

जिसे सहन नहीं किया जा सकता है। भाजपा महिला मोर्चा पदाधिकारी रश्मिधर सूद ने कहा कि दोनों पक्ष के लोगों को चर्चा के लिए बुलाया जाना चाहिए था। अनुच्छेद-370 पर चर्चा के दौरान कसौली में एक ही पक्ष के लोग मंच पर थे।

खुशवंत सिंह लिटफेस्ट में अनुच्छेद-370 हटाने का स्वागत करने वालों को बुलाया जाना चाहिए था। कश्मीरी पंडितों पर कभी चर्चा नहीं की जाती है। नौवें लिटफेस्ट का भाजपा महिला मोर्चा विरोध करेगा।

मनीषा कोइराला ने बयां की कैंसर से जूझने की घटना

लिटफेस्ट के आखिरी दिन रविवार को दो अभिनेत्रियों ने मंच साझा किया और खुलकर महिलाओं से जुड़े अहम विषयों पर चर्चा की। लिटफेस्ट का तीसरा दिन सादगी व संवेदनाओं से भरा रहा। सत्र की शुरुआत में मशहूर फिल्म अभिनेत्री मनीषा कोइराला ने उन दिनों को याद किया जब वह कैंसर से जूझ रही थीं। जब पता चला कैंसर हुआ तो एक पल के लिए दुनिया खत्म हो गई।

कीमो थैरेपी के पहले सेशन में उन्हें लगा या तो बच जाऊंगी या फिर मर जाऊंगी। उन्होंने चर्चा के दौरान बताया कि आपका शरीर आपको साइन देता कि आपकी बॉडी में कुछ हो रहा है लेकिन हम समझ नहीं पाते। उन्होंने उस एक एक पल का जिक्र किया जिसे उन्होंने अपनी जिंदगी के सबसे कठिन दिनों में झेला। उन्होंने इन पलों को अपनी किताब ‘द हीरोइन हू हिल्ड’ (हाउ कैंसर गेव मी ए न्यू लाइफ) में अंकित किया है।

इसके बाद फिल्मी जगत की सदाबहार अभिनेत्री शबाना आजमी, सुदीप सैन और सैफ महमूद के बीच ए ट्राइंफ ऑफ गुड ओवर एविल पर चर्चा हुई। चर्चा शबाना आजमी के पिता कैफी आजमी के जन्म के 100 वर्ष होने पर उनकी नजमों पर आधारित किताबों एवं कविताओं पर आधारित रहा।

सबसे अधिक चर्चा उनके द्वारा लिखी कविता औरत पर हुई। विशेषकर (उठ मेरी जान, मेरे साथ चलना है तुझे) पर चर्चा हुई कि कैसे कैफी आजमी ने महिला की दिनचर्या को इसमें दर्शाया और उन्हें पुरुषों की तरह काम करने के लिए प्रेरित किया। 

बाबरी मस्जिद विध्वंस पर लिखी कैफ़ी आजमी की कविता की स्मृतियों को याद करते हुए शबाना आजमी ने ‘राम को फिर से बनवास’ भी पढ़कर सुनाई। इस कविता में कैफी आजमी ने 6 दिसंबर को बाबरी मस्जिद को तोड़े जाने के दौरान की घटना का वर्णन किया है। शबाना आजमी ने कहा कि लोगों ने बाबरी मस्जिद को नहीं तोड़ा बल्कि राम के चरित्र को तोड़ा। राम भगवान प्रेम का प्रतीक थे।

इस कविता के माध्यम से उन्होंने बताया कि कभी किसी धर्म के धार्मिक स्थल को गिराकर किसी को 6 दिसंबर 1992 में दोबारा बनवास पर भेज दिया। भगवान राम ने जरूर सोचा होगा 6 दिसंबर में मेरे प्रति लोगों में इतनी दिवानगी कैसे आ गई। अंत में खुशवंत सिंह के बेटे ने सभी का धन्यवाद करते हुए कहा कि खुशवंत सिंह  लोगों के दिलों में हमेशा जिंदा रहेंगे।

लेखक अपने तक रहे सीमित : शबाना आजमी
सदी की अभिनेत्री शबाना आजमी ने कसौली क्लब में मीडिया से अनौपचारिक बात की। हालांकि उन्होंने अपने मीडिया जगत एवं कैफी आजमी की नजमों के अलावा किसी अन्य विषय पर बात नहीं की। लेकिन उन्होंने इतना जरूर कहा कि आज के लेखकों एवं पुराने जमाने के लेखकों में बहुत फर्क हैं। आज कोई पढ़ना ही नहीं चाहता, जो दुखद है।

उन्होंने कहा कि उस जमाने के लेखकों में दूरगामी सोच की लेखकी थी, उससे समाज में बदलाव आता था। लेकिन आज की लेखनी सिर्फ अपने आप तक ही सीमित है। अगले वर्ष फिर मिलने के साथ विदा हुए साहित्यकार आठवां लिटफेस्ट खुशवंत सिंह की याद के साथ समाप्त हो गया।

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