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कर्मठ थे पराधीनता में हम, पाकर स्वतंत्रता क्यों कर्महीन...
ब्यूरो/अमर उजाला, सोलन
Updated Tue, 01 Jul 2014 02:54 PM IST
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भाषा संस्कृति एवं कला विभाग सोलन तथा साहित्यिक संगम सोलन के संयुक्त तत्वावधान में स्टेट बैंक पटियाला और सरस्वती साहित्य एवं कला मंच के सहयोग से बहुभाषी कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया।
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सम्मेलन के मुख्य अतिथि सहायक आयुक्त सुभाष सकलानी रहे। अध्यक्षता राष्ट्रपति से सम्मानित प्रो. केशव शर्मा ने की। समाज सेवक स्वाधीन चंद्र गौड़ विशेष अतिथि के तौर पर मौजूद रहे।
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सम्मेलन में डा. मुरली पांडे्य और पंडित अमर शुक्ल विशेष रूप से पधारे। जिला भाषाधिकारी भीम सिंह चौहान ने पारंपरिक अभिनंदन किया। इस दौरान लचर व्यवस्था व लुप्त होती श्रेष्ठ संस्कृति पर अपने-अपने अंदाज में व्याख्यान किया गया।
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भौतिक विकास पर डा. हेमराज कौशिक ने कड़ा प्रहार करते हुए चेताया, ‘पोखर और बावड़ियां हो गई लुप्त, दैत्याकार मशीनों को है अंबार, कैसा है यह भौतिक विका, जहां प्रकृति और मानवता का है विनाश।’
डा. प्रेम लाल गौतम ने भौतिकता की दौड़ में सहजता पीछे छूट की बात कहते हुए कहा कि ‘हरदम बहलाता था मुझको, वह अल्हड़पन का मीत गया।’
डा. शंकर वासिष्ठ ने पराधीनता व स्वाधीनता की कर्मठता व अकर्तव्यता पर प्रहार करते हुए चिंतन की आवश्यकता पर बल दिया कहा ‘कर्मठ थे पराधीनता में हम, पाकर स्वतंत्रता क्यों कर्महीन, राष्ट्रहित करें आत्मविश्लेषण संप्रदाय जाति व भाषा विहीन।’ इसी तरह कई कवियों ने अपने विचार रखे।
इसके अतिरिक्त कौमुदी ढल, बक्शी जसवाल, राकेश पंत, मदन हिमाचली, संजीव कुमार, राजन तनवर, किशोरी लाल कौंडल, हरदेव, रामप्रकाश, पदमदेव, हेमंत अत्री, केउी प्रेमी, प्रकाश, सुमन ने भी अपनी रचनाएं प्रस्तुत की।