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कारगिल विजय दिवस 2021: पापा शादी की तारीख तय कर लेना, घुसपैठ को निपटा जून में आऊंगा घर
Mon, 26 Jul 2021 12:07 PM IST
अरविन्द ठाकुर
अमन वर्मा, अमर उजाला नेटवर्क, ऊना
अमन वर्मा, अमर उजाला नेटवर्क, ऊना
Published by: अरविन्द ठाकुर
Updated Mon, 26 Jul 2021 12:07 PM IST
सार
कैप्टन अमोल कालिया ने 1995 में आईएमए कमीशन प्राप्त करने के उपरांत सेना की 12 जैकली में प्रभार संभाला। उनकी ड्यूटी ज्यादातर सियाचिन ग्लेश्यिर, कारगिल, द्रास और लेह में रही।
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कारगिल शहीद कैप्टन अमोल कालिया
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
पापा मैं जून के अंत तक घर आऊंगा, आप शादी की तारीख तय कर लेना। यहां सब ठीक है। बस दूसरी तरफ से घुसपैठ चल रही है, उसे जल्द निपटा लेंगे। कारगिल शहीद कैप्टन अमोल कालिया ने अपने पिता सतपाल कालिया से बातचीत के दौरान यह अंतिम शब्द कहे थे। कारगिल से एक जून को अमोल कालिया का खत नौ जून को घर पहुंचा था। इसी दिन उन्होंने दुश्मनों से लोहा लेते हुए शहादत का जाम पी लिया।
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चौकी नंबर 5203 पर तिरंगा लहराने के बाद नौ जून, 1999 को शहीद होने वाले कैप्टन अमोल कालिया पर आज भी उनके परिजन नाज करते हैं। उनका जन्म 26 फरवरी, 1978 को नंगल में हुआ था। जमा दो तक शिक्षा के उपरांत 1991 में उनका चयन एनडीए के लिए हुआ। कालिया चिंतपूर्णी के रहने वाले थे। 1995 में आईएमए कमीशन प्राप्त करने के उपरांत सेना की 12 जैकली में प्रभार संभाला। उनकी ड्यूटी ज्यादातर सियाचिन ग्लेश्यिर, कारगिल, द्रास और लेह में रही।
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कैप्टन अमोल कालिया को मरणोपरांत वीर चक्र से सम्मानित किया गया था। आज कैप्टन अमोल कालिया के माता-पिता नंगल की शिवालिक एवेन्यू में रहते हैं। पंजाब सरकार ने नंगल-ऊना मुख्य मार्ग पर शिवालिक एवेन्यू में शहीद कैप्टन अमोल कालिया की याद में पार्क बनाया है। इसमें कैप्टन अमोल कालिया की प्रतिमा भी लगाई गई है।
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कैप्टन अमोल कालिया के पिता कहते हैं कि उन्हें हिमाचल और पंजाब सरकार से आज कोई शिकवा नहीं। हिमाचल की सरहद मैहतपुर में शहीद बेटे की याद में बने प्रवेश द्वार पर उनके बेटे कैप्टन अमोल कालिया का नाम बहुत छोटे अक्षरों में लिखा गया है। उन्होंने सरकार से मांग की है कि प्रवेश द्वार पर नाम बड़े अक्षरों में अंकित किया जाए।