Natural Farming: कैलाश चौधरी बोले- कृषि विज्ञान केंद्र अपनी भूमि पर बनाएंगे प्राकृतिक खेती के मॉडल
केंद्रीय कृषि और किसान कल्याण राज्य मंत्री कैलाश चौधरी ने नौणी विश्वविद्यालय में सेमिनार में कहा कि देश और प्रदेश में प्राकृतिक खेती खुशहाल किसान योजना को बढ़ावा देने और हर किसानों को जोड़ने के लिए यह निर्णय लिया गया है।
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देश भर के कृषि विज्ञान केंद्रों को अपनी भूमि पर प्राकृतिक खेती के मॉडल तैयार करने होंगे। इसके लिए केंद्रों को शुरूआत में 20 फीसदी भूमि पर प्राकृतिक खेती करनी होगी। केंद्र सरकार ने इसके लिए निर्देश जारी किए हैं। केंद्रीय कृषि और किसान कल्याण राज्य मंत्री कैलाश चौधरी ने नौणी विश्वविद्यालय में सेमिनार में यह जानकारी दी। उनके अनुसार देश और प्रदेश में प्राकृतिक खेती खुशहाल किसान योजना को बढ़ावा देने और हर किसानों को जोड़ने के लिए यह निर्णय लिया गया है। देश के सभी 731 कृषि विज्ञान केंद्रों को अपने परिसर में 20 फीसदी क्षेत्र में प्राकृतिक खेती का मॉडल तैयार करना होगा। इसके बाद इस मॉडल के माध्यम से किसानों को प्राकृतिक खेती के बारे में जानकारी देनी होगी।
कृषि विज्ञान केंद्रों में किसानों को जागरूक करने के लिए विभिन्न फसलों पर शोध कार्य किया जाता है। इस कड़ी में 20 प्रतिशत क्षेत्र में प्राकृतिक खेती कर इसके फायदे और तकनीक की जानकारी भी उदाहरण के साथ देनी होगी। इसमें प्राकृतिक खेती के लिए प्रयोग किए जाने वाली प्राकृतिक उर्वरक समेत अन्य तरीकों को बताना होगा। इसके लिए किसानों को समय-समय पर प्रशिक्षण शिविर भी लगाए जाएंगे। जिसमें किसानों को प्राकृतिक खेती और अन्य सतत कृषि तकनीक विषय पर जानकारी दी जाएगी। केंद्र सरकार ने देशभर में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए केंद्रीय बजट में विशेष प्रावधान भी किया है।
केंद्रीय मंत्री ने देश के पहले कीवी बाग और डीएमआर का किया दौरा
कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री कैलाश चौधरी ने नौणी विश्वविद्यालय के फल विज्ञान विभाग के कीवी, सेब के बगीचों सहित डीएमआर का दौरा भी किया। इस दौरान उनके साथ भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के महानिदेशक डॉ. त्रिलोचन महापात्र, नौणी विवि के वीसी प्रो. राजेश्वर सिंह चंदेल और डीडीजी (कृषि विस्तार) डॉ. एके सिंह भी मौजूद रहे। कीवी ब्लॉक 1985 में स्थापित देश का पहला वाणिज्यिक कीवी बाग भी है। इस दौरान एचओडी डॉ. डीपी शर्मा कीवी फल, कीट और वृक्षारोपण के आकार की जानकारी दी।
कैंसर रोगियों को मरते देख अपनाई प्राकृतिक खेती
नौणी विवि में आयोजित केवीके प्रशिक्षण शिविर में देश भर के किसानों ने भी भाग लिया। लखनऊ से आए किसान गिरजा शंकरा मौर्य ने बताया कि लखनऊ में कैंसर रोगियों सहित मरने वालों की संख्या को देखते हुए उन्होंने पांच साल पहले प्राकृतिक खेती शुरू की। पहले साल ही प्राकृतिक खेती का अच्छा परिणाम रहा। उनके साथ क्षेत्र के 200 किसान और जुड़ गए हैं। प्राकृतिक खेती से तैयार फसलों को ग्राहक खेतों से ही खरीद रहे हैं।
प्राकृतिक कृषि के क्षेत्र में प्रेरणा भूमि बने हिमाचल : आर्लेकर
प्रदेश तेजी से प्राकृतिक कृषि राज्य बनने की ओर अग्रसर है। इसलिए देवभूमि को देश के अन्य राज्यों के लिए प्रेरणा भूमि होना चाहिए, और इसे देश भर के सभी कृषि विज्ञान केंद्रों के लिए प्राकृतिक कृषि के मामले में प्रमुख केंद्र की भूमिका निभानी चाहिए। यह बात राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर ने नौणी विवि में दो दिवसीय राष्ट्रीय कृषि विज्ञान केंद्र सम्मेलन के समापन समारोह की अध्यक्षता करते हुए कही।
उन्होंने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था हमेशा से कृषि पर आधारित रही है। दुर्भाग्यवश इस अर्थव्यवस्था की दिशा विदेशी मॉडलों पर बनने लगी है। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों से इस सोच मेें परिवर्तन हो रहा है। उन्होंने कहा कि किसानों ने उन्हें अपने अनुभव बताए हैं। इस पद्धति को अपनाने से 27 प्रतिशत लागत कम आती है और लगभग 56 प्रतिशत उत्पादन ज्यादा होता है।
कार्यक्रम को वर्चुअल संबोधित करते हुए केंद्रीय मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी मंत्री पुरुषोत्तम रूपाला ने कहा कि कृषि क्षेत्र में तकनीकी विस्तार में कृषि विज्ञान केंद्रों की भूमिका अहम है। उन्होंने कहा कि नैनो टेक्नोलॉजी को किसानों तक पहुंचाने में ये केंद्र सहायक सिद्ध हो सकते हैं। ड्रोन तकनीक को भी कृषि विस्तार केंद्र के माध्यम से प्रदर्शित कर सकते हैं। जिसमें कम पानी, खाद के बारे में खेती सिखाई जाएगी।
युवाओं को कृषि से जोड़ने का लक्ष्य
केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री कैलाश चौधरी ने कहा कि कृषि को बढ़ावा देने और किसानों की आय दोगुना करने के लिए सरकार प्रभावी पग उठा रही है। उन्होंने कहा कि किसान प्राकृतिक कृषि को अपनाने के लिए उत्साहित हैं। आईसीआर के महानिदेशक डॉ. त्रिलोचन महापात्रा ने कहा कि आईसीआर किसानों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा मेें तेजी से अग्रसर है।