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Shimla News: न्यायाधीश अजय मोहन गोयल बने हाईकोर्ट विधिक सेवा समिति के चेयरमैन
Tue, 18 Apr 2023 07:41 PM IST
Krishan Singh
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
Published by: Krishan Singh
Updated Tue, 18 Apr 2023 07:41 PM IST
सार
न्यायाधीश अजय मोहन गोयल का जन्म 10 जनवरी 1969 को चंडीगढ़ में हुआ था। इनकी प्रारंभिक स्कूली शिक्षा सेंट एडवर्ड्स स्कूल शिमला से हुई। वर्ष 1989 में राजकीय कॉलेज संजौली शिमला से इन्होंने बीए (अंग्रेजी ऑनर्स) किया।
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न्यायाधीश अजय मोहन गोयल
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
न्यायाधीश अजय मोहन गोयल को हाईकोर्ट विधिक सेवा समिति का चेयरमैन नियुक्ति किया गया है। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश ने इस बारे में अधिसूचना जारी की है। न्यायाधीश अजय मोहन गोयल का जन्म 10 जनवरी 1969 को चंडीगढ़ में हुआ था। इनकी प्रारंभिक स्कूली शिक्षा सेंट एडवर्ड्स स्कूल शिमला से हुई। वर्ष 1989 में राजकीय कॉलेज संजौली शिमला से इन्होंने बीए (अंग्रेजी ऑनर्स) किया। वर्ष 1992 में हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय शिमला से विधि की पढ़ाई पूरी की और 28 सितंबर 1992 को हिमाचल प्रदेश के बार काउंसिल में वकील के रूप में नामांकित हुए। हिमाचल प्रदेश राज्य के तत्कालीन महाधिवक्ता लाला छबील दास के तत्वावधान में इन्होंने वकालत शुरू की। वर्ष 1995 से इन्होंने मुख्य रूप से हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय में स्वतंत्र वकालत शुरू की।
वकालत के प्रारंभिक वर्षों में प्रशासनिक न्यायाधिकरण, अधीनस्थ न्यायालयों और उपभोक्ता न्यायालयों में भी वकालत की। उच्च न्यायालय की ओर से इन्हें विभिन्न महत्वपूर्ण मामलों में कोर्ट मित्र नियुक्त किया गया। ये पर्यावरण, सड़क के बुनियादी ढांचे, जल विद्युत परियोजनाओं और प्लास्टिक पर प्रतिबंध आदि से संबंधित कई जनहित याचिकाओं में भी पेश हुए। इन्होंने कानून की सभी शाखाओं में अभ्यास किया। ये हिमाचल प्रदेश राज्य सहकारी बैंक और हिमाचल प्रदेश पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड के कानूनी सलाहकार थे। इसके अलावा ये नगर निगम शिमला, हिमुडा और हिमाचल प्रदेश राज्य वन निगम के लिए वकील भी रहे। इन्होंने विभिन्न सार्वजनिक और निजी कंपनियों, सहकारी समितियों, शैक्षणिक संस्थानों, बोर्डों और निगमों के मामलों की पैरवी की। 12 अप्रैल 2016 को इन्हें हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में नियुक्त किया गया।
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वकालत के प्रारंभिक वर्षों में प्रशासनिक न्यायाधिकरण, अधीनस्थ न्यायालयों और उपभोक्ता न्यायालयों में भी वकालत की। उच्च न्यायालय की ओर से इन्हें विभिन्न महत्वपूर्ण मामलों में कोर्ट मित्र नियुक्त किया गया। ये पर्यावरण, सड़क के बुनियादी ढांचे, जल विद्युत परियोजनाओं और प्लास्टिक पर प्रतिबंध आदि से संबंधित कई जनहित याचिकाओं में भी पेश हुए। इन्होंने कानून की सभी शाखाओं में अभ्यास किया। ये हिमाचल प्रदेश राज्य सहकारी बैंक और हिमाचल प्रदेश पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड के कानूनी सलाहकार थे। इसके अलावा ये नगर निगम शिमला, हिमुडा और हिमाचल प्रदेश राज्य वन निगम के लिए वकील भी रहे। इन्होंने विभिन्न सार्वजनिक और निजी कंपनियों, सहकारी समितियों, शैक्षणिक संस्थानों, बोर्डों और निगमों के मामलों की पैरवी की। 12 अप्रैल 2016 को इन्हें हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में नियुक्त किया गया।
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