{"_id":"5355dc51c6bc427f16a517df20fe1b6d","slug":"jp-nadda-urges-government-to-take-measures-for-himachal-apple-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"वाणिज्य राज्य मंत्री के सामने नड्डा ने रखी ये मांग","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
वाणिज्य राज्य मंत्री के सामने नड्डा ने रखी ये मांग
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
Updated Fri, 10 Jul 2015 12:01 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने केंद्रीय वाणिज्य राज्य मंत्री निर्मला सीतारमण से मुलाकात की। बैठक के बाद नड्डा ने कहा कि हिमाचल प्रदेश से हाल ही में उन्हें अनेक बार यह मामला उठाया गया है कि चीन के सेब पर कम आयात शुल्क होने, नेपाल और बांग्ला देश के रास्ते चीनी लहसुन की भारत में डंपिंग करने के साथ-साथ चीनी लहसुन की अवैध तस्करी ने हिमाचल में सेब और लहसुन के स्थानीय उत्पादकों को प्रभावित किया है।
विज्ञापन
उन्होंने कहा कि सेब को विशेष उत्पाद श्रेणी में शामिल करने के उपायों का पता लगाने के लिए वाणिज्य राज्य मंत्री के समक्ष मामला उठाया गया, जिससे विश्व व्यापार संगठन नियमों के ढांचे में आयात शुल्क को बढ़ाया जा सके। उन्होंने सीतारमण से यह आग्रह भी किया कि उनके मंत्रालय की ओर से लहसुन की अवैध तस्करी के मामले को गृह मंत्रालय के साथ उठाया जाना चाहिए।
विज्ञापन
सेब और लहसुन दोनों ही हिमाचल प्रदेश की अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण हैं और सेब उद्योग का राज्य के सकल घरेलू उत्पाद में लगभग छह प्रतिशत का योगदान है, जो छह जिलों में आधी से अधिक ग्रामीण आबादी की आजीविका का साधन है। उन्होंने कहा कि चीन के सेब ने घरेलू उत्पादकों को कड़ी चुनौती दी है।
विज्ञापन
ऐसा करने के लिए सेब को विशेष उत्पाद श्रेणी में शामिल करना होगा। नड्डा ने कथित तौर पर सीतारमण से कहा कि चूंकि सेब विशेष उत्पाद श्रेणी में नहीं आता है, इसलिए वाणिज्य मंत्री सेब को विशेष उत्पाद की श्रेणी में रखने के लिए कृषि मंत्रालय के साथ प्रक्त्रिस्या आरंभ कर सकते हैं।
नड्डा ने कहा कि वैकल्पिक रूप से सीमा शुल्क दर में आगामी वृद्धि के लिए डब्ल्यूटीओ के साथ बातचीत को मंत्रालय के एजेंडे में रखा जा सकता है, जिससे सामान्य रूप से भारत में तथा विशेष रूप से हिमाचल प्रदेश में लाखों घरेलू उत्पादकों के लिए सीमा शुल्क दर समान हो।