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यौन उत्पीड़न मामले में आरोपी पुलिस अफसर पर हो कार्रवाई
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जनवादी महिला समिति का सरकार से आग्रह, बोले-प्रदेश की छवि हो रही हैै दागदार
उच्च अधिकारी को तैनात करवाई जाए जांच
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। अखिल भारतीय जनवादी महिला समिति ने पुलिस अधिकारी द्वारा महिला हेड कांस्टेबल के यौन उत्पीड़न मामले में कड़ी कार्रवाई की मांग की है। समिति की सदस्यों ने कहा कि महिला कर्मचारी द्वारा एफआईआर में लगाए गए तमाम आरोपों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
समिति की राज्य अध्यक्ष रीना सिंह और राज्य सचिव फालमा चौहान ने कहा कि इस घटना से हिमाचल प्रदेश जैसे शांत और सभ्य राज्य की छवि धूमिल हुई है। पुलिस एक ऐसा विभाग है जहां महिलाएं हिंसा और उत्पीड़न की शिकायतें लेकर जाती हैं लेकिन उसी महकमे में इस तरह की घटनाएं होंगी तो फिर महिलाएं कहां जाएं? महिला कर्मचारियों के साथ इस तरह की घटनाएं होना शर्मनाक है। कहा कि इस तरह की घटनाओं से पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान खड़े होते हैं। वहीं जिस अधिकारी पर आरोप लगे हैं वह स्वयं यौन उत्पीड़न कमेटी का चेयरमैन नियुक्त किया था। ऐसे में पुलिस विभाग की कार्यप्रणाली भी सवालों के घेरे में आती है।
नाम के लिए बनी हैं यौन उत्पीड़न कमेटियां
महिला समिति की सदस्यों ने कहा कि प्रदेश में सभी विभागों में यौन उत्पीड़न कमेटियां सिर्फ नाममात्र के लिए बनाई गई हैं। इन कमेटियों के चेयरमैन ऐसे अधिकारी बनाएं जाते हैं जिनका महिलाओं की समस्याओं से कोई लेना देना नहीं होता, न ही उन कमेटियों की बैठकें होती हैं। महिला कर्मचारियों के साथ अगर किसी भी विभाग में इस तरह की घटनाएं होती हैं तो उन्हें दबाने की कोशिश की जाती है।
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उच्च अधिकारी को तैनात करवाई जाए जांच
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। अखिल भारतीय जनवादी महिला समिति ने पुलिस अधिकारी द्वारा महिला हेड कांस्टेबल के यौन उत्पीड़न मामले में कड़ी कार्रवाई की मांग की है। समिति की सदस्यों ने कहा कि महिला कर्मचारी द्वारा एफआईआर में लगाए गए तमाम आरोपों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
समिति की राज्य अध्यक्ष रीना सिंह और राज्य सचिव फालमा चौहान ने कहा कि इस घटना से हिमाचल प्रदेश जैसे शांत और सभ्य राज्य की छवि धूमिल हुई है। पुलिस एक ऐसा विभाग है जहां महिलाएं हिंसा और उत्पीड़न की शिकायतें लेकर जाती हैं लेकिन उसी महकमे में इस तरह की घटनाएं होंगी तो फिर महिलाएं कहां जाएं? महिला कर्मचारियों के साथ इस तरह की घटनाएं होना शर्मनाक है। कहा कि इस तरह की घटनाओं से पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान खड़े होते हैं। वहीं जिस अधिकारी पर आरोप लगे हैं वह स्वयं यौन उत्पीड़न कमेटी का चेयरमैन नियुक्त किया था। ऐसे में पुलिस विभाग की कार्यप्रणाली भी सवालों के घेरे में आती है।
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नाम के लिए बनी हैं यौन उत्पीड़न कमेटियां
महिला समिति की सदस्यों ने कहा कि प्रदेश में सभी विभागों में यौन उत्पीड़न कमेटियां सिर्फ नाममात्र के लिए बनाई गई हैं। इन कमेटियों के चेयरमैन ऐसे अधिकारी बनाएं जाते हैं जिनका महिलाओं की समस्याओं से कोई लेना देना नहीं होता, न ही उन कमेटियों की बैठकें होती हैं। महिला कर्मचारियों के साथ अगर किसी भी विभाग में इस तरह की घटनाएं होती हैं तो उन्हें दबाने की कोशिश की जाती है।
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