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पारिवारिक बंदोबस्त पंजीकृत कराना जरूरी नहीं: हाईकोर्ट

Thu, 29 Aug 2019 10:23 AM IST
Krishan Singh न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला Published by: Krishan Singh Updated Thu, 29 Aug 2019 10:23 AM IST
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It is not necessary to register family settlement: High Court

पारिवारिक बंदोबस्त न तो पंजीकृत करवाना जरूरी है और न किसी स्टांप पेपर पर लिखने की जरूरत है। हिमाचल हाईकोर्ट ने भूमि विवाद से जुड़े मामले में निचली अदालतों के फैसले को सही ठहराते हुए यह महत्वपूर्ण व्यवस्था दी। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि पारिवारिक बंदोबस्त यदि रजिस्टर्ड न भी हो तो भी उसमें हिस्सा लेने वाले भागीदार उसके तहत पाबंद माने जाते हैं। 

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मामले के अनुसार अपीलकर्ता रतन चंद और अन्यों ने दीवानी दावा कर प्रतिवादियों को विवादित भूमि पर किसी तरह का निर्माण करने पर पाबंदी लगाने की गुहार लगाई थी। वादियों का कहना था कि सभी पक्षकार विवादित भूमि के संयुक्त मालिक हैं और भूमि का बंटवारा नहीं किया गया है। इसके बावजूद प्रतिवादी ऋ षिकेश और अन्य ने भूमि के अव्वल हिस्से पर निर्माण कार्य शुरू कर दिया है।

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वादियों का आरोप था कि प्रतिवादियों ने ऐसा करते समय उनकी सहमति नहीं ली और कार्य करते जा रहे हैं। प्रतिवादियों का कहना था कि 13 मई, 1958 को उनके दादा ने विवादित भूमि का पारिवारिक बंदोबस्त कर दिया था।

इसलिए निचली अदालतों ने वादियों का दावा खारिज कर दिया था। वादियों ने निचली अदालत के फैसलों को हाईकोर्ट में यह कहते हुए चुनौती दी कि पार्टीशन डीड पंजीकृत न होने और उस पर कोई स्टांप न होने के कारण उसे नजरअंदाज किया जाना चाहिए।

न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान ने निचली अदालतों के फैसलों को उचित ठहराते हुए कहा कि पारिवारिक बंदोबस्त को न तो रजिस्टर्ड करने और न ही कानून के तहत उस पर किसी स्टांप ड्यूटी की जरूरत होती है।

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