शाही अंदाज में निकली माधोराय की जलेब, देवताओं के नजराने में होगी दस फीसदी वृद्धि
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रियासतकालीन राजदेवता माधोराय की अगुवाई में शाही अंदाज में निकली जलेब के साथ ही अंतरराष्ट्रीय शिवरात्रि महोत्सव का शुभारंभ शनिवार को हुआ। प्राचीन परंपरा के अनुसार दोपहर 2 बजे निकली जलेब में माधोराय की पालकी के आगे-पीछे एक दर्जन से अधिक देवी-देवताओं के रथ साथ चले। देवताओं के साथ पारंपरिक वाद्य यंत्रों ढोल-नगाड़ों और नरसिंगों की धुनों पर नाचते-गाते देवलुओं ने भी जलेब की शोभा बढ़ाई।
देव ध्वनि की गूंज से मंडी शहर भक्तिमय हो उठा। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने मंडी के आराध्य देव बाबा भूतनाथ और राजदेवता माधोराय की पूजा-अर्चना कर जलेब में शिरकत की। इसके बाद पड्डल ग्राउंड में ध्वजारोहण कर सात दिवसीय महोत्सव का शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री माधोराय मंदिर से सेरी मंच तक पैदल और सेरी मंच से पड्डल मैदान तक फिर खुली जीप में आए।
मेला कमेटी की ओर से मुख्यमंत्री और अन्य अतिथियों को पगड़ी पहनाई गई। इस बार पहली बार पगड़ी बंद कमरे के बजाय डीसी परिसर के प्रांगण में खुले में पहनाई गई। जहां गण्यमान्यों के लिए विशेष और आम लोगों के लिए पगड़ी पहनने की अलग व्यवस्था की गई है।
जलेब में जलशक्ति मंत्री महेंद्र सिंह ठाकुर, शिवरात्रि मेला कमेटी के अध्यक्ष एवं उपायुक्त ऋग्वेद ठाकुर, एडीसी आशुतोष गर्ग, नगर परिषद अध्यक्ष सुमन ठाकुर आदि मौजूद रहे। इस बार भी 216 देवी देवताओं को मेले में शिरकत करने के लिए निमंत्रण दिया गया है। मेले का समापन 28 फरवरी को राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय करेंगे।
देवताओं के नजराने और बजंतरियों के मानदेय में होगी दस फीसदी वृद्धि : सीएम
मेले के उद्घाटन समारोह की अध्यक्षता करते हुए उन्होंने शिवरात्रि में भाग लेने वाले देवताओं के नजराने में दस प्रतिशत की वृद्धि की घोषणा की। कहा कि पूर्ण राज्यत्व की स्वर्ण जयंती पर बड़ा जश्न होगा। प्रदेश इस वर्ष अपने पूर्ण राज्यत्व की स्वर्ण जयंती मना रहा है।
देवताओं के महाकुंभ में उमड़ा आस्था का सैलाब
राज देवता माधो राय की पालकी के आगे और पीछे चल रहे देव रथ। वाद्य यंत्रों की ध्वनि पर नाचते गाते देवलु। अतिथियों के सिर पर सजी रंगबिरंगी पगड़ियां। ऐसा लग रहा था कि मानो देवलोक धरती पर उतर आया है। शनिवार को महाशिवरात्रि पर्व के शुुभारंभ पर निकली जलेब में आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा। ढोल, नगाड़े, करनाल, शहनाई की देव ध्वनि से हर कोई रोमांचित हो उठा।
शनिवार को राज देवता माधोराय के दरबार से दोपहर दो बजे के बाद जलेब शुरू हुई। पारंपरिक वाद्य यंत्रों की ध्वनि पर देव रथों के साथ नाचते हुए सैकड़ों देवलु जलेब में शामिल हुए। उपायुक्त कार्यालय एवं राजदेवता माधोराय प्रांगण से लेकर पड्डल मैदान तक सड़क के दोनों तरफ उमड़ी भीड़ ने जलेब में देव आस्था का नजारा देखा। जलेब में चुनिंदा देवी-देवता शामिल होते हैं। जबकि जनपद के बड़ादेव कमरूनाग जलेब में शिरकत नहीं करते हैं।
देवलोक के नजारे के साथ वीर सपूतों के बलिदान की दिखी झलक
जलेब में देवलोक के नजारे के साथ वीर सपूतों के बलिदान की झलक और सरकारी योजनाओं के प्रति जागरूकता की अलख भी जगाई गई। सबसे पहले इंडियन आर्मी की ओर से एनसीसी विभाग ने सेना के शूरवीरों की शहादत और देशप्रेम की झलक दिखाई। उनके पीछे पूर्व सैनिक और वीरनारियां चल रहे थे।