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Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   International Kullu Dussehra festival from October 24, meeting held in shimla

Kullu Dussehra: अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा उत्सव बनेगा वैश्विक कार्यक्रम, पर्यटन को लगेंगे पंख

Sun, 24 Sep 2023 06:16 PM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला Published by: Krishan Singh Updated Sun, 24 Sep 2023 06:16 PM IST
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International Kullu Dussehra festival from October 24, meeting held in shimla
कुल्लू दशहरा को लेकर बैठक आयोजित। - फोटो : संवाद

मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि इस वर्ष अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा उत्सव वास्तव में वैश्विक कार्यक्रम बनने के लिए तैयार है। विभिन्न राज्यों के सांस्कृतिक दलों के साथ-साथ रूस, इस्राइल, रोमानिया, कजाकिस्तान, क्रोएशिया, वियतनाम, ताइवान, थाईलैंड, पनामा, ईरान, मालदीव, मलेशिया, कीनिया, दक्षिण सूडान, जाम्बिया, घाना और इथियोपिया सहित 19 देशों के प्रतिभागी उत्सव में अंतराष्ट्रीय सांस्कृतिक पेश करेंगे। सीएम ने 24 से 30 अक्तूबर तक आयोजित किए जा रहे कुल्लू दशहरा उत्सव के पूर्वावलोकन यानी कर्टन रेजर कार्यक्रम को आरंभ कर इसकी विवरणिका जारी की। रविवार को शिमला में राज्यस्तरीय कुल्लू दशहरा समिति की बैठक की अध्यक्षता करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यह उत्सव इस क्षेत्र में पर्यटन को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।

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अधिकारियों को उत्सव के लिए क्षेत्र में निर्बाध परिवहन सुविधा सुनिश्चित करने के दृष्टिगत मंडी-मनाली राष्ट्रीय राजमार्ग की मरम्मत कार्य युद्ध स्तर पर पूरा करने के निर्देश दिए। सुक्खू ने कहा कि बरसात के दौरान विशेषकर कुल्लू जिले में पर्यटन कारोबार बुरी तरह प्रभावित हुआ है। इसके बावजूद आपदा के दौरान जिला प्रशासन, विभिन्न विभागों, संगठनों एवं लोगों की ओर से राहत एवं पुनर्वास कार्यों के लिए दिया गया योगदान प्रशंसनीय है। हिमाचल एक बार फिर पर्यटकों का स्वागत करने के लिए पूरी तरह से तैयार है और आगामी कुल्लू दशहरा उत्सव इस संबंध में एक मील पत्थर साबित होगा। उन्होंने कहा कि उत्सव में 25 अक्तूबर को सांस्कृतिक परेड और 30 अक्तूबर को कुल्लू कार्निवल होगा। इसके साथ ही 13 विभाग क्षेत्र की समृद्ध विरासत को प्रदर्शित करते हुए प्रदर्शनियां लगाएंगे। मुख्यमंत्री ने सभी प्रतिभागियों और उपस्थित लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। इसके अलावा, उन्होंने सांस्कृतिक व लोक परंपराओं को संरक्षित करने के लिए उत्सव के दौरान पारंपरिक खेलों और स्थानीय लोक कलाकारों को बढ़ावा देने के महत्व पर बल दिया।
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इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री, मुख्य संसदीय सचिव सुंदर सिंह ठाकुर, विधायक भुवनेश्वर गौड़, रवि ठाकुर एवं सुरेंद्र शौरी, मुख्यमंत्री के प्रधान सलाहकार (मीडिया) नरेश चौहान, मुख्य सचिव प्रबोध सक्सेना, डीजीपी संजय कुंडू, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव भरत खेड़ा , संयुक्त सचिव आईसीसीआर अंजू, उपायुक्त कुल्लू आशुतोष गर्ग और अन्य गण्यमान्य व्यक्ति भी उपस्थित थे। कुल्लू हलके में जनता को समर्पित कीं 12 करोड़ की विकासात्मक परियोजनाएंशिमला। मुख्यमंत्री ने वर्चुअल माध्यम से कुल्लू विधानसभा क्षेत्र के लिए 12 करोड़ रुपये की कई विकासात्मक परियोजनाओं का उद्घाटन भी किया। इसमें कुल्लू में 5.49 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित चार मंजिला बहुउद्देशीय उपायुक्त कार्यालय का भवन शामिल है। इस भवन में दो सम्मेलन कक्ष, विभिन्न कमरे और पार्किंग सुविधा उपलब्ध है। इसके अतिरिक्त मुख्यमंत्री ने ढालपुर में उभरती खेल प्रतिभाओं के लिए 3 करोड़ रुपये से निर्मित इंडोर बैडमिंटन हॉल का उद्घाटन तथा कुल्लू में 3.51 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित महिला पुलिस स्टेशन भी जनता को समर्पित किया।
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इन क्षेत्रों के देवी-देवता लेते हैं भाग

कुल्लू दशहरा के लिए समिति ने जिला कुल्लू के 332 देवी-देवताओं को उत्सव में आने के लिए निमंत्रण भेजे हैं। यह निमंत्रण पत्र सभी कारदारों को उपमंडल अधिकारियों, तहसीलदारों व नायब तहसीलदारों की मदद से पहुंचाए गए हैं। कुल्लू दशहरा में बाह्य सराज आनी-निरमंड से लेकर मनाली तक के देवी-देवता भाग लेते हैं। भगवान रघुनाथ की अगवाई में मनाए वाले कुल्लू दशहरा में माता हिडिंबा, बिजली महादेव के साथ बाह्य सराज के अधिष्ठाता खुडीजल, टकरासी नाग, ब्यास ऋषि, कोट पझारी,चोतरू नाग, देवता चंभू, सप्त ऋषि समेत 300 देवी-देवता अपनी भागीदारी सुनिश्चित करते हैं। दशहरा उत्सव में साल दर साल देवी-देवताओं की संख्या में वृद्धि हो रही है। खास बात है कि बाह्य सराज के देवी देवता 150 से 200 किलोमीटर का पैदल सफर कर दशहरा उत्सव में पहुंचते हैं। 2021 में रिकॉर्ड 283 देवताओं ने उत्सव में भाग लिया था। जबकि 2022 में 304 देव-देवताओं ने दशहरा की शोभा को बढ़ाया था, जो दशहरा के इतिहास में सबसे अधिक मौजूदगी थी। 

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