हिमाचल: सूखे पेड़ों को चिन्हित करने और कटान के लिए मानक संचालन प्रक्रिया तैयार करने के निर्देश
मुख्यमंत्री ने कहा कि पेड़ों को प्रतिदिन चिन्हित करने का कार्य वन मंडलाधिकारियों की निगरानी में किया जाएगा और यह सुनिश्चित किया जाएगा कि यह कार्य समय पर पूरा हो।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने अधिकारियों को वनों में सूखे पेड़ चिह्नित करने की प्रक्रिया दैनिक आधार पर पूरा करने के निर्देश दिए हैं। राज्य वन विकास निगम के अधिकारियों की बैठक की अध्यक्षता करते हुए सीएम ने कहा कि पेड़ों को चिह्नित करने का कार्य वन मंडल अधिकारियों की निगरानी में होगा। सुनिश्चित किया जाएगा कि यह कार्य समय पर पूरा हो। कोताही बरतने पर सरकार संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करेगी। उन्होंने सूखे पेड़ों की सूची 15 जून तक राज्य वन निगम को भेजने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि काटने में देरी के कारण सूखे पेड़ जंगलों में ही सड़ जाते हैं। इससे प्रदेश को प्रतिवर्ष एक हजार करोड़ का नुकसान होता है।
उन्होंने अधिकारियों को इस प्रक्रिया में तेजी लाने के निर्देश दिए। उन्होंने वन निगम के अधिकारियों की शक्तियों के युक्तिकरण करने के निर्देश दिए, जिससे इमारती लकड़ी को वन निगम के नजदीकी डिपो तक ले जाने की प्रक्रिया में तेजी लाई जा सके। उन्होंने अधिकारियों को बैठक में लिए निर्णयों की प्रगति की समीक्षा के लिए 8 जून को वन निगम की बैठक करने के निर्देश दिए। कहा कि सूखे पेड़ों के कटान के लिए ठेकेदारों को सूचीबद्ध किया जाएगा। मुख्य संसदीय सचिव सुंदर सिंह ठाकुर, हिमाचल प्रदेश राज्य वन विकास निगम के उपाध्यक्ष केहर सिंह खाची, मुख्य सचिव प्रबोध सक्सेना, प्रधान सचिव वन ओंकार चंद शर्मा, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव भरत खेड़ा, मुख्य अरण्यपाल वन राजीव कुमार, अतिरिक्त उपायुक्त शिमला शिवम प्रताप सिंह और प्रदेश सरकार के वरिष्ठ अधिकारी बैठक में उपस्थित थे।
प्रदेश में 5जी तकनीक से शिक्षा क्षेत्र में आएंगे क्रांतिकारी बदलावः सुक्खू
मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि प्रदेश में शिक्षा क्षेत्र में 5जी तकनीक से क्रांतिकारी बदलाव होंगे। वह हिमाचल प्रदेश विवि सभागार में बुधवार को हमीरपुर छात्र कल्याण संघ के सांस्कृतिक कार्यक्रम में बतौर मुख्यातिथि बोल रहे थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार शिक्षा के क्षेत्र में भी क्रांतिकारी बदलाव करने जा रही है। शिक्षण संस्थानों में रोबोटिक्स, ब्लॉक चेन टेक्नोलॉजी, साइबर सुरक्षा, क्लाउड कंप्यूटिंग डेटा एनालिटिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग जैसे रोजगारोन्मुखी पाठ्यक्रम शुरू किए जाएंगे। ग्रामीण इलाकों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने को हर विधानसभा क्षेत्र में राजीव गांधी डे-बोर्डिंग स्कूल इसी वर्ष से शुरू करने जा रही है।
इनमें प्री-नर्सरी कक्षाएं भी शुरू की जाएंगी, जिसमें खेल सहित हर तरह की सुविधाएं उपलब्ध होंगी। वहीं, मेधावियों को उच्च शिक्षा के लिए एक प्रतिशत ब्याज दर पर सरकार ऋण उपलब्ध करवाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि अनाथ बच्चों को ‘चिल्ड्रन ऑफ द स्टेट’ का दर्जा देकर सरकार उन्हें हर कानूनी अधिकार देगी। 27 वर्ष की आयु तक इन बच्चों की देखभाल की जिम्मेदारी सरकार उठाएगी। इस मौके पर लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह, मुख्य संसदीय सचिव सुंदर सिंह ठाकुर, विधायक हरीश जनारथा और चैतन्य शर्मा, कांग्रेस नेता रजनीश किमटा, अतिरिक्त उपायुक्त शिमला शिवम प्रताप सिंह और अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।
विवि के अनुदान में 50 करोड़ की बढ़ोतरी
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में मुश्किल आर्थिक हालात के बावजूद सरकार ने हर विश्वविद्यालय के वार्षिक अनुदान में वृद्धि की है। हिमाचल प्रदेश विवि के वार्षिक अनुदान में 50 करोड़ की बढ़ोतरी की गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश की वर्तमान आर्थिक स्थिति के लिए पिछली सरकार जिम्मेदार है। वर्तमान प्रदेश सरकार प्रदेश की आर्थिक स्थिति को सुधारने के लिए कार्य करेगी।
छात्र संघ चुनाव बहाली पर चुप रहे सीएम
मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने संबोधन में विवि में कानूनी पढ़ाई के दौरान अध्यक्ष पद के लड़े चुनाव की यादों को भी साझा किया। मगर छात्र संगठनों द्वारा उठाई एससीए चुनाव बहाली की मांग पर उन्होंने कोई बात नहीं कही। हालांकि छात्र संगठनों को 2013 से प्रतिबंधित प्रत्यक्ष एससीए चुनाव बहाली की घोषणा की उम्मीद थी। इससे छात्र संगठन मायूस हुए। उन्होंने कहा कि उनके साथ अध्ययन करने वाले कई छात्र राजनीति के साथ-साथ अन्य क्षेत्रों में भी प्रदेश का नाम रोशन कर रहे हैं। आज उनके साथ पढ़ने वाले आज विवि में ही शिक्षक के रूप में सेवाएं दे रहे है। उन्होंने कहा कि भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए अपने अतीत को याद रखना जरूरी है। हिमाचल प्रदेश की समृद्ध संस्कृति को संजोए रखना भी युवा पीढ़ी का दायित्व है।