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भारत का नागरिकता कानून विश्व में नया नहीं: शांता
Sat, 18 Jan 2020 08:54 PM IST
Krishan Singh
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पालमपुर (कांगड़ा)
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पालमपुर (कांगड़ा)
Published by: Krishan Singh
Updated Sat, 18 Jan 2020 08:54 PM IST
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पूर्व मुख्यमंत्री शांता कुमार ने कहा कि भारत सरकार का बनाया गया नागरिकता (संशोधन) कानून विश्व में नया नहीं है। दुनिया के बहुत से देशों में मूल निवासियों को फिर से बसाने और नागरिकता देने के कानून बने हैं। अमेरिका में मूल निवासी जिन्हें रेड इंडियन कहा जाता था, उन्हें कभी भी वापस आने पर नागरिकता दी जाती है।
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ऑस्ट्रेलिया, ब्राजील, इटली, फ्रांस, जर्मन, रूस और स्पेन जैसे कई देशों में ऐसे कानून हैं कि वहां के मूल निवासी कभी भी अपने देश लौट सकते हैं। वापस लौटने पर उन्हें नागरिकता दी जाती है। जापान में किसी भी अन्य देश में बसे मूल निवासी को वापस आने के लिए एयर टिकट, नि:शुल्क शिक्षा और स्वास्थ्य का भी अधिकारी होता है। विश्व के करीब सभी मुस्लिम और ईसाई देशों में इसी प्रकार के कानून है।
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लिहाजा, यह समझ नहीं आता कि भारत में ऐसा कानून बनाने पर विपक्ष क्यों आपत्ति कर रहा है। उन्होंने कहा कि इस बात पर विशेष ध्यान देना होगा कि विश्व में मुसलमानों के लिए 56 देश हैं जहां उन्हें नागरिकता मिल सकती है, लेकिन हिंदुओं के लिए पूरी दुनिया में केवल एक भारत देश है जहां उन्हें नागरिकता मिल सकती है।
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हिंदुओं को भारत में शरण नहीं मिलेगी तो वह कहां जाएंगे। मनमोहन सिंह ने कहा था कि अल्पसंख्यकों को पाकिस्तान और बांग्लादेश में उत्पीड़न झेलना पड़ रहा है तो हमारी नैतिकता है कि उन सब को नागरिकता दी जाए। शांता ने विपक्ष नेताओं से पूछा है कि इन सब ऐतिहासिक तथ्यों के प्रकाश में उन्हें यह आंदोलन भड़काने पर जरा भी शर्म नहीं आती।