कुल्लू दशहरे का आगाज, हिंदू-मुस्लिमों ने खींचा भगवान रघुनाथ का रथ
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देव महाकुंभ अंतरराष्ट्रीय दशहरा उत्सव मंगलवार को भगवान रघुनाथ की भव्य रथ यात्रा के साथ शुरू हो गया। श्रीराम चंद्र की जय के उद्घोष के साथ शुरू हुई ऐतिहासिक रथ यात्रा में हजारों की तादाद में लोग शामिल हुए। हिंदू और मुस्लिमों ने एक साथ अधिष्ठाता देव रघुनाथ का रथ खींचा। सिख समुदाय के लोगों ने इत्र का छिड़काव कर माहौल को खुशनुमा बना दिया।
रथ यात्रा के दौरान राज्यपाल आचार्य देवव्रत बतौर मुख्यातिथि मौजूद रहे। देव- मानस मिलन के प्रतीक इस धार्मिक व सांस्कृतिक महोत्सव के शुभारंभ पर हजारों की तादाद में लोग ढालपुर मैदान पहुंचे। 90 देवी-देवता शामिल हुए यात्रा में। रथ यात्रा में शामिल होने के लिए उमड़े हजारों लोग।
ढोल-नगाड़ों और देव वाद्य यंत्रों की मंगल ध्वनियों के बीच भगवान रघुनाथ, बिजली महादेव समेत कई देवताओं के साथ ढालपुर मैदान पहुंचे। रघुनाथ के रथ मैदान में पहुंचते ही माहौल भक्तिमय हो गया। जयकारों से पूरा ढालपुर गूंज उठा। माता भुवनेश्वरी का संकेत मिलते ही रथ यात्रा शुरू हुई।
रथ यात्रा के साथ ही भगवान रघुनाथ और दशहरा में पहुंचे देवी देवता ढालपुर स्थित अस्थायी शिविरों में विराजमान हो गए हैं। दशहरा उत्सव में इस बार करीब 300 देवता पहुंचे हैं। इससे पूर्व दोपहर बाद राज परिवार की दादी माता हिड़िंबा के रथ मैदान पहुंचते ही भगवान रघुनाथ के रथ के सभी पर्दे हटा दिए गए।
खुशमिजाज मौसम, पारंपरिक वाद्य यंत्रों की ध्वनि पर देव रथों के साथ चल रहे हजारों देवलु। राज भेशभूषा में राज परिवार के लोग। रथ पर सवार भगवान रघुनाथ। रघुनाथ जी के रथ को खींच रहे सैंकड़ों लोग। रथ के साथ व पीछे चल रहे देवी-देवता। ऐसा ही देव आस्था का नजारा देवभूमि कुल्लू में मंगलवार को अंतरराष्ट्रीय दशहरा उत्सव के आगाज पर निकली रथ यात्रा में दिखा।
दशहरा उत्सव में करीब तीन सौ देवी-देवता पहुंच गए हैं। दशहरा उत्सव के उपलक्ष्य पर देवभूमि कुल्लू में देवी-देवताओं का महाकुंभ शुरू हो गया। दशहरा उत्सव का आगाज भगवान रघुनाथ की रथ यात्रा से हुआ। रथ यात्रा में आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा। देव समागम के प्रति अटूट आस्था के चलते देश-विदेश से लोग रथ खींचने के लिए पहुंचे। रथ को खींचने के लिए लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। दशहरा उत्सव में पहुंचे देवी देवताओं ने कुल्लू को देवमयी कर दिया। सुबह से ही हजारों श्रद्धालुओं को अधिष्ठाता देव भगवान रघुनाथ की शोभा यात्रा का इंतजार रहा।
सभी परंपराओं का निर्वहन करने के बाद करीब ढ़ाई बजे भगवान रघुनाथ अपने मंदिर से पालकी में सवार होकर कर रथ ग्राउंड के लिए रवाना हुए। रास्ते में उनका भव्य स्वागत लोगों द्वारा किया गया। वहीं पहले से ही हजारों लोग और सैकड़ों देवी देवता ढालपुर में अधिष्ठा की राह देख रहे थे। करीब चार बजे अधिष्ठाता रथ ग्राउंड में प्रवेश हुए। जहां पहले से ही हजारों लोग अधिष्ठाता की राहत देख रहे थे। अधिष्ठा के ग्राउंड में पहुंचते ही पूरा ग्राउंड जय श्री राम के जयकारों से गूंज उठा। रघुनाथ को पालकी से उतार कर रथ में बैठाया गया। इसी दौरान राज परिवार की दादी कही जाने वाली देवी हिडिंबा करीब करीब सवा चार बजे ग्राउंड में पहुंची।
देवी जैसे ही अधिष्ठाता के रथ के पास पहुंची रथ के सभी पर्दे हटा दिए गए। इससे पहले देव धूमल नाग पूरी व्यवस्था बनाने में जुटे हुए रहे। सभी तैयारियां पूरी थी। बस अब इंतजार था पहाड़ी पर बैठी देवी भुवनेश्वरी के संकेत का। करीब साढ़े चार बजे पहाड़ी से देवी का संकेत मिलते ही अधिष्ठाता देव भगवान रघुनाथ की शोभा यात्रा जय श्री राम के जयकारों के साथ शुरू हुई। देर शाम को भगवान रघुनाथ अपने अस्थायी शिविर में पहुंचे। इसके बाद शोभा यात्रा में शामिल देवी देवता भी अपने अस्थायी शिविरों के लिए रवाना हो गए।