देश की बढ़ती प्रौद्योगिकी जरूरतों को पूरा करेगी आईआईटी मंडी
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मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने कहा कि आईआईटी मंडी के पास 100 करोड़ रुपये से अधिक लागत की शोध परियोजनाएं हैं। यह किसी भी संस्थान के लिए शानदार उपलब्धि है। सीएम ने बुधवार को आईआईटी मंडी के 12वें स्थापना दिवस पर इंटरडिसिप्लिनरी साइबर-फिजिकल सिस्टम का लोकार्पण किया। यह संस्थान समाज की बढ़ती प्रौद्योगिकी जरूरतों को पूरा करेगा। अगली पीढ़ी की प्रौद्योगिकियों के लिए अग्रणी देशों के अंतरराष्ट्रीय रुझानों तथा रोडमैप का भी जायजा लेगा। आईआईटी मंडी देश के उन चुनिंदा संस्थानों में होगा, जिसे इंटरडिसिप्लिनरी साइबर-फिजिकल सिस्टम (एनएम-आईसीपीएस) के राष्ट्रीय मिशन के तहत 110 करोड़ से टेक्नालॉजी इनोवेशन हब बनाया जाएगा। इससे देश में साइबर-फिजिकल प्रणालियां (सीपीएस) और संबंधित प्रौद्योगिकियां सुगम हो जाएंगी। इसके बाद मुख्यमंत्री ने आईआईटी मंडी के उत्तरी परिसर स्थित केंद्रीय पुस्तकालय का लोकार्पण किया। इस पर 9.5 करोड़ खर्च किए गए हैं। आईआईटी के निदेशक प्रोफेसर अजीत कुमार चतुर्वेदी ने कहा कि वर्ष 2009 में आईआईटी मंडी की स्थापना के बाद इस संस्थान ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। डीन, वित्त डॉ. विशाल सिंह चौहान ने धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत किया।
शोधों के लिए इन्हें किया गया सम्मानित
डॉ. अमित जायसवाल, डॉ. हितेश, डॉ. अजय, डॉ. राहुल, डॉ. मौसमी, डॉ. देविका, डॉ. दलीप, डॉ. मनोज, डॉ. नरसारेड्डी, डॉ. राहुल और डॉ. राजेश को शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित किया गया। सुनील, मिलन, दौलतराम, दशमेश, नांगु राम, रामप्रकाश, नवीन, दिनेश, नवीश, विजय, हेमराज, सुच्चा सिंह, रविंद्र कुमार, हेम सिंह और माखन सिंह को कर्मचारी पुरस्कार से नवाजा गया। आर्यन सिंह, सचित यादव और पार्थसारथी नायक को विद्यार्थी पुरस्कार से सम्मानित किया गया। बेकार पीईटी बोतल से अधिक कारगर फेस मास्क का निर्माण, होम क्वारंटीन मैनेजमेंट एप्लीकेशन, सैन्य कर्मियों के लिए वेबसाइट बनाना और कोविड को फैलने से रोकने में उपयोगी आटोमेटिक थर्मल स्क्रीनिंग मशीन बनाना, वाई-फाई चालित स्मार्ट वेंटिलेटर बनाना आदि शोधों के लिए यह सम्मान दिए गए हैं।
हिमाचल में भूस्खलन से संवेदनशील क्षेत्रों में लगेंगे वार्निंग सिस्टम
हिमाचल में भूस्खलन से संवेदनशील क्षेत्रों में अर्ली वार्निंग सिस्टम लगेंगे। भूस्खलन से पहले यह यंत्र प्रशासन और संबंधित क्षेत्रों के बाशिंदों को अलर्ट कर देंगे। यह भारत में इस तकनीक का सबसे बड़ा व्यावहारिक प्रयोग होगा। 2017 में कोटरोपी हादसे के बाद आईआईटी मंडी ने इस सिस्टम को ईजाद किया था। बुधवार को आईआईटी मंडी ने जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण मंडी से सहयोग करार किया है। नए सिस्टम लगने से भूस्खलन की निगरानी करने, अलर्ट, चेतावनी जारी करने वाले लोगों को संभावित भूस्खलन से सतर्क रखने के प्रयासों में मजबूती आएगी। पहले चरण में जिले में ऐसे 20 सिस्टम लगाने की योजना है। बाद में इसे अन्य जिलों में भी लगाया जाएगा।