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आईजीएमसी शिमला: दिल की धड़कन रुकने पर सीपीआर देने में निपुण होंगे डॉक्टर, ट्रेनिंग प्रोग्राम शुरू
Sat, 21 Oct 2023 10:27 PM IST
Krishan Singh
संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला
संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला
Published by: Krishan Singh
Updated Sat, 21 Oct 2023 10:27 PM IST
सार
आईजीएमसी में कार्यरत विभिन्न विभाग के रजिस्ट्रार डॉक्टर सीपीआर के जरिये आपात स्थिति में इलाज करने के लिए पूरी तरह सक्षम होंगे।
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आईजीएमसी में सीपीआर ट्रेनिंग प्रोग्राम में मौजूद डॉक्टर।
- फोटो : संवाद
विस्तार
दिल की धड़कन रुकने पर अब मरीज की जान नहीं जाएगी। आईजीएमसी में कार्यरत विभिन्न विभाग के रजिस्ट्रार डॉक्टर सीपीआर के जरिये आपात स्थिति में इलाज करने के लिए पूरी तरह सक्षम होंगे। आईजीएमसी में एनेस्थीसिया विभाग की ओर से यह कार्यक्रम पहली मर्तबा शुरू किया गया है। आईजीएमसी में प्राचार्य का कार्यवाहक पदभार संभाल रहे डॉ. सुरेंद्र सिंह ने पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि नेशनल मेडिकल कमीशन की ओर से यह ट्रेनिंग प्रोग्राम अनिवार्य कर दिया गया है।
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इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (आईजीएमसी) के न्यू ओपीडी ब्लॉक के आपातकालीन विभाग में यह ट्रेनिंग प्रोग्राम शुरू किया गया है। इसमें सीएमसी लुधियाना से आए डॉ. विनय गुप्ता, डॉ. शिखा, डॉ. विनीत, आईजीएमसी के डॉ. सुरेंद्र सिंह, डॉ. अजय सूद, डॉ. कार्तिक, डॉ. ऊषा, डॉ. अंकिता और डॉ. दारा सिंह ने सर्जरी, गायनी और ईएनटी विभाग के रजिस्ट्रार डॉक्टरों को ट्रेनिंग दी। कुल 30 डॉक्टर इस ट्रेनिंग में शामिल हुए। बताया जा रहा है कि यह ट्रेनिंग रविवार को भी होगी। ट्रेनिंग में शामिल डॉक्टरों को प्रमाणपत्र भी जारी किए जाएंगे। इसके अलावा पुलिस, स्कूलों और लोगों को सीपीआर की तकनीक के बारे में जानकारी दी जाएगी।
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ये है सीपीआर
कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन यानि की सीपीआर एक इमरजेंसी लाइफ सेवर प्रक्रिया है। इसे तब किया जाता है जब दिल धड़कना बंद कर देता है। इसके अलावा हार्ट ऑर्गेनाइजेशन के अनुसार कार्डिएक अरेस्ट के बाद तत्काल सीपीआर देने से मरीज के बचने की संभावना दोगुनी या तिगुनी हो जाती है।
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