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हिमाचल में कागजों में ही चल रहा मानवाधिकार आयोग
सुरेश शांडिल्य/अमर उजाला, शिमला
Updated Tue, 24 Jan 2017 12:37 AM IST
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हिमाचल प्रदेश में राज्य मानवाधिकार आयोग कागजों में ही चल रहा है। भारत सरकार के गृह मंत्रालय की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार हिमाचल में आयोग गठित है, जबकि धरातल पर न तो चेयरमैन है और न ही अलग से स्टाफ। हिमाचल सरकार के कुछ अधिकारियों ने 2015 में इस बारे में केंद्र को गलत जानकारी दी कि प्रदेश में मानवाधिकार आयोग चल रहा है।
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इसके आधार पर गृह मंत्रालय की रिपोर्ट में कहा गया कि हिमाचल में ह्यूमन राइट कमीशन काम कर रहा है। इसके बाद इसे वार्षिक रिपोर्ट में शामिल किया गया। इससे उलट प्रदेश सरकार के आला अफसर भी यह मान रहे हैं कि अभी तक आयोग का गठन नहीं हुआ है। यह मामला अभी राज्य सरकार के विचाराधीन है। केंद्रीय गृह मंत्रालय की वर्ष 2015-16 की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार राज्य सरकारों से मिली सूचना के मुताबिक आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, असम, बिहार, छत्तीसगढ़, गुजरात एवं हिमाचल जैसे 24 राज्यों ने 31 दिसंबर 2015 तक राज्य मानवाधिकार आयोग स्थापित कर लिए हैं।
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केंद्र और राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग राज्यों में मानवाधिकार आयोगों की स्थापना के बारे में गंभीर है। 24 जुलाई 2015 को डीके बसु बनाम पश्चिम बंगाल सरकार मामले में सुप्रीम कोर्ट ने आदेश जारी किए हैं कि दिल्ली, हिमाचल प्रदेश, मिजोरम, अरुणाचल प्रदेश, मेघालय, त्रिपुरा और नगालैंड में राज्य मानवाधिकार आयोगों की स्थापना की जाए। मानवाधिकार अधिनियम 1993 की धारा 21 में भी राज्य मानवाधिकार आयोगों की स्थापना जरूरी है। आयोग में लोगों के अधिकारों के हनन के मामलों की सुनवाई होती है।
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राज्य मानवाधिकार आयोग के गठन का मामला प्रदेश सरकार के विचाराधीन है। आयोग का काम कुछ अधिकारियों और कर्मचारियों को सौंपा गया है। ये सच है कि अभी तक आयोग का गठन नहीं हो पाया है। वर्ष 2015 में केंद्र को दी गई सूचना के बारे में जानकारी नहीं है। -प्रबोध सक्सेना, प्रधान सचिव (गृह) हिमाचल सरकार
दशक पहले निष्क्रिय हो गया आयोग
हिमाचल में राज्य मानवाधिकार आयोग एक दशक पहले ही निष्क्रिय हो गया था। इससे पहले भी मात्र औपचारिकता ही निभाई जाती थी। अभी मानवाधिकार आयोग का न तो कोई चेयरमैन और न ही अलग से स्टाफ है। लोकायुक्त कार्यालय का स्टाफ ही आयोग से संबंधित पत्राचार देख रहा है।