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बाबू बने चालक-परिचालकों को फरमान, दफ्तर छोड़ फील्ड में जाओ
गगन दीप/अमर उजाला, हमीरपुर
Updated Sun, 26 Mar 2017 12:03 AM IST
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प्रदेश में मेडिकल अनफिट होने का प्रमाणपत्र देकर बस अड्डों और कार्यालयों में बाबू बनकर बैठे चालक-परिचालकों को निगम ने बसों को भेजने के फरमान सुनाए हैं। सिर्फ उन कर्मचारियों को ही राहत मिलेगी, जो सही मायनों में बस में ड्यूटी देने में सक्षम नहीं हैं। सूबे के चार मंडलों में 242 चालक और परिचालक बसों में ड्यूटी देने के बजाय बस अड्डों और कार्यालयों में बैठकर सैलरी ले रहे थे।
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लेकिन, प्रबंधन के आदेशों के बाद अब इन चालक-परिचालकों को बसों के साथ भेजा जाएगा। चालक और परिचालकों को ड्यूटी या सड़क हादसे में अक्षम होने पर बस अड्डों या कार्यालयों में लगाया जाता है। बाकायदा इसके लिए संबंधित चालक या परिचालक का मेडिकल प्रमाण पत्र होना अनिवार्य होता है, लेकिन कई चालक और परिचालकों ने राजनीतिक दबाव या अन्य किसी तरीके से मेडिकल प्रमाणपत्र बनवाकर बस अड्डों और कार्यालयों में बाबुओं की कुर्सी संभाल रखी है।
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इससे बसों में कार्यरत चालक-परिचालकों पर भी काम का बोझ बढ़ रहा है। निगम प्रबंधन ने इन सभी चालक-परिचालकों को ड्यूटी पर जाने के आदेश दिए हैं। महज उन्हीं कर्मचारियों को बस अड्डों या कार्यालयों में रखा जाएगा, जो सही मायने में बस में सेवाएं देने को सक्षम नहीं हैं। बाकायदा अक्षम चालक या परिचालकों का भी मेडिकल करवाया जाएगा। परिवहन मंत्री जीएस बाली का कहना है कि प्रबंधन ने बस अड्डों या कार्यालयों में बैठे चालक-परिचालकों को बसों में भेजने का निर्णय लिया है।
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कहां कितने चालक-परिचालक
मंडल संख्या
हमीरपुर 45
धर्मशाला 60
मंडी 46
शिमला 91
कुल 242