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सरकारी बसों के शीशे गायब, ठिठुर रहे यात्री

Wed, 03 Dec 2014 12:33 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला Updated Wed, 03 Dec 2014 12:33 PM IST
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HRTC buses in bad condition.

सर्दी के मौसम में एचआरटीसी बसों में सफर करने वाले यात्री ठंड में ठिठुरने को मजबूर हैं। एचआरटीसी प्रबंधन बिना शीशों की बसों को लोकल और लांग रूटों पर हांक रहा है। पुरानी बसों के शीशे खड़खड़ा रहे हैं और नई बसों के शीशों से लॉक गायब हैं। हालात इतने बदतर हो चुके हैं कि अब यात्री निगम की बसों में सफर करने से भी गुरेज करने लगे हैं।

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सर्दी का मौसम शुरू हो चुका है लेकिन एचआरटीसी ने अभी तक बसें दुरुस्त नहीं की हैं। कुछ बसों की खिड़कियों से शीशे गायब होने से सफर करने वाले यात्रियों को भारी परेशानी झेलनी पड़ रही है। बसों की खिड़कियों में शीशे न होने से दिन के समय यात्री धूल मिट्टी से जूझ रहे हैं और रात को सर्द हवाओं के कारण परेशानी झेलनी पड़ रही है।
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यात्री जब चालक परिचालक को अपनी परेशानी बताते हैं तो जवाब मिलता है कि हम क्या करें जब मैनेजमेंट ही गंभीर नहीं। हालत इतने बदतर हो चुके हैं कि पुरानी बसों के शीशे खुद ही खुल जाते हैं। शीशों की रबड़ खराब होने से पूरे सफर में शीशे खड़खड़ाते रहते हैं। निजी बसों में भी खिड़कियों के शीशे खराब होने के कारण लोगों को दिक्कत झेलनी पड़ रही है।
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बस का शीशा खराब है तो हमें बताएं
जिस बस में आप सफर कर रहे हैं अगर उसकी खिड़की का शीशा खराब है तो उसकी मोबाइल क्लिप हमें हमारे व्हट्स एप नंबर 94594-83666 या हमारे ईमेल aushimla@gmail.com पर बस का नंबर, रूट और अपने नाम के साथ भेजें।

मुंह ढककर कर रहे सफर
तारादेवी डिपो के तहत ठियोग में लोकल रूटों पर चलने वाली बसों में यात्री मुंह ढककर सफर कर रहे हैं। चालकों को मास्क लगा बसें चलानी पड़ रही हैं। लोग बिना शीशे की बसों में सफर करने को मजबूर हैं।


धूल से सनी हैं रोहड़ू की बसें

रोहड़ू डिपो की बसों में सफर करने से लोग कतराने लगे हैं। शीशे खराब होने के कारण धूल मिट्टी की मोटी परत बस की सीटों पर जम जाती है। बस में सवार होने के बाद यात्रियों को सीट पर बैठने से पहले मिट्टी झाड़नी पड़ती है। मिट्टी से यात्रियों की सेहत पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है।

बसों के शीशे टूटे होना गंभीर विषय है। यह संभव नहीं की खराब बसें रूटों पर भेजी जा रही हों। सभी डिपो को इसे चेक करने के निर्देश जारी किए जाएंगे।
-रामकुमार गौतम कार्यकारी निदेशक, एचआरटीसी

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