देश के सबसे लंबे इस रूट पर आठ माह बाद दौड़ी बस, चार दर्रे पार कर 36 घंटों में पूरा होगा सफर
करीब आठ माह बाद देश के सबसे लंबे और अधिक ऊंचाई से गुजरने वाले दिल्ली-केलांग-लेह रूट पर गुरुवार को हिमाचल पथ परिवहन निगम की बस दौड़ी। एचआरटीसी की बस चार बर्फीले दर्रे पार कर 1072 किलोमीटर लंबा सफर 36 घंटों में तय करेगी।
जिला मुख्यालय केलांग के बस अड्डे से एसडीएम अमर नेगी ने बस को हरी झंडी दिखाकर लेह के लिए रवाना किया। परिवहन निगम की बस दोपहर 2.30 बजे दिल्ली से लेह के लिए निकली। दिल्ली से निकली यह बस कल लेह पहुंचेगी।
साढ़े 17 हजार फीट की ऊंचाई वाले दर्रे वाले इस दुर्गम और लंबे रूट पर रोमांचक और सुरक्षित सेवा देने के लिए निगम लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड में अपना नाम दर्ज करा चुका है। एसडीएम अमर नेगी ने बताया कि एचआरटीसी की इस सीजन की पहली बस सेवा केलांग से लेह के लिए आरंभ हुई है।
दिल्ली से लेह तक ये है किराया
रोहतांग समेत लाहौल और जम्मू-कश्मीर की ऊंची चोटियों पर भारी बर्फबारी के चलते बीते साल 15 अक्तूबर से यह बस सेवा बंद थी। पर्यटक और आम लोग अपेक्षाकृत सस्ती बस सुविधा का लंबे समय से इंतजार कर रहे थे।
दिल्ली से लेह तक का एक तरफ का किराया महज 1500 रुपये है। बर्फ से लकदक पहाड़ों से होकर गुजरने वाली इस बस में सफर का अपना ही रोमांच है। देश-विदेश के सैलानियों को इसका खास इंतजार रहता है।
बस की ऑनलाइन बुकिंग नहीं होती क्योंकि इसका मनाली से लेह तक का सफर मौसम पर निर्भर करता है। दिल्ली से लेह का टैक्सी यूनियन का किराया करीब 45,000 रुपये है।
एचआरटीसी के नाम एशिया के सबसे ऊंचे गांव किब्बर तक बस सेवा चलाने का भी लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड में दर्ज है। उधर, लेह-दिल्ली बस चलने से घाटी के लोगों को पर्यटन कारोबार के चमकने की उम्मीद है।
17480 फीट की ऊंचाई से गुजरेगी बस
यह बस कई ऐसे दर्रों से गुजरती है, जहां का तापमान शून्य से कई डिग्री नीचे रहता है। पहला दर्रा रोहतांग पड़ता है जो 13050 फीट की ऊंचाई पर है। बारालाचा दर्रा 16020, लाचुंग दर्रा 16620 और तंगलंग दर्रा 17480 फीट की ऊंचाई पर है, जहां से बस गुजरकर लेह पहुंचती है। इस रूट पर सिर्फ एचआरटीसी की ही बस चलती है।
तीन चालक बदलेंगे, केलांग में रात्रि ठहराव
इस बस को दिल्ली से लेह तक पहुंचाने के लिए तीन चालक बदलने पड़ते हैं। दिल्ली से लाने वाला चालक कुल्लू में बदला जाएगा। दूसरा चालक बस को कुल्लू से केलांग लेकर जाएगा। यहां नाइट स्टे होगा। यात्रियों को अपने स्तर पर खाने-पीने और सोने का प्रबंध करना होता है। अगली सुबह तीसरा चालक बस केलांग से लेह तक पहुंचाएगा।